निर्भया का नाबा’लिग दो’षी याद है आपके? 7 सालों बाद कुछ ऐसी ज़िन्दगी जी रहा है वो

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7 साल पहले देश एक ज’घन्य वा’र’दात से सहम गया था. देश की राजधानी दिल्ली में हुई ये वा’र’दात देश के चेहरे पर एक काला धब्बा जैसा है. इस वा’र’दात के खिलाफ आन्दोलन हुए, नए क़ानून बने लेकिन हालात में कोई बदलाव नहीं आया. आज भी इस तरह की कई वार’दातें हमें खबरों में देखने/ पढने को मिल जाती है. आज से ठीक 7 साल पहले 16 दिसंबर की सर्दियों में 23 वर्षीय छात्रा निर्भया के साथ चलती बस में 6 द’रिंदों ने गैं’गरे’प किया था.

इन 6 द’रिंदों में से चार को फां’सी की सजा सुनाई गई लेकिन देश अब भी उनकी फां’सी की बाट जोह रहा है. एक दो’षी राम सिंह ने आ’त्मह’त्या कर ली और छठा दो’षी एक नाबा’लिग था. वार’दात के वक़्त वो 17 साल 6 महीने का था. उसके व्यस्क होने में 6 महीने बाकी थे. इसलिए उसपर जुवेलाइल जस्टिस के तहत मुक’दमा चलाया गया और उसी के अनुसार स’जा हुई. उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया. जहाँ 3 साल गुजारने के बाद 2015 में उसे रिहाई मिल गई.

लेकिन क्या आपको पता है कि उसके बाद वो कैसी ज़िन्दगी जी रहा है? घटना के वक़्त इस नाबा’लिग दो’षी ने ही निर्भया के शरी’र में रॉ’ड घु’साया था, जिससे उसके शरी’र का आंत’रिक हिस्सा बु’री तरह क्ष’तिग्र’स्त हो गया था और वही निर्भया की मौ’त का कारण बना था. पुरे ट्रायल के दौरान कभी भी इस नाबालिग दो’षी का ना तो नाम उजागर किया गया और न चेहरा दिखाया गया. आज तक देश उसकी पहचान से अनजान है.

बाल सुधार गृह में रखने के दौरान पूरी तरह से नाबा’लिग की मान’सिक स्थिति का ख्याल रखा गया. उसकी रूचि के अनुसार उसे काम सिखाये गए. पहले उसने सिलाई सीखी फिर खाना बनाना सिखा क्योंकि उसे खाना बनाना पसंद था. जब वो बहार निकला तो पूरी तरह से उसकी पहचान बदल दी गई. नया नाम और नए पहचान के साथ वो एक रेस्टोरेंट में नौकरी करता है. लेकिन ये नौकरी परमानेंट नहीं है. हर 6 महीने बाद उसकी जगह बदल दी जाती है. ताकि उसकी असली पहचान उजागर ना हो सके. क्योंकि सबसे ज्यादा हस्सा उस नाबालिक के लिए ही देश के लोगों के मन में था.