बुढ़ापे में आखिर अपनी भद्द क्यों पिटवाना चाहते हैं महातिर मुहम्मद!

मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मुहम्मद अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहते हैं. कभी कश्मीर पर पाकिस्तान का समर्थन करते हैं तो कभी भारत के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी करते हैं. भारत की तरफ से उन्हें करारा जवाब भी दिया जाता है लेकिन इसके बावजूद भी महातिर मुहम्मद अपनी हरकतों से बाज नही आ रहे हैं. अब एक बार फिर उन्होंने भारत केआंतरिक मामलों में दखलंदाजी की है.

मलेशिया के प्रधानमंत्री ने कहा कि “मुझे ये देखकर दुख हो रहा है कि भारत जो धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करता है, आज मुसलमानों से उनकी नागरिकता छीन रहा है. अगर हम ये कानून अपने यहां लागू करें तो मुझे नहीं पता कि क्या होगा. हर जगह अस्थिरता और अराजकता होगी जिससे सभी को जूझना होगा.” उनका ये बयान कुआलालंपुर समिट 2019 के दौरान सामने आया है.

महातिर का जवाब विदेश मंत्रालय की तरफ से दिया गया है. जिसमें कहा गया कि नागरिकता कानून तीन देशों से आए गैर नागरिकों की पहचान के लिए है. यह कानून भारत के किसी भी नागरिक की नागरिकता को प्रभावित नहीं करता. ना ही किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक के खिलाफ है. मलेशिया के प्रधानमंत्री का बयान तथ्यहीन है. हम उम्मीद करते हैं कि बिना तथ्य के मलेशिया भारत के किसी भी आतंरिक मामले पर भविष्य में बोलने से बचेगा.”

दरअसल ये कोई पहला मौका नही है, जब मलेशिया के प्रधानमंत्री ने इस तरह की हिमाकत की हो, इससे पहले ही पाकिस्तान के समर्थन में जाकर यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठा चुके हैं, हालाँकि उस दौरान उन्हें किसी और देश ने भाव नही दिया था. इसके बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी लेकिन भारत के कारोबारियों ने मेलशिया को सबक दिखाने के लिए अपना कारोबार मलेशिया के साथ बंद करने का फैसला लिया था.

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