कूदे राम ने रिटायरमेंट के बाद कुछ इस तरह ली हेलीकॉप्टर से विदाई

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सपने पूरे करने की कोई उम्र नही होती. व्यक्ति चाहे तो वो किसी भी सपने को पूरा कर सकता है,फिर वो चाहे किसी भी औहदे पर हो, चाहे वो अमीर या गरीब क्यों न हो. बस अपने अरमानो को पूरा करने के लिए जुनून चाहिए और अपने अंदर विश्वास चाहिए.आज हम आपको एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बताऐंगे जिसने अपना पूरा जीवन अपने सपने को पूरा करने में लगा दिया और आखिर में अपने सपने को पूरा करने में सफल भी हो गए.

हरियाणा के फरीदाबाद का यह मामला काफी दिलचस्प हैं. ये मामला एक कूदे राम नाम के व्यक्ति का है. वह फरीदाबाद के नीमका के एक सरकारी स्कूल से 30 जुलाई को रिटायर हुए. उन्होनें अपने 40 साल पुराने सपने को पूरा किया और बाकि लोगों के लिए एक मिसाल बन गए हैं. कूदे राम हेलीकॉप्टर में बैठने का सपना पिछले 40 सालों से देख रहे थे और इसके बारे में उन्होंने अपने परिवारवोलों को भी बताया था,लोकिन उनकी इस बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया. उन्होंने ये बात अपने छोटे भाई जो गांव के सरपंच भी हैं उनसे भी बताई थी.

अपने सपने के बारे में बताते हुए कूदे राम ने बताया कि, मैं बहुत कम पढ़ा-लिखा हूं और मैं जिंदगी में कुछ ज्यादा नहीं कर सका लेकिन मैं अपने क्षेत्र में इतिहास रचना चाहता था. इसलिए कई सालों से योजना बनाने के बाद मैंने तय किया कि मैं अपने रिटायरमेंट को यादगार बनाऊंगा और लोग मेरा नाम हमेशा याद रखेंगे,और यही वजह है कि वो चपरासी के रूप में अपने काम के आखिरी दिन साइकिल से स्कूल पहुंचे लेकिन घर वापस हेलीकॉप्टर से लौटे.

रिटायरमेंट वाले दिन कूदे राम के परिवार ने अपने 7000 रिश्तेदारों को भोजन पर भी बुलाया था. कूदे राम ने लंच पर 3.5 लाख रुपये खर्च किए और 3.25 लाख रुपये हेलिकॉप्टर के किराए पर खर्च किए. कूदे राम की पत्नी राममती देवी ने कहा कि, इतने सालों तक वह अपने पति के साथ फोटो खिंचवाने का इंतजार करती रहीं, लेकिन उनके पति इतने शर्मीले हैं कि वह परिवार के सामने उनसे बात करने से भी कतराते थे. मैंने उन्हें इस सपने के लिए एक-एक पाई जोड़ते देखा है. वो अपने इस सपने के लिए सेविंग भी करते थे.

कूदे राम ने बताया कि लंबे विचार के बाद यह निर्णय लिया गया कि प्लेन के लिए रन-वे भी बनाना पड़ेगा जिससे बहुत खर्च होगा इसलिए हेलीकॉप्टर ही लिया गया. एक बार जब सब तय हो गया तो कूदे राम एक खत लेकर डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर गए और उन्होनें बताया कि यह खत जब भी पहली बार किसी अधिकारी ने देखा तो वह हंसा कि कुछ देर की जॉय राइड के लिए इतने पैसे क्यों खर्च कर रहे हैं? तब कूदे राम ने उन्हें बताया कि यह पैसे की बात नहीं है बल्कि उनके 40 साल पुराने सपने की बात है. कूदे राम के छोटे भाई शिव कुमार ने बताया कि, इसकी इजाजत लेने में हमें चार साल लग गए. मेरे भाई ने अपने ऊपर कभी एक रुपया खर्च नहीं किया और अपने सपने को पूरा करने के लए बहुत मेहनत भी की. कूदे राम अब अपने गांव के साथ ही आसपास के गांव में सेलेब्रिटी और एक मिसाल भी बन चुके हैं.

ये कूदे राम की कहानी थी. ये आपको प्रेरणा दे सकता है कि अपने सपने कैसे पूरे करें क्योंकि जिंदगी सबको सिर्फ एक बार ही मिलती है. और हर व्यक्ति अपने सपने को पूरा करना चाहता हैं. कूदे राम ने पूरी महनत करके अपना सपना पूरा किया. आप भी अपना सपना पूरा करने की कोशिश किजिए. हमारी शुभकामनाएं आपके साथ है.