15 साल बाद वापिस शुरू होगी योजना, अब ट्रेनों में फिर से मिलेगा कुल्हड़

  अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो सारी कायनात उसे तुम से मिलाने में लग जाती है , यहाँ हम बात कर रहे है चाय की , उम्म्म चाय ,चाय कितनी प्यारी चीज़ होती है न मानो एक चाय आपकी पूरी दिन की टेंशन ख़तम कर देता है . वही चाय अगर कुल्हर वाली हो तो बात ही अलग है , कुल्हर वाले चाय से जो कुल्हर की स्मेल आती कितना अच्छा . कही सफ़र पर जाओ और कुल्हर वाली चाय मिल जाए तो भाई बस अब कुछ नहीं चाहिए . आज से 15 साल पहले यानी की वर्ष 2004 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में कुल्हड़ को अनिवार्य कर दिया था .

उनका कहना था की इससे स्टेशन पर गन्दगी नहीं फैलेगी और कुल्हर बनाने वालो को रोजगार भी बढेगा . लेकिन समय बदलता गया और कुल्हर की जगह ले की पेपर , प्लास्टिक की कप ने . रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्रेनों में एक बार फिर से कुल्हड़ के प्रयोग का आदेश दिया है।’ गोयल ने एक ट्वीट में लिखा कि अब ट्रेन में रेल सफर करने वाले यात्रियों को चाय, लस्सी समेत अन्य पेय पदार्थ मिट्टी से बने कुल्हड़, गिलास और प्यालो में दिए जाएंगे।

फिलहाल, वाराणसी और रायबरेली स्टेशनों में यह व्यवस्था लागू होगी।रायबरेली और वाराणसी स्टेशन से शुरू होगा सर्विस ट्रेन में जिन कुल्हड़ का प्रयोग किया जाएगा, वो Terracotta से बने हुए होंगे। सबसे पहले इन्हें रायबरेली और वाराणसी स्टेशन से शुरू किया जाएगा। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन ने कहा कि इससे न सिर्फ भारत की सदियों में पुरानी परंपरा को जीवित रखने में मदद मिलेगी, बल्कि लोगों को रोजगार भी मिलेगा। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआइसी) के अध्यक्ष वीके सक्सेना ने रेल मंत्री को दिसंबर में पत्र लिखकर इसका प्रस्ताव दिया था।

उन्होंने बताया कि कुंभकार सशक्तीकरण योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 300 इलेक्ट्रिक चाक का वितरण किया जा चुका है और 1000 का प्रस्तावित हैं। इसी प्रकार यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में 100 इलेक्ट्रिक चाक का वितरण किया जा चुका है। 700 और चाक लोगों को दिए जाएंगे। लवे के सर्कुलर के अनुसार, ‘जोनल रेलवे और आईआरसीटीसी को सलाह दी गई है कि वे तत्काल प्रभाव से वाराणसी और रायबरेली रेलवे स्टेशनों की सभी ईकाइयों में यात्रियों को भोजन या पेय पदार्थ परोसने के लिए स्थानीय तौर पर निर्मित उत्पादों, पर्यावरण के अनुकूल टेराकोटा या पक्की मिट्टी के ‘कुल्हड़ों’, ग्लास और प्लेटों का इस्तेमाल सुनिश्चित करें ताकि स्थानीय कुम्हार आसानी से अपने उत्पाद बेच सकें

लवे के सर्कुलर के अनुसार, ‘जोनल रेलवे और आईआरसीटीसी को सलाह दी गई है कि वे तत्काप्रभाव से वाराणसी और रायबरेली रेलवे स्टेशनों की सभी ईकाइयों में यात्रियों को भोजन या पेय पदार्थ परोसने के लिए स्थानीय तौर पर निर्मित उत्पादों, पर्यावरण के अनुकूल टेराकोटा या पक्की मिट्टी के ‘कुल्हड़ों’, ग्लास और प्लेटों का इस्तेमाल सुनिश्चित करें ताकि स्थानीय कुम्हार आसानी से अपने उत्पाद बेच सकें ‘कुल्हड़ों में चाय की योजना से सरकार एक ओर जहां पर्यावरण स्वच्छता की ओर अपने कदम बढ़ा रही है वहीं दूसरी ओर इस योजना से सरकार कुम्हारों को सक्षम बनाना चाहती है.

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