मनोहर पर्रिकर से जुडी इन बातो को जानकर उनके फैन हों जायेंगे आप

स्कूल के एक कार्यक्रम के दौरान उस इंसान ने छह साल के बच्चे को अपने सामने गुटखा खाते देखा. उन्होंने उस बच्चे को डांट लगाई और सोच लिया कि गोवा में गुटखे को बैन करना है. उन्हें खुद भी गुटखा खाने की आदत थी थे. ऐसे में उन्होंने पहले खुद गुटखा खाना बंद किया और फिर इसे राज्य में बैन कर दिया। ये किस्सा किसी आम इंसान का नही है। ये किस्सा है गोवा के उस मुख्यमंत्री का जिसने मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी अपने आपको राजा कम और सेवक ज्यादा समझा।

जी हाँ, आज हम बात कर रहे है गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की। मुख्यमंत्री रहने के बावजूद बिना किसी सुरक्षा के निजी मकान में रहने वाले पर्रिकर साहब को स्कूटर से अपने ऑफिस जाते आसानी से देखा जा सकता है। मुंबई (आईआईटी) से ग्रेजवेशन करने वाले मनोहर पर्रिकर बतौर मुख्यमंत्री अमेरिका सहित कई देशों की यात्राओं पर सैंडल और हाफ शर्ट पहन कर जा चुके हैं।

यूँ तो मुख्यमंत्री भी जनता के द्वारा चुना गया एक सेवक ही होता है और उसकी सादगी पर यूँ इइतना लम्बा लंबी आर्टिकल बनाने का कोई मतलब नही बैठता लेकिन बदलते टाइम ने लोगो के स्टेंडर्ड को भी बदलकर रख दिया और इससे ज्यादातर नेता भी बच नही सके है । सब आजकल अपने ड्रेसिंग सेंस पर बहुत ज्यादा ध्यान देते है। ऐसे में अगर गोवा के मुख्यमंत्री चप्पल और शर्ट को बाहर रखकर घूम रहे है तो उनकी सादगी की तारीफ करना बनता ही है। हालांकि सिर्फ कपड़ो की सादगी ही उन्हें बढ़िया लीडर नही बनाती बल्कि उनके काम भी कुछ ऐसे है कि जिससे उनपर गर्व करने को मन कर जाता है। आज हम आपको उनसे जुड़े कुछ किस्सों से रुबरु कराने जा रहे है। जिससे आप भी उनकी सादगी और काम करने वाले अंदाज के दिवाने हो जाएंगे।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बताती हैं कि एक बार गोवा के मुख्यमंत्री रहते हुए पर्रिकर राजस्थान गए. जयपुर एयरपोर्ट पर उन्हें कई अधिकारी लेने पहुंचे लेकिन वे उन्हें वहां नहीं मिले. काफी पूछताछ करने पर अधिकारियों को पता लगा कि पर्रिकर तो अपना बैग कंधे पर रखकर टैक्सी से खुद ही एयरपोर्ट से होटल जा चुके हैं.

मनोहर पर्रिकर काम के प्रति काफी ईमानदार माने जाते है। उनके लिए कहा जाता है कि वो 18 से 20 घण्टे काम करने को ज्यादा तवज्जो देते है। उनके लिए कहा गया कि एक बार जब वो ऑफिस में अपने सचिव के साथ मिलकर रात 12 बजे तक काम करते रहे। काम खत्म हुआ तो सचिव ने सुबह थोड़ा देर से आने की बात कही तो मनोहर पर्रिकर ने उन्हें आधा घन्टा लेट यानी सुबह के 6.30 तक आने को कह दिया। सुबह 6.30 बजे जब सचिव ऑफीस में पहुँचे तो उन्हें लगा कि शायद वो सबसे पहले आ गए लेकिन वो उस वक्त सत्र रह गए जब उन्हें पता लगा कि मनोहर पर्रिकर साहब तो सुबह 5.30 से ही ऑफिस में आकर फाइलें निपटने लगवाने में लगे हुए थे।

पर्रिकर साहब अपने वादे के बहुत पक्के माने जाते है। हर सप्ताह की तरह वो जनता दरबार लगाकर लोगो की समस्याओं को सुनने में व्यस्त थे तभी एक महिला अपने बेटे के साथ उनके यहां पहुँची और उसे लैपटॉप देने की बात कही । अधिकारियों ने कहा कि ये लड़का सरकारी योजना का हकदार नही है इसलिए उन्होंने महिला को जाने को कह दिया। तभी पर्रिकर को याद आया कि ये तो वही महिला है जिससे वो जनसपंर्क अभियान के दौरान मिले थे और उसे योजना के लाभ बताया था। उन्होंने उस लड़के को अपने पास बुलाया और अपनी जेब से पैसे देकर उस लड़के को लैपटॉप दिला दिया।

यूँ तो मनोहर पर्रिकर पेनकिर्याज यानी अग्नाशय की बीमारी से जूझ रहे है लेकिन इसके बावजूद भी वो ऑफीस पहुँच रहे है। अभी 2019 के पहले दिन यानी नए साल की बात है जब मनोहर पर्रिकर ड्राप लगाकर सचिवालय पहुँचे थे । इससे पहले भी नाक में ड्राप लगाकर दो पुलों का निरीक्षण करने की तस्वीर सामने आ चुकी है। ये सब तो महज एक ट्रेलर है।

सड़को पर उतरकर ट्रैफिक मैनेज करने वाले तो कभी बीमारी की हालत में भी सरकारी कामकाज पर निगाह रखने वाले पर्रिकर की सादगी और कर्मठता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पंसद किया और उन्हें देश के रक्षा मंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद दिया। जिसमे उन्होंने काफी शानदार काम किया और उनकी अगुवाई में ही भारत ने पाक के भीतर घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया। इस बात में भी कोई दोराय नही है कि इस तरह के लीडर की देश को काफी ज्यादा जरूरत भी है। सुनने और देखने मे ये सब बस फिल्मी सा लगता है लेकिन ये सब वो सच है जिसको दिल्ली और नोइडा की मीडिया दिखाने से थोड़ा परहेज करती है। जब हम गलत व्यक्ति को लतियाते है तो ये आपका और हमारा फर्ज बनता है कि किसी अच्छे लीडर की क्वालिटी को भी दुनिया के बीच लेकर जाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों से भी कोई मनोहर पर्रिकर तैयार हो सके।

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