नागरिकता संशोधन बिल पास होने पर तड़प उठा लिबरल और वामपंथी गैंग

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आपने कभी जोंक के ऊपर नमक डाल कर देखा है क्या होता है? अगर जोक के ऊपर नमक डालें तो वो तड़पता है, खून उगलता है और फिर मर जाता है. कुछ यही हाल हो रहा है देश में इन दिनों लिबरल और वामपंथी गैंग का. ये गैंग जोंक की तरह है. इसपर कल अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन क़ानून नाम का नमक डाल दिया. अब ये लिबरल और वामपंथी गैंग तड़प रहा है, खून उगल रहा है.

बिल का नाम है नागरिकता संशोधन क़ानून. यानी कि देश में आये शरणार्थियों को नागरिकता देना. वो शरणार्थी जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक हैं और वहां हुई ज्यादतियों से तंग आ कर अपना घर बार और मुल्क छोड़ कर दर बदर भटक रहे हैं. लेकिन लिबरल और वामपंथी गैंग तो है अपने एजेंडे से मजबूर. अगर आप इन्हें खाने को खीर देंगे तो पहले ये अपना एजेंडा सेट करेंगे. फिर देखेंगे कि ये खीर जिस दूध से बना है वो गाय का है और फिर अपने एजेंडे के हिसाब से खीर को जहरीला घोषित कर देंगे. खीर को मुस्लिम विरोधी घोषित कर देंगे.

लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया तो ये लिबरल और वामपंथी गैंग अपने अखंड ज्ञान का प्रदर्शन करने लगे. मुझे लगता है अब तक आप इस सिटिजनशिप एमेंडमेंट बिल का मतलब और इसका उद्धेश्य समझ गए होंगे. अब आपको एक ट्वीट दिखाता हूँ. ये ट्वीट है खुद को पत्रकार कहने वाली सबा नकवी का. बकौल सबा नकवी, लोग इनसे पूछ रहे हैं कि उनके पास कितना वक़्त बचा है देश से निकल जाने के लिए? और भारत सरकार उन्हें कहाँ भेजेगी? अब मोहतरमा ने ये नहीं बताया कि ये सवाल उनसे किस देश के लोगों ने पूछा?

एक और जर्नलिस्ट है मारया शकील. इनसे भी लोग वही सवाल पूछ रहे हैं जो सवा नकवी से पूछ रहे हैं. वही लोग वही सवाल. कभी कभी तो लगता है कि दोनों मोहतरमा ने एक दुसरे से ही अपने मन के सवाल पूछ लिए और ट्वीट कर दिया.

हमें लगता था कि पत्रकार पढ़े लिखे लोग होते हैं. लेकिन अगर फैशनेबल पत्रकार हैं तो बस एजेंडा चलाना आना चाहिए. पढ़े लिखे होना ज्यादा जरूरी नहीं है. ये बिल है शरणार्थियों को शरण देने के बारे में और इन फैशनेबल पत्रकारों को लगता है कि ये बिल मुसलमानों को देश से भगाने के लिए है.

एक और लिबरल शिरोमणि हैं स्वरा भास्कर. इनको तो ये दर्द है कि इस बिल में मुस्लमान क्यों शामिल नहीं है. वो तो इतनी बिलबिला गई कि भारत को हिन्दू पाकिस्तान घोषित कर दिया. लगता है इन मोहतरमा का ज्ञान भी इनकी फिल्म की तरह नील बाते सन्नाटा है. इनको पता ही नहीं ये बिल तीन देशों के अल्पसंख्यक शरणार्थियों के लिए है. इनको ये भी नहीं पता कि जिस देश ने खुद को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर रखा है वहां कोई मुस्लिम अल्पसंख्यक कैसे हो सकता है. लेकिन एजेंडा चलाना है तो अधकचरा ज्ञान बघारना अनिवार्य है.

ब्रह्मांड के महान पत्रकार मैग्सेसे विजेता रवीश कुमार के चेले ध्रुव राठी को कैसे भूल सकते हैं. इन्होने तो ये मानने से ही इनकार कर दिया कि भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था. इनका ज्ञान तो और प्रचंड है. इनके अनुसार विभाजन सेक्युलर भारत और इस्लामिक पाकिस्तान में हुआ था.

ये तो बस कुछ नाम है. लिस्ट बहुत लम्बी है. इन लिबरल वामपंथियों ने हर बार अपना प्रोपगैंडा और एजेंडा चलाने की कोशिश की है लेकिन अब लोग भी इनकी हरकतों से वाकिफ हो चुके हैं. तीन तलाक, आर्टिकल 370, NRC, अयोध्या और अब नागरिकता संशोधन बिल. इन सब मुद्दों पर वामपंथियों ने प्रोपगैंडा फैलाया और ये आगे भी फैलाते रहेंगे. जरूरत है इन जोंकों से सावधान रहने की.