सियासत की दुनिया की वो प्रेम कहानी जो एक उपमुख्यमंत्री की धर्म , राजनीति और ज़िंदगी सब तबाह कर गयी

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“कभी ख़ुद पे, कभी हालात पे रोना आया,ऐ मोहब्बत,तेरी हर इक बात पे रोना आया.
कौन रोता है किसी और की ख़ातिर,सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया”
किसी शायर की लिखी ये पंक्तियां जाने कितनी ही बर्बाद मोहब्बतों का बयां है.
 
धर्मेंद्र, किशोर कुमार, बोनी कपूर जैसी नामचीन हस्तियों में एक कॉमन फैक्टर है. इन्होंने एक से अधिक शादियां की. इनके बारे कहा जाता है धर्म परिवर्तन करके इन्होंने दूसरी शादियां की क्योंकि हमारे देश का कानून किसी हिन्दू को एक पत्नी के होते हुए दूसरी शादी की इजाजत नही देता. लेकिन ये बातें बॉलीवुड की है तो सामान्य सी लगती है, लेकिन राजनीति में कोई ऐसा करे तो…?? 
जी हाँ राजनीति में ऐसा करना अपनी राजनीतिक आत्महत्या करने जैसा है. ऐसा नही है कि राजनीति से जुड़ी हुई किसी हस्ती नें कभी अफेयर न किया कभी दूसरी शादी नही की. अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर मुलायम सिंह जैसे कितने ही नेता है जिनकी प्रेम कहानियां यहाँ वहाँ अक्सर सुनने में आ जाती है लेकिन उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को बेहद निजी रखा. पूरी शुचिता और पूरे शिद्दत के साथ रिश्तें को निभाया. इन्ही राजनीति के गलियारों में एक ऐसी भी प्रेम कहानी है जो आंखों से शुरू होकर जान की कीमत पे खत्म हुई. एक ऐसी कहानी है जो बेइंतहा मोहब्बत से शुरू होकर तबाही पे खत्म हुई.

ये कहानी है हरियाणा से. सन 2008 का दिसम्बर महीना. हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार थी और उनके डिप्टी सीएम हुआ करते थे पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के पुत्र तत्कालीन कालका से विधायक चन्द्र मोहन. चन्द्र मोहन जी पिछले 45 दिनों से कहीं गायब थे किसी को नही पता था कहाँ गए वो. न परिवार में न पार्टी में न सरकार में किसी को कुछ नही पता था. 45 दिन बाद 7 दिसम्बर को अचानक से वो एक महिला के साथ मीडिया में आते है और बताते है. वो मेरठ में थे और उन्होंने दूसरी शादी कर ली अब से उनका नाम चन्द्र मोहन नही चांद मोहम्मद है और जिससे शादी की वो भी चंड़ीगढ़ की नामी वकील और एक जमाने में हरियाणा हाइकोर्ट में असिस्टेंट एडवोकेट जनरल रहीं अनुराधा बाली थीं जो अब बेगम फ़िज़ा बन चुकीं थी. धर्म बदल कर दोनों ने दूसरा विवाह कर लिया और उस दिन मीडिया में भूचाल ला दिया ये कहकर… “मैं अपने प्यार के लिए सबकुछ कुर्बान करने को तैयार हूं मैंने सबकुछ अपने प्यार के लिए किया है वो खुशनसीब होते है जिन्हें उनका प्यार मिलता है.” अब प्यार के बाद नम्बर कुरबानी का ही था, कौन खुशनसीब और कौन बदनीसब इसका फैसला अब होना था. चंद्रमोहन उर्फ चांद मोहम्मद को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा. उनके पिता नें 2 दिन बाद ही घोषणा करके पैतृक संपत्ति से बेदखल कर दिया. चूंकि चन्द्र मोहन का विवाह सीमा विश्नोई से हो चुका था. वे दो जवान होते बच्चों के पिता थे. ऐसे में आशिक़ी उनपर भारी पड़नी ही थी. सिर्फ राजनीतिक ही नही नैतिक पतन की भी शुरुआत हुई.


