चुनाव आयोग के इस फैसले से परेशान होंगे नेता! राजनीतिक पार्टियों की हालत ख़राब

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लोकसभा चुनाव का एलान हो चूका है. सभी पार्टियां चुनाव प्रचार में लग गयी है. उम्मीदवारों का एलान हो रहा है लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में कोई दागी नेता चुनकर संसद और विधानसभा भवन पहुँच जाए ये कोई बड़ी बात नही हैं. हमारे यहाँ माननीय सांसदों और नेताओं के लिए कोई बड़ी बात नही है कि उनपर डकैती, चोरी, मर्डर और कई संगीन आरोप लगे हो और वे संसद में बैठकर आपका भविष्य तय कर रहे हो.. लेकिन इस बार ऐसे माननीय नेताओं को सरेआम बदनामी और शर्मिंदगी झेलने पर मजबूर होना पड़ सकता है. दरअसल दागी नेताओं पर कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग दोनों सख्त दिखाई दे रहे हैं.


दरअसल समय-समय पर देश का सुप्रीम कोर्ट इस पर अपनी चिंताए व्यक्त करता आया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारतीय संसद को कुछ ऐसे नियम बनाने चाहिए जिससे कि दागी उम्मीद्वार संसद तक ना पहुँच पाएं. सुप्रेम कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह अपने स्तर पर किसी नेता की अयोग्य करार नही दे सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी उम्मीद्वारों को अपने आपराधिक रिकार्ड्स को सार्वजनिक करना होगा ताकि वोटर्स अपने सभी विकल्पों में से सबसे श्रेष्ठ उम्मीद्वार को चुन सके. सुप्रीम कोर्ट के इसी सलाह को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने पिछले साल 10 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया जिसके मुताबिक सभी उम्मीद्वारों को चुनाव प्रचार के मध्य में स्थानीय अख़बारों और टीवी चैनल पर अपने सभी अपराधिक रिकॉर्ड का ब्योरा देना होगा.. जिससे नेताओं के कारनामों के बारे में लोग समझ सके.. नेताओं के सफ़ेद कुर्ते पर कितने दाग लगे हैं, लगे भी हैं या नही! इसनकी पूरी जानकारी उनतक पहुँच सके…
आदेश के मुताबिक जिन उम्मीद्वारों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें इस बात का उल्लेख अपने निर्धारित प्रारूप में करना होगा। आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में हुए तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में पहली बार इस आदेश की पालना की गई। वर्ष 2019 में होने वाले ये पहले लोकसभा चुनाव होंगे जिनमें इन नए नियमों का पालन किया जाएगा..


नए नियमों को लेकर पार्टियों और नेताओं में भारी असंतोष और कंफ्यूजन है. इन लोगों की समझ में नही आ रहा है कि अपनी जानकारी के विज्ञापन के लिए खर्च पार्टी उठाएगी या फिर उम्मीदवार.. राजनितिक पार्टियों का कहना है कि शहरों में विज्ञापन का रेट बहुत ज्यादा हैं और हमें निश्चित राशि ही खर्च करनी हैं ऐसे में यह हमारे लिए मुशकिल हैं. चुनाव आयोग के अधिकारी की माने तो विज्ञापन का खर्च उम्मीदवार को ही करना होगा.
वहीँ इस बार चुनाव आयोग बेहद सख्त नजर आ रहा है लेकिन नियमों के मुताबिक विधानसभा चुनाव उम्मीद्वार को अपने चुनाव प्रचार पर 28 लाख रूपये तक खर्च करने की अनुमति है जबकि एक लोकसभा उम्मीद्वार 70 लाख रुपये खर्च कर सकता है. सोशल मीडिया पर भी इस बार चुनाव आयोग की तगड़ी नजर रहने वाली हैं. इन नियमों को ना मानने वाली और उम्मीदवारों की मान्यता या उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है.
चुनाव आयोग के इस कदम की तारीफ होनी चाहिए क्योंकि हमारे देश की संसद में आज तक ना जाने कितने दागी नेता घुस चुके हैं.. हो सकता हैं इन नेताओं को जब आपने चुना हो तब आपके पास इनकी जानकारी और इनके कुकुर्मों से आप अवगत ना रहे हैं लेकिन अब चुनाव आयोग के इस कदम से आपको आपने नेता की हर कारनामें की जानकारी आपतक पहुंचानी उसकी जिम्मेदारी हैं कि उस पर कितने अपराधिक मामले दर्ज हैं. ताकि आप साफ़ सुथरी छवि के नेता को वोट दें. और अपराधियों को संसद से निकालिए या पहुँचने ही मत दीजिये.
2019 लोकसभा चुनाव के लिए लगभग सभी पार्टियां उतर चुकी हैं. अचार सहिंता लागू हो चुकी हैं.

मोदी सरकार को हारने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट होने का दम तो भर रहा है लेकिन एक हो नही पा रहा है. राहुल गांधी के नेतृत्व में कोई भी पार्टी कांग्रेस के साथ खड़ा नही होना चाहती… ऐसे में पीएम मोदी का मुकाबला करना देश की विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती हैं.