मलाला ने कश्मीर को लेकर फिर फैलाई फेक न्यूज़

494

नोबेल शांति पुरुस्कार पाने के लिए चर्चित मलाला यूसुफ़ज़ई का कश्मीर को लेकर प्रेम एक बार फिर जाग उठा है. मलाला मोहतरमा ने ट्विटर पर कश्मीर को लेकर लगातार 7 ट्वीट्स पोस्ट करके रोना रोया है और कश्मीर के बारे में फेक न्यूज़ फैलाई है. लेकिन उनकी झूठ की पोल खुल गई और उनका दोहरा चरित्र सबके सामने आ गया. आइये हम आपको बताते है कि मलाला ने अपने ट्वीट्स में क्या लिखा है.

मलाला अपने एक ट्वीट में तीन लड़कियों का जिक्र करते हुए लिखती है कि उन लडकियों ने मुझे बताया कि कश्मीर में स्थिति बताने का सबसे अच्छा तरीका ये है कि हम खामोश रहे. हमारे पास यह पता लगाने का कोई तरीका नहीं है कि हमारे साथ क्या हो रहा है. हम सब सुन सकते हैं कि हमारी खिड़कियों के बाहर से सिर्फ सैनिकों के कदमों की आवाज़ आती हैं और ये हमे काफी डरावना लगता है.
मलाला मोहतरमा लेकिन आपके पीएम इमरान खान और मंत्री तो ये कहते है कि कश्मीर में कम्युनिकेशन सेवाएं बंद है. फोन बंद है, इंटरनेट बंद है, लोगों को वहां आने जाने नहीं दिया जा रहा तो आप किससे बात करके आ रही है. क्या आप बलूचिस्तान के बच्चों से मिल कर आ रही है या pok के बच्चों से मिल कर आ रहीं हैं, जहां आपकी सेना अत्याचार कर रही है.

मलाला के दुसरे ट्वीट में कहा, उन लड़कियों ने मलाला से ये भी कहा कि मैं उद्देश्यहीन और निराश महसूस करती हूं क्योंकि मैं स्कूल नहीं जा सकती. मैं 12 अगस्त को अपनी परीक्षा देने से चूक गई और मुझे लगता है कि मेरा भविष्य अब असुरक्षित है. मैं एक लेखक और एक स्वतंत्र, सफल कश्मीरी महिला बनना चाहती हूं. पर यहाँ के हालात देख कर मुझे लगता नही की में सफल हो पाऊँगी. मलाला के अनुसार, तीन लड़कियों में से एक लड़की 12 अगस्त को अपनी परीक्षा देने से चूक गई थी . लेकिन मलाला मैडम अगर आपको न पता हो तो आपको बता दे कि 12 अगस्त को बकरीद या ईद उल-अधा के अवसर पर भारत भर में अधिकारिक छुट्टी थी. कश्मीर में भी बकरीद के कारण स्कूल की छुट्टी थी फिर किसी की परिक्षा कैसे छूट सकती है. बस करो बहन, कितना झूठ बोलोगी. अपनी नहीं तो उस नोबल पुरस्कार की ही इज्जत कर लो जो तुम्हे दिया गया है.

मलाला ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि उन्होंने पिछले कुछ दिनों में ऐसे लोगों से बात की हैं, जो कश्मीर में रह रहे हैं या फिर वहाँ काम करते हैं. इनमें छात्र, पत्रकार और मानवाधिकार वकील शामिल हैं. मलाला ने लिखा कि वह कश्मीर की लड़कियों से सीधे बातचीत करना चाहती थीं. उन्होंने ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ का हवाला देकर लिखा कि लोगों से बात करने में उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा. मलाला ने ये भी आरोप लगाया कि कश्मीर को दुनिया से अलग-थलग कर दिया गया है और उनकी आवाज़ बाहर नहीं जाने दी जा रही है.मलाला मैडम आपके मंत्री ने तो UN और मानवाधिकार परिषद् में बताया था कि वहां की फ़ोन सेवाएं तो बंद है. तो आपने केसे वहां के लोगों से बात की. क्या वहां के लोगों ने कबूतर में चिट्ठी लपेटकर आपको ये बताया या किसी ने आपको पत्थर में चिट्ठी लपेट कर भेजी थी. कुछ तो बताइए की आपको केसे पता चला. दुनिया को कोई तो प्रूफ दीजिये की दुनिया आपकी बातों का भरोसा कर सके.

वो यही तक ही नही रुकी बल्कि उन्होंने तो संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली से भी इस मामले को ध्यान में लेने की अपील की है. कश्मीर से हजारों मील बैठी मलाला को ये भी पता होना चाहिए कि भारतीय सेना लगातार सीमा से सटे गाँवों में लोगों और खासकर की बच्चों को पाकिस्तान की तरफ से होने वाले फायरिंग से बचाने में लगी है. इस्लामिक राष्ट्रों तक ने पाकिस्तान को समर्थन देने से साफ़ मना कर दिया है. रूस और अमेरिका के साथ सभी प्रमुख देशों ने इसे भारत का आंतरिक मुद्दा बताया है, और पाकिस्तान को इस मामले में हस्तक्षेप करने से साफ़ मना कर दिया है. लेकिन, दुख तो इस बात का है कि मलाला को बलूचिस्तान में हुए निर्दोषों पर अत्याचार और सिंध में लड़कियों का जबरदस्ती इस्लामिक धर्मान्तरण नहीं दिखता. उस पर तो उन्होंने चिंता नही व्यक्त की. क्या उनके बयान बस पाक सेना को खुश करने के लिए होते है.