करारी हार के बाद कांग्रेस में महाभारत, इस बड़ी नेता ने कहा, ‘क्या अपनी दुकान बंद कर लेनी चाहिए?’

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दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा भले जी हर गई हो लेकिन उसके लिए अच्छी बात ये रही कि जहाँ उसकी सीटें भी बढ़ी वहीँ वोट प्रतिशत में भी इजाफा हुआ. लेकिन कांग्रेस का न सिर्फ इस बार भी सूपड़ा साफ़ हुआ बल्कि उसके वोट प्रतिशत में भी गिरावट आ गई. सबसे बुरा तो ये रहा कि 70 में से उसके 67 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. इस बुरे प्रदर्शन के बाद कांग्रेस के कुछ नेता ऐसे रहे जो आम आदमी पार्टी की जीत पर खुशियाँ मना रहे थे, सिर्फ इसलिए कि भाजपा हार गई थी. ये खुशियाँ कोई ऐसे वैसे नेता नहीं मना रहे थे बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेता ऐसी बचकानी हरकत कर रहे थे.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने आम आदमी पार्टी को प्रचंड जीत के लिए बधाई देते हुए कहा कि वो दिल्ली की जनता को सैल्यूट करते हैं कि उन्होंने आम आदमी पार्टी को जिता कर एक उदाहरण सेट किया है. इस पर कांग्रेस की नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी भड़क गईं और तंज कसते हुए पूछा ‘क्या कांग्रेस को अपनी दुकान बंद कर लेनी चाहिए?’ शर्मिष्ठा ने चिदंबरम के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए पूछा, ‘सर, उचित सम्मान के साथ बस इतना जानना चाहती हूं कि क्या कांग्रेस पार्टी राज्यों में बीजेपी को हराने के लिए क्षेत्रीय दलों को आउटसोर्स कर रही है? यदि नहीं, तो फिर हम अपनी हार पर मंथन करने के बजाय AAP की जीत पर गर्व क्यों कर रहे हैं? और अगर ऐसा है, तो हमें (प्रदेश कांग्रेस कमिटी) संभवत: अपनी दुकान बंद कर देनी चाहिए.’

शर्मिष्ठा ने आगे लिखा, ‘अगर दिल्ली विभाजनकारी राजनीति कर रही है, केजरीवाल स्मॉर्ट पॉलिटिक्स कर रहे हैं तो हम क्या कर रहे हैं? क्या हम ईमानदारी से कह सकते हैं कि हमने घर को संभालने के लिए पूरा प्रयास किया था? हम कांग्रेस को ही कैप्चर करने में जुटे थे जबकि बाकी दल भारत को कैप्चर कर रहे थे.’

शर्मिष्ठा का सवाल जायज था. दिल्ली में आम आदमी पार्टी के उदय के बाद कांग्रेस का परंपरागत वोटबैंक उसकी तरफ चला गया. लेकिन आप से नाराज लोग कांग्रेस की तरफ वापस आने की बजाये भाजपा की तरफ खिसक गए. जिसका नतीजा ये हुआ कि भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ गया. दिल्ली ही नहीं, देश के कई एनी राज्यों में कांग्रेस क्षेत्रीय दलों की पिछलग्गू बन कर रह गई. ऐसे में दिल्ली चुनाव में पराजय के बाद कांग्रेस में हाहाकार मचना स्वाभाविक भी है.