तीन तलाक बिल पास होने के बाद देखिये किस कदर भड़क गया ये मौलाना

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तीन तलाक का बिल पास होने के बाद सबसे ज्यादा तकलीफ किसे हुई है? सबसे ज्यादा दुखी कौन है? तिलमिलाया कौन है?

तीन तलाक का बिल राज्यसभा से पास हो गया है अब ये कानून बन चुका है इस राष्ट्रपति के पास भेजा गया है. राष्ट्रपति की सहमति के बाद यह कानून भारत में लागू हो जाएगा. देश की मुस्लिम महिलाओं में इस बिल के पास होने से ख़ुशी का माहौल है. ये ख़ुशी आप अच्छे से उन महिलाओं के चेहरे पर आसानी से देख सकते हैं जिसे उनके शौहर ने तीन तलाक देकर छोड़ दिया..सन्देश भेज कर तलाक दिया. फ़ोन कर तलाक दिया,, बेटी होने पर तलाक दिया.. खाने में नमक ज्यादा होने पर तलाक दिया.. और फिर हलाला करने पर मजबूर कर दिया. ये ख़ुशी उन महिलाओं के चेहरे पर साफ़ देखी जा सकती है जिन्होंने इसका दर्द झेला है या फिर तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. शाहबनो से लेकर शहरबानो तक ना जाने ऐसी कितनी महिलायें तो इसकी पीड़ित रही है लेकिन इस बावजूद इस बिल पर मौलानाओं को तो छोडिये हमारे नेता ही आपस बंटे हुए थे.

दरअसल वोटिंग से पहले विपक्ष को पूरी उम्मीद थी कि इस बिल को पास नही होने दिया जायेगा लेकिन अहम् मौके पर कुछ नेताओं ने धोखा दे दिया. मतलब वे सदन में मौजूद ही नही रहे. इससे विपक्ष कमजोर हो गया और तीन तलाक का बिल पास हो गया. वोटिंग के दौरान बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने के पक्ष में 84, जबकि विरोध में 100 वोट पड़े. जबकि बड़ी संख्या में सांसद नदारद रहे. यही वजह है कि सरकार को इस बिल को पास कराने में किसी तरह की परेशानी नही हुई. लेकिन एक तरफ जहाँ देश की महिलाओं में ख़ुशी हैं वहीँ दूसरी तरफ देश के कई नेताओं, मौलानाओं और धर्म के ठेकेदारों को तकलीफ हो रही है तो तिलमिलाए हुए हैं.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा कि तीन तलाक बिल पास होना ही था। केंद्र की भाजपा सरकार अपने तय एजेंडे पर काम कर रही है। ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड अपने स्टैंड पर कायम है। बिल को चुनौती देने के लिए बोर्ड सुप्रीम कोर्ट जाएगा, लेकिन बोर्ड की लीगल कमेटी की बैठक में तय होने के बाद। मतलब अब मुल्सिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट जायेगा, जहाँ से ही तीन तलाक के खिलाफ आदेश आ चुका है. इसके साथ ही ऑल इंडिया इमाम काउंसिल के महासचिव मौलाना सुफियान निजामी कहते हैं कि इस बिल को पास कराने में सबसे बड़ा योगदान उन पार्टियों का है जिन्होंने सदन से वाकआउट कर दिया था. एक और मौलाना साहब है, जो अक्सर टीवी पर दिख जाते है. मौलाना अंसार रजा..इन्होने तीन तलाक के कानून पर ट्वीटर पर लिखा कि “पार्लियामेंट में तीन तलाक़ का मुद्दा बार बार उठाना ये हल नही चाहते ये कुछ हिंदुओं को ख़ुश करने के लिए है कि देखो मुसलमानो को हमने डरा दिया, रविशंकर जी कुछ भी करलो मुसलमान शरियत की ही मानेगा”

इसके बाद मौलाना साहब लोगों के निशाने पर आ गये और लोगों ने जमकर फटकार लगाईं. खैर मौलाना की बात से ये समझने में कोई मुश्किल नही होनी चाहिए कि इन्हें और इनके विचार से सहमति रखने वाले मौलानाओं को संविधान से कोई मतलब नही है, इन्हें सिर्फ शरियत से मतलब है. मतलब इनका अपना कानून चलेगा, सरकार का कानून इन पर लागू नही होगा.. मौलाना जी खुद अपने आप को एक्सपोज कर रहे है.

सिर्फ मौलाना अंसार रजा ही नही बल्कि ना जाने ऐसे कितने मौलानाओं की तिलमिलाहट कल देखने को मिली. हां कुछ मौलाना तो ऐसे भी है जिन्होंने तीन तलाक के बिल के पास होने से पहले कुछ और कह रहे थे, बिल पास होते ही उनकी भाषा बदल गयी. सोशल मीडिया पर तील तलाक का बिल पास होने के बाद लोगों ने ऐसे मौलानाओं को जमकर फटकारा, मजाक बनाया गया, आक्रोश जाहिर किया गया.. ट्रोल किया गया लेकिन इस सबका कितना फर्क पड़ता है, देखने वाली बात होगी.

तीन तलाक का बिल पास कराने के लिए सरकार को कई साल इन्तजार करना पड़ा. आखिरकार तीन तलाक का खिलाफ एतिहासिक बिल लोकसभा से पास होकर राष्ट्रपति के पास पहुँच गया है.