ये सब सुनने के बाद भी क्या अल्पसंख्यक करेंगे ममता को वोट?

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एक बार, दो बार, बार-बार और हर बार, ममता बनर्जी एक कुशल नेता की तरह लगातार कुछ ना कुछ ऐसा बयान देती ही जा रही हैं जो उन्हें सुर्ख़ियों में बनाए हुए है. लेकिन इस बार उन्होंने मुस्लिम समुदाय को लेकर जो बयान दिया है वो उनकी नज़र में इस समुदाय की अहमियत बताता है.

पश्चिम बंगाल में जब चुनावी सरगर्मियां तेज़ हुई थीं तो उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को मिट्टी और पत्थर वाली मिठाई खिलाने की बात कही. फिर अभी कुछ वक़्त पहले की ही तो बात है जब उन्होंने सड़क किनारे किसी के जय श्री राम का नारा लगाने को गाली बता दिया था.

इसका चर्चा हो ही रहा था, सोशल मीडिया पर उनकी किरकिरी हो ही रही थी कि ममता दीदी ने अपनी एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी को ‘लोकतंत्र का थप्पड़’ मारने की बात भी कह दी.

ये और इस तरह के और भी बयानों की उठा-पटक के बीच चुनाव निबट गए. जनता ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को ज़बरदस्त 16 सीटों पर बढ़त दी. साल 2014 के चुनाव में महज़ 2 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी को 2019 के चुनाव में पश्चिम बंगाल से 18 सीटें सौंप दी गईं.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए ये एक बड़ा झटका था. तृणमूल के गढ़ में भारतीय जनता पार्टी को इतनी सीटो पर बहुमत मिलना गौर करने वाली बात है. इन सीटों पर जनता ने बताया कि वो तृणमूल कांग्रेस से खुश नहीं है.

ऐसे में ममता बनर्जी को ज़रुरत थी ये जानने की कि आखिर वो क्या वज़हें रहीं जिनके चलते पिछले चुनाव में उन्हें बहुमत देने वाली पश्चिम बंगाल की जनता उनसे आखिर इतनी नाराज़ है. उन्हें इस बात पर गौर करना चाहिए था.

लेकिन इस दौरान ही उन्होंने कुछ ऐसा बयान दे दिया जो जनता को और भी नागवार गुजरा. अपने इस बयान में ममता ने मुस्लिम समुदाय की तुलना दूध देने वाली गाय से कर दी और बता दिया कि उनकी नज़र में इस समुदाय की क्या जगह है.

असल में हुआ कुछ ऐसा कि, पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को मिली बढ़त के बाद जब एक चर्चित मीडिया संस्थान की तरफ से जब ममता बनर्जी से उनपर लगने वाले मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप पर सवाल किया, तो ममता बनर्जी ने फिर से एक आक्रामक बयान दे दिया.

उन्होंने अपने इस बयान में कहा कि,

“हाँ मैं मुस्लिम तुष्टिकरण करती हूँ, और 100 बार ऐसा करूंगी, क्योंकि जो गाय दूध देती है उसकी दुलत्ती खाने में कोई नुकसान नहीं होता.”

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ अक्सर ममता पर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि, ममता बनर्जी और उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करती है, और हिन्दुओं के हितों पर गौर नहीं करती.

भारतीय जनता पार्टी के इन आरोपों का जवाब ममता दीदी ने अपने इस हालिया बयान में दे दिया है. लेकिन आप ये सोचिये कि एक नेता का इस तरह के बयान देना ठीक है क्या? क्या किसी भी एक राजनीतिक पार्टी या राजनेता को किसी एक समुदाय को ध्यान में रखकर राजनीति करनी चाहिए?

क्या ये ठीक है कि किसी राज्य की मुख्यमंत्री एक धर्म या समुदाय की तुलना दूध देने वाली गाय से कर दे?

ये बात किसी से भी छुपी हुई नहीं है कि पश्चिम बंगाल की करीब 27% आबादी अल्पसंख्यक है, और यहाँ की बहुत सी सीटों पर राजनीति के निर्धारण में एक अहम भूमिका रखती है. ऐसे में ममता बनर्जी का ये बयान साफ़ कहता है कि वो मुस्लिम समुदाय का इस्तेमाल किस तरह करती हैं.

उनका ये बयान बताता है कि वो इस समुदाय के हित या विकास के लिए मुस्लिम तुष्टिकरण नहीं करतीं, बल्कि इसलिए करती हैं क्योंकि मुस्लिम समुदाय उनके लिए दुधारू गाय है, और चुनाव में उन्हें फायदा पहुंचाता है.

हमें नहीं लगता कि ममता दीदी के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की जनता के लिए समझने या समझाने को कुछ रह जाता है. लेकिन एक बात जो इन नेताओं को समझ लेनी चाहिए वो ये है कि लोकतंत्र किसी एक समुदाय का नहीं होता.

लोकतंत्र के नेता का चुनाव भी कोई एक समुदाय नहीं करता. इसलिए आशा है कि आने वाले समय में आपके प्रदेश की जनता आपके सभी बयानों को ध्यान में रखते हुए ही आपकी हार और जीत का फैसला करेगी.

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