“भ्रमर कोई कुमुदिनी पर मचल बैठा तो हंगामा,हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा,अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का,मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा.” मीडिया को मसाला मिल गया. विरोधियों को मुद्दा. परिवार को शर्मिंदगी मिली तो चांद को मिली उसकी फ़िज़ा. दुनियादारी से बेखबर हो वे अपनी दुनिया मे मशरूफ हो गए. आइये आपको थोड़ा पीछे ले चलता हूँ अभी की हलचल से थोड़ा दूर. जब इनकी पहली मुलाकात हुई. इनकी पहली मुलाकात भी बड़ी दिलचस्प थी. बात उन दिनों की है जब चंद्रमोहन सिर्फ विधायक हुआ करते थे एक दिन अपने कार्यकाल में साथियों के साथ बैठे थे. तभी उनका अचानक से जूस पीने का मन हुआ बोले चलो जूस पीकर आते है. विधायक जी पँहुचे एक जूस की दुकान पर और आर्डर किया. तभी उनकी नज़र वहाँ पहले से मौजूद जूस पी रहीं एक मोहतरमा पर पड़ी. पहली ही नज़र में विधयाक जी तो मुग्ध हो गये. वो खो से गए उन आंखों में. वहीं एक दूसरे का परिचय हुआ तो पता चला वो खूबसूरत महिला अनुराधा बाली है और हाइकोर्ट में पेशे से वकील है. चन्द्र मोहन जी ने उन्हें अपना कांटेक्ट नम्बर दिया और कोई भी हेल्प की जरूरत हो तो उनसे बेझिझक बोलें ऐसा  बोलकर वहाँ जे चले आये. लेकिन अब तक उस चेहरे को भूल नही पाए थे. शायद उन्हें पहली नज़र का प्यार हो गया था. अनुराधा बाली वकील थी तलाकशुदा थी. 1995 में उनका विवाह हुआ था लेकिन ज्यादा लम्बा चला नही और तलाक हो गया.
अनुराधा भी अकेली थी.  दोनों अब मिलने जुलने लगे थे. ऐसे में दोनों में दोस्ती हुई धीरे धीरे  नजदीकियां बढ़ती गयी. और सफर में चलते चलते मुकाम मोहब्बत तक आ पंहुचा. और उस मोहब्बत का पहला परिणाम 7 दिसंबर 2008 को आया जब चाँद में गूंजी फ़िज़ा की मोहब्बत.

लेकिन इससे पहले कि मोहब्बत की कोई और मिशाल कायम हो पाती कहानी में ट्विस्ट आ गया. शादी के 40 दिनों बाद ही चाँद मोहम्मद कहीं गायब हो गए. फ़िज़ा मीडिया में आईं और चांद के पूर्व परिवारवालों पर रोते हुए आरोप लगाई कि उन्होंने ही किडनैप कराया है मेरे चाँद को मुझसे अलग किया है. अब फिर सबकी निगाहें चाँद पे टिक गई आखिर वो फिर कहाँ चले गए. चाँद का कुछ पता नही चल पा रहा था,चाँद की जुदाई फिजां बर्दास्त नही कर पाई और नींद की 33 गोलियां एक साथ निगल गयीं… लेकिन आत्महत्या करने की ये कोशिश बेकार गयी उन्हें बचा लिया गया.
इस घटना की जानकारी जब चाँद को हुई तब उनके गायब होने का जो शिगूफा था उसका पटाक्षेप हुआ. 31 जनवरी 2009 की तारीख थी लंदन में बैठे चाँद मोहम्मद नें फोन पे मीडिया वालों से कहा वे अपनी मर्जी से फ़िज़ा को छोड़कर आएं है . वो लंदन में इलाज कराने गए है . उन्हें अब उनकी पहली पत्नी की और बच्चों की याद आ रही है उन्हें अब लग रहा है कि उनके बिना वे नही रह सकते . 

