‘शरीर पर आरोपी ने एक नहीं, दो नहीं बल्कि 41 बार चाकू से किया वार’

पति पत्नी की बहस और झगड़े एक मिडिल क्लास परिवार की लगभग रोज की कहानी है..लेकिन क्या कोई घरेलू झगड़ा इतना बढ़ सकता है कि कोई किसी की जान ले ले?…एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी…पति ने इतनी बेरहम मौत पत्नी को दी…की आप सुन भी दंग रह जाएंगे…आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे की क्या कोई इतना भी बेरेहम हो सकता है..इस घटना को अंजाम देने में पति अकेले दोषी नहीं था…बल्कि पति से भी ज्यादा बेरेहम और बड़ा कसुरवार उसका दोस्त नसीम अहमद था…जिसने अपने दोस्त को मर्डर करने के लिए उकसाया था….और मर्डर करने में नसीम उसका सहायक भी रहा….ये घटना रोका जा सकता था अगर नसीम अहमद ने चाहा होता तो…लेकिन नसीम ने आग में घी डालने का काम किया और इस घटना को अंजाम तक पहुंचा दिया…

जानते हैं की पुरा मामला क्या है ?

दिल दहला देने वाली हत्या की ये वारदात हरियाणा के गुरुग्राम की है…जहां पंकज और नेहा दोनों साथ में रहते थे..पंकज और नेहा की शादी को लगभग 2 साल हो गए थे..लेकिन 2 फ़रवरी को नेहा की लाश घर में पड़ी हुई मिली….उसके शरीर पर आरोपी ने एक नहीं, दो नहीं बल्कि 41 बार चाकू से वार किया था..इतना ही नही महिला पर इतनी बार वार किया गया था की उसका दिमाग खोपड़ी से बाहर निकल आया था….इस हत्या को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि उसका खुद का पती पंकज ही था…पंकज ने अपने दोस्त नसीम अहमद के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया….

बहरहाल, पुलिस ने नसीम और पंकज दोनों को गिरफ्तार कर दोनों पर दफ़ा 302 के तहत मर्डर का चार्ज लगा दिया है..और पूरे मामले की छानबीन कर रही है..

पंकज ने पुलिस को बताया कि वो नेहा से नफ़रत करता था. इसलिए क्योंकि वो अक्सर अपने घरवालों के कहने पर उसकी बेइज्ज़ती करती थी. उसे ये पसंद नहीं था. और इस बात को लेकर नेहा और पंकज में कई दफा लड़ाईया भी होती थी…वो नेहा से इसका बदला लेना चाहता था…और कई दफा पंकज नेहा को मारने की सोचता था…प्लानिंग करता था लेकिन उसके इस घटना को कभी अंजाम नहीं दिया…लेकिन इस बार ऐसा क्या हुआ जो पंकज ने नेहा को मौत के घाट उतार दिया…इस बार पंकज ने ये सारी बात अपने दोस्त नसीम अहमद को बताई..तब क्या था नसीम अहमद ने इस प्लानिंग को सफल बनाने के लिए पंकज को नसीहत देते हुए उसकी हत्या करने में मदद कर दी…नसीम ने पंकज की हथियार मुहैय्या कराने में मदद की. साथ ही उसे ये सुझाया कि क़त्ल वो अपने घर पर ही करे. वो भी तब, जब घर पर कोई न हो. बता दें,  पिछले दो महीनों से पंकज और नसीम सही मौके का इंतज़ार कर रहे थे.”….

यहां सोचने वाली बात ये है कि नसीम कैसा दोस्त था जिसने इस तरीके की सलाह दी….जिसने अपने दोस्त का घर ही नहीं बल्कि उसको भी बर्बाद कर दिया…नसीम चाहता तो पंकज को रोक सकता था…उसे समझा सकता था…की अगर उसके और उसके वाइफ में नहीं बन रही तो वो उसको तलाक दे दे..छोड़ दे…बहुत सारे विकल्प थे जो नसीम पंकज को समझा कर नेहा की जान बचा सकता था….आज नेहा जिंदा होती अगर नसीम ने अपने दोस्त को समझा दिया होता…ये हत्या रोकी जा सकती थी अगर नसीम ना होता तो…ये पहली बार नहीं था जब पंकज और नेहा के बीच लड़ाईया हुई थी..पंकज नेहा से नफरत करता था…उनके बीच झगड़े होते थे लेकिन नसीम से तो नेहा के कोई कालुक नहीं थे..फिर नसीम ने नेहा को किस बात की सजा दी….क्यों नसीम ने नेहा को मौत के घाट उतारने के लिए इतनी  घटिया प्लानिंग की..क्या एक सचे-अच्छे दोस्त के यही मायने होते है..आपने ये दिल दहला देने वाली खबर देखी…अब आप खुद सोचीए की नसीम जैसे दोस्तों को अपने जीवन में जगह देनी चाहिए या नहीं….

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