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आम चुनावों के प्रचार प्रसार में सेना और सेना के जवानों का नाम और उनकी तस्वीर के इस्तेमाल का मामला गर्माता जा रहा है..क्यों की शुक्रवार सुबह ये खबर आई थी ,कि तीनों सेनाओं के 8 पूर्व प्रमुखों के साथ साथ 150 से अधिक पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को चिट्ठी लिख कर इस पर शिकायत की है,सेना का नाम किसी भी तरीके से चुनाव प्रचार में नहीं होना चाहिए. और साथ ही कहा गया कि भाजपा सर्जिकल स्ट्राइक जैसे सेना के ऑपरेशन का श्रेय खुद ही ले रही है, इस चिट्ठी को खासतौर पर भाजपा के खिलाफ शिकायत माना जा रहा था। पत्र में जिन सैन्य अफसरों के नामों का जिक्र किया गया है, उनमें से जनरल एसएफ रोड्रिग्स और पूर्व वायुसेना प्रमुख एनसी सूरी ने साफ कहा है कि ऐसे किसी पत्र को लिखने में उनकी सहमति नहीं ली गई। इसके विपरीत एक अन्य पूर्व सैन्य अफसर मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ ने स्वीकार किया कि उन्होंने पत्र पढ़ने के बाद ही उसमें अपना नाम शामिल करने की अनुमति दी थी। कक्कड़ ने कहा कि राजनीति में सेना का दुरुपयोग भाजपा ही नहीं दूसरे दल भी कर रहे हैं। इसे रोका जाना चाहिए। साथ ही पूर्व सेना प्रमुख शंकर रॉय चौधरी ने भी पत्र लिखे जाने की बात स्वीकार की है।
जनरल एसएफ रोड्रिग्स ने तो राष्ट्रपति को लिखे इस पत्र को फेक न्यूज का क्लासिक उदाहरण तक बता दिया। जबकि, जनरल रोड्रिग्स का नाम राष्ट्रपति को लिखे इस पत्र में पहले हस्ताक्षरकर्ता के रूप में दर्ज है। जनरल रोड्रिग्स ने कहा, “अपनी पूरी जिंदगी, हम राजनीति से दूर रहे। एक अधिकारी के रूप में 42 वर्ष बाद बिताने के बाद इस स्थिति में बदलाव के लिए अब देर चुकी है।” राष्ट्रपति को यह पत्र किसने भेजा, इस संबंध में कोई भी जानकारी होने से जनरल रोड्रिग्स ने इनकार किया। आप को बता दें कि जनरल रोड्रिग्स 1990 से 1993 के बीच आर्मी चीफ थे।
पूर्व वायुसेना प्रमुख एनसी सूरी ने कहा कि यह पत्र व्हाट्सएप और ई-मेल के जरिए लोगों तक पहुंचा। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद को खत्म करने के लिए उन्होंने लिखा है कि सेना हमेशा राजनीति से दूर रहती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पत्र में जो भी लिखा गया है, उसमें उनकी सहमति नहीं है और पत्र भेजने में भी उनकी सहमति नहीं ली गई। पूर्व सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एमएल नायडू ने भी कहा कि ऐसे किसी पत्र के लिए उनकी सहमति नहीं ली गई।
दो सेना प्रमुखों के इस पत्र में सहमति होने से इन्कार करने के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अपने फायदे के लिए फर्जी पत्र को प्रसारित करना चिंताजनक बात है और इसकी निंदा की जानी चाहिए। राष्ट्रपति कोविंद के कार्यालय के एक अधिकारी ने भी ऐसे किसी पत्र के मिलने से इनकार किया है।
चुनाव आयोग ने इससे पहले राजनीतिक दलों से कहा था कि वे विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान या सेना से जुड़ी अन्य तस्वीरों का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल न करें। लेकिन राजनीतिक दलों के क्रिया-कलापों को देखते हुए नहीं लगता कि चुनाव आयोग के निर्देश का उनपर कोई प्रभाव पड़ा है।