कुंभ में आए अनोखे सन्यासी,बाबा बने आकर्षण का केंद्र

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विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यामिक आयोजन कुंभ, प्रयागराज में आरम्भ हो चुका है। पहला शाही स्नान मकर संक्रांति के दिन संपम्न हो चुका है जिसमें करीब 2 करोड़ से ज्यादा की संख्या में श्रद्धालुओं ने संगममें डुबकी लगाई है। अगर आपको ये लगता है की साधू बनना काफी आसान है तो आप बिलकुल गलत है क्योकि साधुओं की ट्रेनिंग सेना के कमांडों की ट्रेनिंग से भी ज्यादा कठिन होती है, उन्हें दीक्षा लेने से पूर्व खुद का पिंड दान और श्राद्ध तर्पण करना पड़ता है। इतना ही नहीं जो व्यक्ति साधू बनाना चाहता है उनको भ्रह्माचारी होना पड़ता है . उन्हें जीवन का सारा मोह माया छोड़ कर निर्मोही बनना होता है . सबसे हैरान करने वाली तो ये है की ये साधू कुंभ खत्म होते ही गायब हो जाते हैं. क्या है साधुओ की रहस्यमयी दुनिया का सच?

शुरुरात करते हैं नागा साधुओ- से वह अर्धकुंभ, महाकुंभ में निर्वस्त्र रहकर हुंकार भरते हैं, शरीर पर भभूत लपेटते हैं, नाचते गाते हैं, डमरू ढपली बजाते हैं लेकिन कुंभ खत्म होते ही गायब हो जाते हैं .नागा संन्यासी किसी एक गुफा में कुछ साल रहते है और फिर किसी दूसरी गुफा में चले जाते हैं. इस कारण इनकी सटीक स्थिति का पता लगा पाना मुश्किल होता है. इन में से बहुत से संन्यासी वस्त्र धारण कर और कुछ निर्वस्त्र भी गुप्त स्थान पर रहकर तपस्या करते हैं .

उसके बाद आते हैं गोल्डन बाबा – सोने के आभूषणों से लगाव रखने वाले गोल्डन बाबा अब कुंभ में सबका ध्यान अपनी और खीच लेते हैं . इतने अधिक आभूषण पहनने के पीछे की वजह बताते हुए उनके एक अनुयायी ने पिछले दिनों बताया था कि बाबा को बचपन से ही सोना पसंद है। बाबा जब व्यापारी थे, तब ही उन्होंने काफी सोना खरीदा था। अब बाबा सिर्फ अनुदान के सहारे ही गुजारा करते हैं और उसमें भी उन्हें ज्यादातर सोना ही मिलता है क्योंकि उनके भक्तों को पता है कि बाबा को क्या पसंद

रुद्राक्ष वाले बाबा – वे सिर से कमर तक रुद्राक्ष की करीब 500 मालाएं पहनते हैं। किसी माला में ग्यारह रुद्राक्ष तो किसी 21 या 51 और 108 तक रुद्राक्ष पिरोए गए हैं। सिर्फ यही नहीं बाबा करीब 100 मालाएं अपने सिर पर भी बांधे रहते हैं।जिनमें कई रुद्राक्ष एकमुखी, जबकि कई सोलह मुखी हैं। बाबा का 11 हजार रुद्राक्ष का संकल्प करीब सालभर पहले पूरा हो चुका है और वे 51 हजार रुद्राक्ष धारण करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

टोपी वाले बाबा – बाबा ने अपने सिर पर एक विशेष ढंग की रंग-बिरंगी तिरछी टोपी लगाई हुई है।देखने में भले ही यह टोपी साधारणतया एक ‘जोकर कैप’ की तरह नजर आए लेकिन अपने भीतर ये कई संदेश समटे हुई है।