महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए थे ये पांच रास्ते लेकिन लग गया राष्ट्रपति शासन

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महाराष्ट्र में राजनीतिक उठा पठक चल रही है. खेल जारी है.. कौन सरकार बनाएगा? कैसे सरकार बनेगी? मुख्यमंत्री कौन बनेगा? किसका बनेगा? ऐसे कई सवाल है जो इस समय दिमाग में घूम रहे हैं. सोमवार को राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी ने शिवसेना को और समय देने से मना कर दिया. अब राज्यपाल ने तीसरी सबसे बड़ी पार्टी एनसीपी से पूछा है कि क्या वो सरकार बना सकते हैं? एनसीपी को अगले 24 घंटे के अंदर समर्थन पत्र के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करना होगा. यानी अगर एनसीपी सरकार नहीं बना सकती तो फिर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन भी लग सकता है. आईए एक नज़र डालते हैं कि आखिर अब महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर क्या विकल्प बचे हैं.

पहला-शिवसेना ने राज्यपाल से समर्थन की चिट्ठी कोई सौंपने के लिए और समय माँगा तो राज्यपाल ने एनसीपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया.. आज रात 8.30 तक सरकार बनाने का दावा पेश करना है लेकिन शिवसेना के बिना सरकार बन नही सकती.. ऐसे में शिवसेना भी चाहती है कि उसका मुख्यमंत्री बने लेकिन एनसीपी अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है.. ऐसे इन क्या शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की सरकार बनती मुश्किल दिख रही है.

  दूसरा – शिवसेना और एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता राज्यपाल द्वारा दिया जा चुका है… हो सकता है कि राज्यपाल कांग्रेस को भी सरकार बनाने का न्योता दें दें… लेकिन कांग्रेस के लिए समर्थन जुटाना आसान नही है

तीसरा- अगर एनसीपी और कांग्रेस दोनों सरकार बनाने से इंकार कर दें तो राष्ट्रपति शासन लग सकता है.. लेकिन अगर कुछ समय बाद कांग्रेस का मन बदल जाए और शिवसेना को समर्थन देने के लिए कांग्रेस तैयार हो जाये तो शिवसेना की सरकार बन सकती है.

चौथा- बीजेपी ने सरकार बनाने से इंकार दिया है लेकिन इसका मतलब ये नही है कि बीजेपी सरकार बनाने के सारे सपने तोड़ दी है. अंत में बीजेपी एक बार फिर सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है.

पांचवा रास्ता ये है कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद अगर कोई पार्टी सरकार बनाने के पक्ष में नही दिखती या फिर बहुमत इकट्ठी नही कर पाती तो फिर से चुनाव करवाया जा सकता है.

वही अब खबर मिल रही है कि राज्यपाल की तरफ से राष्ट्रपति शासन के लिए अपील की गयी है. हालाँकि शिवसेना का कहना है कि अगर तय समय से पहले राष्ट्रपति शासन लगता है तो वो सुप्रीम कोर्ट जायेगी.