यहाँ लड़की वर्जिन नहीं होती तो उसे जला दिया जाता है

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यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता..


अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है वहां देवताओं का वास होता है..
यह है हमारे देश की वो संस्कृति जिसकी परम्पराओं में औरतों को लक्ष्मी और कन्याओं को देवी का स्वरुप माना जाता है.. पर कभी कभी सोचती हूँ कि कौन था वो इन्सान जिसने भारत की खूबसूरत संस्कृति पर उन कुरीतियों का धब्बा लगाया जिनकी वजह से देश आज भी पनप नहीं पा रहा है.. और इन सारी कुरीतियों का आधार है सिर्फ स्त्री.. यहं पेड़ पौधे, जानवर, आदमी सबको जीने का हक है सिवाय औरतों के… उसकी सारी काबिलियत.. उसकी सारी अच्छाई एक तरफ.. और उसकी वर्जिनिटी यानि कौमार्य एक तरफ… कुंवारी लड़की को पवित्र देवी माना जाता है.. जबकि एक लड़की जिसने अपनी कौमार्य खो दिया है, वह नरक में सड़ने के लिए है। दुर्भाग्यवश, यह हमारे समाज की सोच है और ये सोच महाराष्ट्र के एक समुदाय में इस कदर प्रचलित है कि वहां पर आज भी लडकी से उसके पवित्र होने का सबूत माँगा जाता है…

महाराष्ट्र में एक पिंपरी चिंचवाड नाम का एक जिला है जहाँ पर कंजरभट नाम का समुदाय बहुआयात में रहता है… इस समुदाय में लड़कियों की 14-15 उम्र में ही शादी कर दी जाती है.. और वो भी उनके हमउम्र लड़के से नहीं बल्कि 30-40 साल के आदमी से… तो बाल विवाह.. बेमेल विवाह तो यह करते ही हैं.. उसके आलावा लड़की का कौमार्य परीक्षण भी होता है..

शादी की पहली रात जिसे आम भाषा में आप सुहागरात कहते हैं.. और यह कम उम्र की बच्चियां जिसे जबरदस्ती की रात कहती होंगी अपने मन में.. उनके बिस्तर पर सफ़ेद चादर बिछाई जाती है और वो सफ़ेद चादर गवाही देती है उसके पवित्र या अपवित्र होने की.. अगर चादर पर खून के धब्बे हैं तो वो पवित्र है… देवी है और अगर नहीं तो वो चुड़ैल है.. राक्षसी है… कुल्टा है.. घर के लिए भाग्यशाली नहीं है और अपवित्र है
“माल खोता आहे” “यानि माल में खोट है”
इतना बोलकर लड़की को पंचायत के बीच छोड़ दिया जाता है और फिर यहाँ क्रूरता की वो कहानी दोहराई जाती है.. जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे आपकी आँखें डबडबा जाएँगी… पर इस समुदाय के मर्दों की नहीं… अपने अहंकार की आग को तृप्त करने के लिए वो उस लड़की को पेड़ से बांध देते हैं.. और फिर शुरू होता है उस पर यातनाओं का सिलसिला… उसके हाथ पैरों को जलाया जाता है.. और उसे तब तक मारा जाता है जब तक वो अधमरी ना हो जाये.. वो बेहोश ना हो जाये… उसकी जान को तो बक्श दिया जाता है पर उसके शरीर पर इतने जुल्म किये जाते हैं जिसके निशाँ हमेशा के लिए रह जाते हैं..
इस प्रथा की वजह से ही यहं माँ बाप अपनी बच्चियों को बालिग़ होने से पहले ही 14-15 की उम्र में शादी कर देते हैं

इस प्रथा का असर इतना ज्यादा है कि जब कोई पुलिस कंप्लेंट भी दर्ज कराई जाती है तो यहाँ के पुलिस वाले भी इन घटनाओं को सामुदायिक या साम्प्रदायिक बोलकर इनपर कोई एक्शन लेने से मना कर देते हैं.. हालाँकि कई बार इस समाज के कुछ पढ़े लिखे लोगों ने इन कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज बुलंद की.. पर इस समाज में रूढ़िवादिता इस कदर बसी है कि उसे कोई और बात समझ नहीं आती.. ना इंसानियत.. ना जागरूकता. खैर जिस समाज की सोच सिर्फ औरतों की टांगों के बीच ही फंसी रह गई है… जिनकी शान उनके घर की औरतों के कौमार्य से जुडी है.. उनमें दिमाग कितना होगा इसका अंदाजा आप लगा ही सकते हैं कि वो शरीर की संरचना और उससे जुडी बातों को समझ पाएं.. कि हायमन स्पोर्ट्स खेलने वाली लड़कियों जो खेल कूद में भी एक्टिव रहती हैं उससे भी ब्रेक होता है… पर ये सब समझने के लिए पढ़ा लिखा और समझदार होना जरूरी है… लेकिन इन सबसे पहले ज़रूरी है एक इंसान होना… सवाल यह है कि शरीर उस लडकी का.. आत्मा उसकी… ज़िन्दगी उसकी.. और सांसें उसकी.. फिर आपने कैसे उस पर अपना हक समझ लिया… उसके शरीर के साथ भी अपना सम्मान जोड़ दिया… पर यहाँ मुद्दा अब इनके विकास का नहीं है.. यहं बात है उन औरतों की जो सालों से यह ज्यादतियां सह रही हैं… उनका समाज बेशक इतना संकीर्ण है लेकिन कानून और संविधान से ऊपर नहीं…

हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आये तो महाराष्ट्र सरकार ने इस पर कडा रुख अपनाकर मामले को दंडनीय अपराध में शामिल कर लिया है… ‘कौमार्य परीक्षण को यौन हमले का एक प्रकार समझा जाएगा, विधि एवं न्याय विभाग के साथ परामर्श के बाद एक परिपत्र जारी किया जाएगा, जिसमें इसे दंडनीय अपराध घोषित किया जाएगा।’

कौमार्य परीक्षण नाम की इस प्रथा के खिलाफ अलग अलग राज्यों के युवा भी अपनी आवाज पुरजोर कर रहे हैं और उन्होंने ऑनलाइन अभियान शुरू किया है

यकीन नहीं होता कि देश के कई हिस्सों में इस तरह की दकियानूसी सोच से भरी घटनाएं हो रही हैं.. एक तरफ तो हम बात करते हैं विश्व शक्ति बनने की.. पर देश के अन्दर फैली हुई इन सामजिक बुराइयों से जिसने हमारी सोच को ही बीमार कर दिया है निपटेंगे नहीं तो विकास होगा कैसे..??