अगर इस पुलिस ना पकड़ा होता तो आधी मुंबई हमेशा के लिए सो गयी होती!

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महाराष्ट्र ATS ने जिस इस्लामिक जिहादी सोच का खुलासा किया है उसमें अगर दहशतगर्द कामयाब हो जाते तो शायद मुम्बई की एक बड़ी आबादी मौत की नींद सो सकती थी लेकिन महाराष्ट्र ATS ने इसका भंडाफोड़ कर दिया है.
महाराष्ट्र ATS ने इस साल के शुरुवात में शुरुआत में इस्लामिक स्टेट से संपर्क के शक में महाराष्ट्र से पकड़े गए 10 लोगों से हुई पूछताछ के बाद ऐंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने बड़ा खुलासा किया है. जानकारी के मुताबिक़ एटीएस द्वारा सोमवार को इस मामले में दायर की गई चार्जशीट में कहा गया कि संदिग्धों ने चार सौ साल पुराने मुंब्रेश्वर मंदिर के महाप्रसाद में जहर मिलाने की साजिश रची थी. इस साजिश को दिसंबर में मंदिर परिसर में हुई श्रीमद भागवत कथा के दौरान अंजाम देने की कोशिश की गई थी लेकिन ये सफल नही हो पाए. जिस दिन इन इस्लामिक जिहादियों ने अपनी खतरनाक साजिश को अंजाम देने की कोशिश की थी उसी दिन मन्दिर में करीब 40,000 भक्तों ने प्रसाद लिया था. सोचिये अगर इनकी साजिश कामयाब हो जाती तो क्या होता! लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद मुंबई ATS ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था.

अब पूछताछ में जिस बगदादी साजिश का खुलासा हो रहा हो वो नाकि चौकाने वाला बल्कि अंदर तक झकझोर देने वाला है. एटीएस ने यह दावा भी किया कि पकड़े गए संदिग्ध इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक की विचारधारा से प्रभावित थे. ATS की पूछताछ में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए दस लोगो में से अबू किताल नाम के आतंकी पर ही महाराष्ट्र के प्रसिद्ध मुंब्रेश्वर मंदिर के महाप्रसाद में मिलाए जाने वाले जहर को तैयार करने की जिम्मेदारी थी. अबु किताल का पुराना नाम जम्मान नवाब खुटेउपाड़ बताया जा रहा. अबू किताल पर ही जहर बनाने की जिम्मेदारी दी थी. अबु किताल पेशे से फार्मिस्ट है. फार्मिस्ट की जानकारी का इस्तेमाल इसने जहर बनाने के लिए किया और आईएस के आतंकियों के इशारे पर काम करता था, जहर को बनाकर एक बोतल में संभाल कर रखा गया था. ATS की पूछताछ में इन्होंने बताया कि उनका प्लान था कि वह काफिरों यानि कि जो मुस्लिम नही हैं ऐसे लोगों को विस्फोटों और जहर के जरिये हमेशा के लिए सुला देंगे.

जहर देकर लोगों को मारने के बाद इनकी योजना सीरिया देश के ISIS के कब्जे वाले इलाकों में जाकर वहां लड़ाई जारी रखने की थी. एटीएस ने अपनी चार्जशीट में यह भी कहा कि गिरफ्तार सभी संदिग्ध विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे और आरोपियों ने मंदिर परिसर की रेकी भी की थी. गिरफ्तारी से पहले इस दल में शामिल जम्मान, सलमान, वारिस और फहाद ने हाइड्रोजन पराक्साइड की मदद से विस्फोटकों का निर्माण किया था. इनका कहना था ,मुंबई को दहलाकर सीरिया चले जायेंगे जहाँ ये IS में भर्ती हो जायेंगे और इससे वहां इनका सम्मान बढेगा और अच्छी पोस्ट मिलेगी. सोचिये मुंबई जिस झील की पानी पीती है, जिस झील के भरोसा मुंबई का जीवन चलता है. उस झील में जहर मिलाने में अगर ये जिहादी कामयाब हो जाते तो क्या होता, अगर मन्दिर के प्रसाद में जहर मिलाकर लोगों को खिला दिया जाता तो क्या होता? लेकिन सलाम मुंबई ATS को जिन्होंने समय रहते ही इन जिहादियों को गिरफ्तार कर लिया.


भारत ऐसा देश है जहाँ ऐसे जिहादियों को भी कुछ लोग पनाह देते हैं, जब तक घटना को अंजाम ना देंदे तब तक इन्हें मासूम कहते हैं. जितनी ताकत से कुछ लोग…अपने लोगों को भड़काते हैं अगर उतनी ही ताकत ऐसे लोगों को जिहादी बनने से रोकें तो शायद ऐसी जिहादी सोच को रोका जा सके..