मकर संक्रांति पर क्यों खाई जाती है खिचड़ी ,जिंदगी में मिठास भर देंगे ये मकर संक्रांति

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मकर संक्रांति इस साल 2019 में 14 जनवरी नहीं बल्कि 15 जनवरी को मनाई जा रही है. देशभर में इसी दिन से खरमास समाप्त हो जाएंगे और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी . मकर संक्रांति का त्योहार पहले 14 जनवरी को मनाया जाता था .मकर संक्रांति को दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से जाना जाता है. गुजरात और राजस्थान में इसे उत्तरायण कहा जाता है. हरियाण और पंजाब में मकर संक्रांति को माघी के नाम से पुकारा जाता है.

बिहार-यूपी में मकर संक्रांति को ‘खिचड़ी’ भी कहा जाता है. यहां के लोग इस त्योहार को काफी धूमधाम से मनाते हैं. यही वजह है कि भोजपुरी कलाकारों ने शानदार सॉन्ग अपने दर्शकों के लिए परोसा है .इसी दिन से अलग-अलग राज्यों में गंगा नदी के किनारे माघ मेला या गंगा स्नान का आयोजन किया जाता है. कुंभ के पहले स्नान की शुरुआत भी इसी दिन से होती है. मकर संक्रांति त्योहार विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है. लोग इस दिन नहाने के बाद लोग ही खाना खाते हैं .

14 जनवरी ऐसा दिन है, जब धरती पर अच्छे दिन की शुरुआत होती है. ऐसा इसलिए कि सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर को गमन करने लग जाता है. जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर गमन करता है तब तक उसकी किरणों का असर खराब माना गया है, लेकिन जब वह पूर्व से उत्तर की ओर गमन करते लगता है तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती हैं.नेपाल के सभी प्रान्तों में अलग-अलग नाम व भाँति-भाँति के रीति-रिवाजों द्वारा भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जाता है। मकर संक्रान्ति के दिन किसान अपनी अच्छी फसल के लिये भगवान को धन्यवाद देकर अपनी अनुकम्पा को सदैव लोगों पर बनाये रखने का आशीर्वाद माँगते हैं।इसलिए मकर संक्रान्ति के त्यौहार को फसलों एवं किसानों के त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है। लोगों में इसका उत्साह बहुत जोड़ो से रहता है .

लोगों को काफी पसंद रहता है ये त्यौहार . यहाँ तक की पतंग उड़ाने के लिए बच्चो से लेकर बड़ो तक में उत्साह रहता है .महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपनी पहली संक्रान्ति पर कपास, तेल व नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं।तिल-गूल नामक हलवे के बाँटने की प्रथा भी है। लोग एक दूसरे को तिल गुड़ देते हैं और देते समय बोलते हैं -“लिळ गूळ घ्या आणि गोड़ गोड़ बोला” अर्थात तिल गुड़ लो और मीठा-मीठा बोलो .इस दिन महिलाएँ आपस में तिल, गुड़, रोली और हल्दी बाँटती हैं। यहाँ तक की बिहार में मकर संक्रान्ति को खिचड़ी नाम से जाता हैं।

इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का अपना महत्त्व है। फिर तिलकट भरवे वाला पूजा भी होता है . जिसमे माँ बच्चो से पूछती है की तिलकट भरवे . उन्हें हाँ बोलना होता है . राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएँ अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही महिलाएँ किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन एवं संकल्प कर चौदह ब्राह्मणों को दान देती हैं। इस प्रकार मकर संक्रान्ति के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की झलक विविध रूपों में दिखती है।