आज के बजट पर कुमार विश्वास ने जो कहा उसकी तारीफ़ हर कोई कर रहा है, आपको भी सुनना चाहिए

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 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट पेश किये जाने के बाद उस पर प्रतिक्रियाएं आनी भी शुरू हो गई है. सत्ता पक्ष ने तो बजट की खूब तारीफें की और इसे देश बदलने वाला बजट बताया जबकि हमेशा की तरह विपक्ष ने इस बजट को गरीब, किसान, युवा और मिडिल क्लास विरोधी बता कर खारिज कर दिया. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने इस बजट को लेकर बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी. उन्ही में से एक हैं कवि कुमार विश्वास.

कुमार विश्वास ने बेहद आसान शब्दों में समझाया कि बजट कैसा होना चाहिए. उन्होंने इसके लिए तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस और रामराज्य का सन्दर्भ दिया. कुमार विश्वास ने जो कहा वो सबको सुनना चाहिए. उन्होंने कर व्यवस्था की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि कर (Tax) व्यवस्था आज की नहीं है, बल्कि लाखों वर्षों से कर निर्धारण की व्यवस्था है.

उन्होंने तुलसीदवास द्वारा रचित दोहावली का जिक्र करते हुए कहा कि राजा बनने के बाद राम ने भरत को कर व्यवस्था के बारे में समझाते हुए कहा था कि हमें कर वैसे ही लेना चाहिए जैसे सूरज लेता है. सूरज सागर से, नदी से, तालाब से, यहाँ तक कि अंजुरी (हथेलियों) से भी पानी को सोख लेता है और फिर उस पानी को बारिश के रूप में हमें वापस करता है और सब प्रसन्न होते हैं. उसी तरह सरकार को भी कर लेना चाहिए और उस कर को सड़क, हाइवे, स्कूल, अस्पताल, कॉलेज बना कर वापस करना चाहिए. तुलसीदास ने दोहावली में रामराज्य में कर व्यवस्था के बारे में लिखा है,
बरसत हरषत लोग सब करषत लखै न कोइ
तुलसी प्रजा सुभाग ते भूप भानु सो होइ.

आप खुद सुनिए कितनी सरल भाषा में कुमार विश्वास ने कर व्यवस्था का विवरण दिया है.