दिल्ली के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से कांग्रेस के कुछ बड़े नेता भौखला गये हैं जिसके बाद से नेताओं ने अपनी ही सरकार को नसीहत दी हैं कि पार्टी वापस में आना चाहती हैं तो अपनी रणनीति बदले. बता दे 2013 के बाद से दिल्ली की सत्ता से कांग्रेस हाथ धो बैठी हैं जिसकी वजह से कांग्रेस का सारा वोट बैंक अब दिल्ली की आम आदमी पार्टी के पास चला गया हैं.

वही इसी बीच से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच घमासान शुरू हो गया हैं. दरअसल ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ही पार्टी के खि’लाफ मोर्चा छेड़ दिया हैं. जिसकी वजह से कमलनाथ ने  ज्योतिरादित्य सिंधिया पर नि’शाना सा’धा हैं. बता दें ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिक्षकों के साथ मिलकर उनके  समर्थन में अपनी ही सरकार के खि’लाफ प्र’दर्शन करने का ऐलान किया था. जिस पर कमलनाथ ने नि’शाना साधते हुए कहा कि घोषणापत्र 5 साल के लिए होता हैं न की 5 महीनों के लिए.

बता दें सिंधिया ने टीकमगढ़ के गांव में गेस्ट टीचर्स को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में सरकार पार्टी के घो’षणापत्र को पूरा लागू नही करेगी तो मैं अपनी सरकार के खि’लाफ सड़कों पर आपके साथ उतरने में संकोच नहीं करूंगा और आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी जो मांगे हमारी सरकार के घोषणापत्र में अंकित है वो घोषणापत्र हमारे लिए हमारा ग्रंथ है

इसी के साथ मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री गोविन्द सिंह ने सिंधिया पर नि’शाना साधते हुए कहा कि सिंधिया राज्य के नेता हैं उनको सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं हैं. उनको  प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से इन सभी मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए वही सिंधिया के सरकार के खि’लाफ खोले मोर्चे पर शुक्रवार को कमलनाथ ने कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और इस पर अपनी नाराजगी भी जतायी.