इस घटना से बदल गयी थी हेमंत सोरेन की जिंदगी, बनेंगे झारखंड के नए मुख्यमंत्री

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सोमवार 23 दिसंबर को झारखंड की राजनीति ने एक अलग ही मोड़ लेते हुए नए दौर की शुरुआत की है, झारखंड में चुनाव के नतीजे आये हैं जिसमें JMM सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसके कांग्रेस और राजद गठबंधन को ये खबर लिखे जाने तक 46 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है, जो कि झारखंड चुनाव के नतीजों को एकदम स्पष्ट कर देती है JMM+ गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है. तो ऐसे में गठबंधन से मुख्यमंत्री का चेहरा हेमंत सोरेन की चर्चा राजनीतिक हलकों में बेहद ही तेज हो चली है, हेमंत सोरेन को झारखंड की जनता से खूब आशीर्वाद मिला है और उन्होंने जीत भी दर्ज की है, लेकिन आप में से बहुत कम लोग जानते होंगे कि आदिवासी अंचल से निकला एक युवा राजनीतिक दांव पेंच में इतना आगे निकलकर मुख्यमंत्री पद का दावेदार आखिर बना कैसे, आज हम आपको यही जानकारी देने वाले हैं कि उनकी जिंदगी का वो कौनसा मोड़ था जिसने उन्हें यहाँ तक पहुँचाया.

हेमन्त सोरेन पूर्व में केंद्रीय मंत्री और आदिवासी नेता शिबू सोरेन के बेटे हैं, उनको झारखंड में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में जेएमएम-कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के गठबंधन का चेहरा चुना गया थे, इसपर गठबंधन की सोच को स्पष्ट करने के लिए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पहले ही कह चुके हैं कि महागठबंधन के चेहरा हेमंत सोरेन ही चुनाव में मिली जीत के बाद नए मुख्यमंत्री बनेंगे. हेमंत के बारे में अगर बात करें तो वो 19वीं सदी के आदिवासी नायक बिरसा मुंडा को बेहद मानते हैं और वो राज्य में सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री के तौर पर पहले भी पद संभाल चुके है.

कैसे बदली हेमंत सोरेन की जिंदगी जब हुई बड़े भाई की मौत ?

ये साल 2005 की बात है जब झारखंड में हुए और विधानसभा चुनावों के साथ उन्होंने पहली बार एक्टिव राजनीति में अपने कदम रखे उस वक्त वो दुमका विधानसभा सीट से मैदान में उतारे गये थे, लेकिन उस वक्त उन्हें अपनी पार्टी के ही बागी नेता स्टीफन मरांडी से हार का सामना करना पड़ा.. इसके बाद आया साल 2009 जब उनके बड़े भाई दुर्गा सोरेन की अचानक से मौत हो गयी, इस हादसे ने हेमंत की जिंदगी में एक बेहद ही बड़ा मोड़ ला दिया. अबतक दुर्गा को शिबू सोरेन का राजीतिक उत्तराधिकारी समझा जा रहा था, लेकिन जब उनकी अचानक मौत हो गई तो हालात बदल गये, अब किसी को तो शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत को संभालना ही था तो इसकी वजह से हेमंत सोरेन राज्य की राजनीतिक केंद्र में आ गए. और तभी से उनके राजनीतिक करियर की असली शुरुआत हुई.

हेमंत सोरेन इसके बाद बतौर राज्य सभा सांसद 24 जून, 2009 से लेकर 4 जनवरी, 2010 के बीच संसद भवन भी पहुंचे, इसके बाद सितंबर में उनको बीजेपी,जेएमएम,जेडीयू,एजेएसयू इन सभी दलों के गठबंधन की अर्जुन मुंडा सरकार में झारखंड का नया उपमुख्यमंत्री चुना गया. इसके बाद वो 2013 में झारखंड में सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री भी बने अपने पद को संभालते हुए उन्होंने राजनीतिक दांव पेंच भी बखूबी सीखे, हेमंत सोरेन दिसंबर 2014 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे.