कमलेश तिवारी की हत्या पर लिबरल गैंग का जश्न देखिये

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या के बाद लखनऊ से लेकर गुजरात तक हडकंप मच गया. हत्या लखनऊ में हुई तो इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन का हरकत में आना लाजिमी था लेकिन हत्या के बाद भागते हत्यारे अपने पीछे कुछ ऐसे सुराग छोड़ गए कि गुजरात पुलिस भी हरकत में आ गई. हत्यारे जिस मिठाई के डब्बे में कट्टा औत्र चाकू ले कर आये थे उस डब्बे पर गुजरात के सूरत शहर के धरती स्वीट्स का नाम था. उसके बाद गुजरात ATS ने सूरत क्राइम ब्रांच की मदद से मिठाई दूकान की CCTV फुटेज को खंगाला और फिर उस आधार पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया, उन तीनों के नाम है – रशीद पठान, मोहसिन शेख और फैजान.

24 साल का मोहसीन शेख एक साड़ी की दूकान में काम करता है. 23 वर्षीय रशीद पठान पेशे से दरजी है और कंप्यूटर एक्सपर्ट भी है. ये सारी बातें उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने प्रेस कांफ्रेस में बताया. साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि इस हत्या का कारण 2015 में कमलेश तिवारी का पैगम्बर मोहम्मद पर दिया गया आपत्तिजनक बयान था. ये तो थी वो बातें जो पुलिस ने बताई.

लेकिन पुलिसिया कारवाई से इतर भी कुछ ऐसा हो रहा था जिसने कई लिबरल और सेक्युलर लोगों के चेहरे से दोगलेपन का नकाब हटा दिया. जैसे ही कमलेश तिवारी की हत्या की खबर आई वैसे ही सबने अंदाजा लगा लिया कि ये हत्या क्यों हुई और किसने की होगी. अब पुलिस भी वही कह रही है. लेकिन लिबरल और वामपंथी गैंग ने ये कहने में जरा भी देर नहीं किया कि पुलिस जांच का इंतज़ार किया जाए.

ये वही लिबरल और वामपंथी गैंग है जो गौरी लंकेश की हत्या के बाद चंद सेकेण्ड में ही इस नतीजे पर पहुँच जाता है कि हिंदुत्व विरोधी होने की वजह से गौरी लंकेश की हत्या हुई. ये वही लिबरल और वामपंथी गैंग है जो क्रिकेट खेलते बच्चों की लड़ाई को भी चंद सेकेण्ड में जय श्री राम से जोड़ देता है. ये वही लिबरल और वामपंथी गैंग है जो ट्रेन में सीट को लेकर हुई लड़ाई में भी बीफ एंगल खोज लेता है.

द प्रिंट की जर्नलिस्ट जैनब सिकंदर को ही देख लीजिये. जैनब ट्वीट करती है कि “जिन्हें लगता है कमलेश की हत्या के पीछे शांतिप्रिय (मुस्लिम) लोग हैं. उन्हें मैं बता दूँ कि peaceful folks rock. ये वही लोग है जो लिंचिंग पर असहिष्णुता का चीत्कार करते हैं. ये वही लोग है जीने देश में डर लगता है.

स्वघोषित फैक्ट चेकर वेबसाईट ALT NEWS का को- फाउंडर मोहम्मद जुबैर कहता है कि मुर्शिदाबाद में हुई हत्या के लिए दक्षिणपंथी ममता सरकार को दोषी ठहरा रहे थे और कमलेश तिवारी की हत्या के लिए सिर्फ मुसलमानों को दोषी ठहराया जा रहा है. उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को नहीं.

जुबैर ये भूल जाता है कि जब गौरी लंकेश की हत्या हुई थी तो उसके लिए लिबरल और वामपंथी गैंग ने कर्नाटक की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के अलावा केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया था. जब उत्तर प्रदेश के दादरी में अख़लाक़ की हत्या हुई थी इसी लिबरल और वामपंथी गैंग ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन अखिलेश सरकार के बदले केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था और अवार्ड वापसी अभियान चलाया था. आज जब पुलिस बता रही है कि कमलेश की हत्या के साजिशकर्ता रशीद पठान, मोहसिन शेख और फैजान है तो जुबैर को सांप सूंघ गया है. लिस्ट बहुत लम्बी है.

डेढ़ लाख फौलोवर वाला एक ट्विटर अकाउंट है ककावाणी. कमलेश की हत्या पर दीवाली की अग्रीम बधाई दे रहा है और लोग कहते हैं कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता. फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन – फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन का कलमा पढने वाली वामपंथी और लिबरल गैंग अभी चुप है और मन ही मन खुशिया मन रही है. उनके लिए तो दिवाली से पहले ही धमाका हो गया.