अब इश्क़ बेवफाई में बदल चुका था और शायद कुछ ऐसा… 
“ये प्यार था या कुछ और था,न तुझे पता न मुझे पता, सब निगाहों का ही कुसूर था,न तेरी खता न मेरी खता. “
 फ़िज़ा भी पटलवार के मूड में थी. उन्होंने चाँद मोहम्मद पर भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया और कई कानूनी धाराओं में केस दर्ज कराया. खूब हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा.
इसी बीच 14 मार्च 2009 की वो तारीख भी आई. जब चाँद ने अपनी फ़िज़ा को तलाक दे दिया. विदेश से sms में तीन बार तलाक तलाक तलाक बोलकर और इस रिश्ते को हमेशा के लिए विराम दे दिया। चाँद वापस भारत आये पुलिस से उन्हें क्लीन चिट दे दिया. चाँद वापस से हिन्दू धर्म में घरवापसी कर ली और अपने किये पर माफी मांगा. उन्होंने कहा ये उनके जीवन की सबसे बड़ी गलती थी.

 कुछ दिन गहमागहमी रही। फिर एक दिन कहानी में एक और नाटकीय मोड़ आया. 
चन्द्र मोहन एक बार फिर फ़िज़ा के पास पँहुचे और इस बार वो माफी मांगने गए थे. वो दुबारा फ़िज़ा को अपनी ज़िंदगी में चाहते थे लेकिन फ़िज़ा इस बार भरोसा करने को तैयार न थी.
बात कुछ ज्यादा बनी नही। ब्रेक अप पैक अप और फिर फाइनली ब्रेक अप.
शायद कुछ इस  अंदाज़ में कि
“चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों”
इधर अनुराधा बाली उर्फ फ़िज़ा बदले के मूड में आ चुकी थी. 2011 में उन्होंने एक पार्टी भी बनाई फ़िज़ा-ए-हिन्द के नाम से और राजनिति की दुनिया मे चंद्रमोहन को टक्कर देने. उनसे बदला लेने के ऐलान के साथ चुनाव मैदान में उतरती है लेकिन अफसोस कि वहां भी उन्हें सफलता नही मिली.

अनुराधा बाली किसी न किसी न रूप में मीडिया में चर्चा में बनी रहती थीं. बीच मे उन्होंने tv के एक रिएलिटी शो में भाग लिया. बिग बॉस से भी ऑफर आया था. यही सब चल रहा था कि इसी बीच 6 अगस्त 2012 को मोहाली में अनुराधा के घर  में। उनके बैडरूम में एक सड़ी हुई लाश बरामद हुई. वो लाश किसी और की नही खुद अनुराधा बाली की थी.
जांच पड़ताल हुई कमरे से शराब की एक क़वार्टर भी बरामद हुई. ब्लू जीन्स और टॉप में दूर से ही दुर्गंध मारती सड़ी हुई लाश के अलावा कमरे से एक करोड़ नगदी और जेवेलरी सही सलामत पाई गई.
फ़िज़ा की मौत का जिम्मेदार कौन था.? इश्क़, तनाव, नशा, या कोई षड्यंत्र.?
कुछ नें कहा आत्महत्या है कुछ नें कहा हत्या है. इन सबके बीच फ़िज़ा की मौत एक रहस्य बन के रह गयी. आज तक किसी को नही पता फ़िज़ा की मौत कैसे हुई. शुरुआत से लेकर अंत तक परिस्थितियों में उतार चढ़ाव  कैसा भी रहा हो. इस मृत्यु से इस प्रेम कहानी की समाप्ति हो गयी. चाँद के मोहब्बत में फ़िज़ा आखिरकार फना हो गयी.