रिश्ते के खत्म होने के बाद क्या यह करना ज़रूरी है?

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प्यार में कुछ भी गलत नहीं होता… क्योंकि इसमें सही और गलत जानने-समझने का वक़्त ही नहीं होता.
प्यार में कुछ भी अलग नहीं होता… क्योंकि प्यार अलग होने का नहीं एक होने का नाम है.

ये जो प्यार होता है ना साहब ये एक पवित्र से अहसास का नाम होता है… इसमें जो रिश्ता कायम होता है वो बेहद प्यारा और खूबसूरत होता है… लेकिन फिर भी दुनिया में हर रोज ऐसे हजारों खूबसूरत रिश्ते टूट जाते हैं…

हज़ारों जिंदगियों में प्यार आता है और हज़ारों से चला जाता है… रिश्ते बनते हैं, रिश्ते टूट जाते हैं… क्योंकि रिश्ते ना तो ज़िंदगी भर का कोई स्टैंप पेपर लेकर आते हैं और ना ही लाइफ टाइम चलने का गारंटी कार्ड.

Relationship के कई नाम होते है… आज हम जो चर्चा करेंगे वो है live-in रिलेशनशिप. ये प्यार का वो पहलू है जो थोड़ा अजीब है और ज़माने की नज़रों में थोड़ा सा गलत भी….
Live-in रिलेशनशिप का मतलब है कि जब आप प्रेम में होते हैं और बिना शादी किये अपने पार्टनर के साथ रहना शुरू कर देते हैं…
लिव इन से आगे जब कोई रिश्ता बढ़ता है तो नतीज़ा शादी तक जाता है और जो आगे नहीं जाते वो बीच में ही खत्म हो जाते हैं और जनरल टर्म में “ब्रेकअप” कहे जाते हैं…
कभी ये ब्रेकअप mutual understanding से आसानी के साथ हो जाते हैं, तो कभी एक भयानक मोड़ लेकर… कभी ऐसा होता है कि लड़का अलग होना चाहता लेकिन लड़की नहीं, और कभी लड़की अलग होना चाहती है और लड़का नहीं…

कभी-कभी जब लड़की लड़के से अलग नहीं होना चाहती और लड़का फिर भी अलग हो जाता है तो लड़की सब कुछ बिगाड़ के रख देती है…

कई बार ऐसा देखा गया है कि ब्रेकअप के बाद लडकियां पुलिस स्टेशन चली जाती है…. . लड़की पुलिस के पास जाती और लड़के के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज करवा देती है …. अक्सर शिकायत में यही होता है कि लड़के ने झूठ बोलकर, शादी का वादा करके लड़की के साथ संबंध बनाए और फिर शादी भी नहीं की. ये बलात्कार है. फिर लड़का सलाखों के पीछे पहले चला जाता है और साबित तो बाद में होता है लेकिन पहले जेल.

लड़के को जानने वाले जानते हैं कि लड़के ने न झूठ बोला, और न झांसा दिया, न जबर्दस्ती की है…. जब प्यार था तो वो सच था…. और अब जब प्यार नहीं रहा तो वो भी उतना ही सच था…….. और जैसाकि कई बार होता है कि

जरूरी नहीं कि टूटने वाले हर रिश्ते को दोनों पक्ष बराबर शिद्दत से तोड़ना चाहते थे… मुमकिन है, कोई एक तोड़ना चाहे और दूसरा जोड़ना….. दोनों की वजहें अलग, दोनों की जरूरतें अलग.. जिंदगी से दोनों की चाहतें अलग. ऐसे में ये हुआ कि जो जाना चाहता था, वो चला गया. और जो नहीं जाने देना चाहता था, वो अकेला रह गया…
लेकिन इसमें किसी एक को दोषी करार कर उसके ज़िन्दगी से खेलना गलत है …..हालांकि आपको बता दें पिछले साल अप्रैल में बॉम्बे हाइकोर्ट की गोआ बेंच ने योगेश पालेकर के ऐसे ही एक मुकदमे में फैसला सुनाते हुए कहा, “प्रेम संबंधों में हुआ सेक्स रिश्ते टूटने के बाद रेप नहीं हो जाता. चाहे रिश्ता किसी भी वजह से टूटा या किसी ने भी तोड़ा क्योंकि लड़की के साथ कोई जबर्दस्ती नहीं हुई थी. ये तथ्यों की गलत व्याख्या करना है.” कोर्ट ने योगेश पालेकर को बाइज्जत बरी कर दिया..

ठीक एक साल बाद इस 16 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एल. नागेश्वर और एम.आर. शाह की पीठ ने छत्तीसगढ़ के ऐसे ही एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा, “शादी का झूठा वादा करके किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाना रेप है क्योंकि यह महिला के सम्मान पर आघात है.” छत्तीसगढ़ की रहने वाली एक महिला ने अपने सहकर्मी डॉक्टर पर 2013 में रेप का इल्जाम लगाया था. 2009 से उनके प्रेम संबंध थे, लेकिन बाद में डॉक्टर ने उस महिला को छोड़ किसी और से विवाह कर लिया. महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय तक बात पहुंची और न्यायालय ने इसे रेप करार दिया.

जैसाकि योगेश पालेकर के केस में फैसला सुनाते हुए गोआ बेंच ने कहा था कि इस तरह के मामले समाज में काफी तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां सहमति से बने संबंधों को रेप माना जा रहा है क्योंकि शादी का वादा पूरा नहीं हुआ. दिल्ली पुलिस का आंकड़ा कहता है कि यहां दर्ज होने वाले रेप के कुल मामलों में एक चौथाई ऐसे हैं, जहां लड़की ने शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने की बात कही और रेप के तहत मुकदमा दर्ज कराया.

इन तमाम घटनाओं, मुकदमों और फैसलों को जोड़कर देखें तो कौन सी तस्वीर बनती है?

समाज बदल रहा है. शादी की उम्र आगे खिसक गई है…. अब हर कोई अपनी वर्जिनिटी सात फेरों के बाद ही नहीं खोता….. लड़के-लड़कियों के बीच सहमति से संबंध बन रहे हैं….. लेकिन सहमति से बने उन संबंधों के मूल में अब भी कहीं ना कहीं शादी का कहा या अनकहा वादा है ही……
दोनों के बीच जो भी सम्बन्ध हो… जो भी कसमें वादें हो… भले ही सुप्रीम कोर्ट ने कुछ भी फैसला सुनाया हो …

लेकिन सच यही है कि जब रिश्ता टूटता है तब तकलीफ दोनों को होती है… दोनों को इससे overcome करने की ज़रुरत होती है… दोनों को ज़रुरत होती है चीज़ों सँभालने की और खुद को सम्भालने की… ना कि सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने की