केपी यादव : जो कभी महाराज के साथ सेल्फी के लिए लाइन लगता था, उसी ने ध्वस्त कर दिया सिंधिया राजघराने का किला

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लोकसभा चुनाव के नतीजे आये तो मोदी की सुनामी पूरब से पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिण तक को अपनी चपेट में ले लिया. इस सुनामी में कई किले ढह गए. लेकिन जिस किले ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी,वो है सिंधिया राजघराने का किला गुना. मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट पर भाजपा ने अपना परचम लहरा दिया. ये वो सीट है जिसपर सिंधिया राज परिवार की तीन पीढ़ियों ने राज किया. भाजपा उम्मीदवार केपी यादव ने कांग्रेस के महारथी ज्योतिरादित्य सिंधिया को हरा कर सबको चौंका दिया. केपी यादव ने उन्हें करीब 1 लाख 23 हज़ार वोटों से शिकस्त दे कर 20 सालों बाद ये सीट भाजपा की झोली में डाल दी .

सबसे दिलचस्प बात ये रही कि केपी यादव कभी कांग्रेसी हुआ करते थे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक थे. फ़रवरी 2018 में जब मुंगावली विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में केपी यादव को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था. 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुंगावली से उन्हें उम्मीदवार बनाया था लेकिन यादव बहुत ही मामूली अंतर से हार गए .लेकिन जब भाजपा ने लोकसभा चुनाव में उनपर फिर भरोसा जताया तो यादव जी ने इस बार निराश नहीं किया और ऐसा दांव मारा की पूरा देश चौंक पड़ा . 45 वर्षीय केपी यादव MBBS डॉक्टर हैं . उनके पिता रघुवीर सिंह यादव चार बार गुना ज़िला पंचायत अध्यक्ष रहे थे. कांग्रेस में रहने के दौरान केपी यादव ज्योतिरादित्य सिंधिया के चुनाव का प्रबंधन देखा करते थे .लेकिन इस बाद इस सिपाहसलार ने अपने ही महाराज को चुनौती दी और उनका किला ध्वस्त कर दिया.

ऊपर तस्वीर में जो शख्स ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ सेल्फी लेने की कोशिश कर रहा है वही हैं केपी यादव . जब भाजपा ने उन्हें सिंधिया के खिलाफ अपना उम्मीदवार घोषित किया तो ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ने एक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की जिसमे और लिखा – जो कभी महाराज के साथ सेल्फी के लिए लाइन में खड़े होते थे, उन्हें भाजपा ने अपना प्रत्याशी चुना है.

ये एक अहंकार भरा पोस्ट था. जिसमे राजशाही की दुर्गन्ध थी लेकिन वो कहते हैं ना कि अहंकार तो रावण का भी नहीं रहा. केपी यादव ने महाराज को हराया और महाराज के साथ साथ महारानी का भी दंभ चूर चूर कर दिया. प्रियदर्शिनी ने सोचा भी नहीं होगा कि जिस सीट से 1971 से ही सिंधिया परिवार जीतता आ रहा है उस उस सीट पर कोई अदना सा शख्स उनके गरूर को चकनाचूर करेगा . 1971 से 1984 तक इस सीट से ज्योतिरादित्य के पिता माधव राव सिंधिया सांसद रहे . 1989 -1999 तक राजमाता विजय राजे सिंधिया भाजपा के टिकट पर जीत कर लोकसभा पहुंची . पार्टी भले ही बदल गई लेकिन गुना सीट पर कब्ज़ा हमेशा एक ही परिवार का रहा . ज्योतिरादित्य इस सीट से 2002 से जीतते आ रहे हैं .

इस बार उनके दोस्त और कांग्रेस अध्यक्ष ने उन्हें पश्चिमी यूपी की कमान सौंपी थी. ज्योतिरादित्य यूपी में कांग्रेस को जिंदा कर रहे थे तो उनके पीछे प्रियदर्शिनी ने गुना में उनके प्रचार की कमान संभाली . जब तक महाराज लौट कर गुना आये तक तब सीट उनके हाथ से निकल चुकी थी . जब केपी यादव भाजपा में शामिल हुए थे तो शिवराज सिंह चौहान ने एक बयान दिया था कि अब भाजपा विभीषण की मदद से लंका फतह करेगी . केपी यादव की जीत अकल्पनीय है. साथ ही एक सीख भी देती है कि वक़्त कभी भी बदल सकता है.