मध्य प्रदेश में पहले किसानों का कर्जमाफ और फिर मिली लाठियां! परेशान हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ?

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चुनाव जीतकर आम लोगों , किसानों और महिलाओं को अच्छे दिन का सपना दिखाकर सत्ता में आने वाली मध्य प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार इस समय खूब सुर्खियों में हैं. वजह है किसानों का कर्जमाफी! अब इस कर्जमाफी से किसानों का , मध्य प्रदेश की जनता का , मध्य प्रदेश सरकार और कमलनाथ में से किसका अधिक फायदा हुआ है, इस पर भी चर्चा तो की ही जा सकती है, लेकिन आज हम नई सरकार में किसानों की मौजूदा स्थिति पर प्रकाश डालना चाहते हैं.

Source- The Indian Express

मुख्यमंत्री कमलनाथ के किसान प्रेम पर उठा सवाल

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही घंटों में किसानों के कर्ज माफी की फाइल पर हस्ताक्षर कर कमलनाथ की सरकार ने तो खूब वाहवाही लूटी, खुद को किसान प्रेमी दिखाने में कोई कसर नही छोड़ी और मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद को किसानों का सबसे बड़ा हितैशी साबित करने में लगे थे. इस सबके बावजूद इस समय मध्य प्रदेश में जो कुछ भी हो रहा है, उससे कमलनाथ के किसान प्रेम पर सवाल खड़े होने शुरू हो गये हैं.


किसान यूरिया खाद लेनें के लिए घंटों घंटों लाइन में खड़े है , इस कड़कड़ाती ठंड में खाद के लिए किसान खुद को गला रहे हैं वहीं किसान प्रेमी कमलनाथ सरकार उन्हें खाद तो दे नही पा रही है, उल्टा किसानों पर पुलिस लाठियां बरसा रही है. गुना जिले में खाद के लिए लाइन में खड़े लोगो का आक्रोश इतना बढ़ गया कि हंगामा मच गया. किसान सुविधा केंद्र के सामने किसानों ने ट्रेक्टर को खड़ा कर नेशनल हाई-वे को जाम कर दिया. इसके बाद पुलिस ने माहौल ठंडा करने के नाम किसानों पर जमकर लाठी भाजी। किसान गये तो थे खाद लेने लेकिन मिलीं पुलिस की लाठियां!


किसानों ने मांगी खाद, मिली लाठी

किसानों को खाद ना मिलने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि “केद्र सरकार से बातचीत सफल हुई है जल्द ही किसानों को यूरिया खाद आसानी से मिल जायेगी”. यहाँ सवाल खड़ा होता है कि जब किसानों के लिए खाद की व्यवस्था की जानी थी, उस समय कमलनाथ सरकार कर्जमाफी और सरकार बनने की ख़ुशी मनाने में व्यस्त थी? इसके बाद जब किसान खाद मांगने लगे तो उन्हें खाद के बदले लाठियां मिली. लाठीचार्ज की खबर सुनकर कमलनाथ ने बयान जारी कर अधिकारीयों से लाठीचार्ज नही करने के लिए कहा है.

Source- Patrika

यहां आपका यह भी जानना जरूरी है कि गुना से कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद है. ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में से एक थे. जब इतने बड़े नेता के क्ष्रेत्र में किसानों को यूरिया खाद नही मिल पा रही है और पुलिस उनकी पिटाई कर रही है तो मध्य प्रदेश के बाकी इलाकों के बारे में आप अंदाजा लगाकर ही स्थिति को समझ सकते हैं.
यहाँ पर आपका यह भी जानना आवश्यक है कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार आने के बाद प्रदेश में किसान अब आत्महत्या कर रहे हैं. अब तक दो किसान आत्महत्या कर चुके हैं. कमलनाथ ने कर्जमाफी तो की लेकिन यही पर वे किसनों के साथ खेल गये! दरअसल कर्ज माफ़ी के लिए सरकार ने जो पैमाना बनाया था उस दायरे में लगभग 9% किसान ही आते है. जिससे परेशान किसान अब आत्महत्या की तरफ बढ़ रहे हैं.

5 लाख के कर्जदार किसान 65 साल के प्रेम नारायण रघुवंशी ने फसल खराब हो जाने के बाद जहर पी लिया. वे सरकार द्वारा किये गये कर्जमाफी के दायरे में नही आते थे. भोपाल के रहने वाले 3 लाख के कर्ज में डूबे 45 साल के जुवान सिंह ने अपना कर्ज 31 मार्च 2018 के बाद लिया था. इसी वजह से उनका कर्ज भी माफ़ नही हो सका और तनाव में उन्होंने आत्महत्या कर ली.


अब आप सोचिये एक तरफ जहाँ कमलनाथ मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही घंटों में 9% किसानों का कर्ज माफ़ करने का एलान करते हैं तो बाकि के किसानों को इस मुसीबत से बाहर कौन निकालेगा?
किसानों को कर्जमाफी से ज्यादा इस समय यूरिया खाद की जरुरत थी, जिससे उनकी आने वाली फसल अच्छी हो सके. कमलनाथ को यह समझना चाहिए कि किसानों की समस्या का हल कर्जमाफी से नही, बल्कि किसानों की मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति करने से होगी!