3 बजे के बाद कोलकाता के वोटर्स कहाँ खो गए थे

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सांतवें चरण का चुनाव रविवार को संपन्न हो गया… हर तरफ अब नतीजे और एग्जिट पोल की चर्चा है. अब संभावनाएं यह लगाई जा रही हैं कि किसको कितनी सीटें मिलेंगी. कौन होगा प्रधानमंत्री. सबकी अपनी अपनी राय है. वैसे सातवें चरण के चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल काफी सुर्ख़ियों में था… वहाँ हुए हिंसाक गतिविधियों के करान … शायद कहीं न कहीं उसका प्रभाव रविवार के मतदान में देखने को मिला है … तो हुआ कुछ ऐसा है कि कोलकाता में ऐसी घटना सामने आई जो वहाँ चर्चा का विषय बनी हुई है.

दरसल सातवें चरण की वोटिंग के दौरान कोलकाता की दोनों लोकसभा सीट ऐसी रहीं, जहां अप्रत्याशित रूप से शाम 3 बजे के बाद कोई वोट डालने ही नहीं आया.
वैसे 2014 लोकसभा चुनावों के मुकाबले इस बार वोटिंग प्रतिशत कम रहा है. पश्चिम बंगाल की बाकी 40 सीटों के मुकाबले अब तक संपन्न हुए हर लोकसभा चुनाव में कोलकाता नॉर्थ और कोलकाता साउथ सीटों पर सबसे ज्यादा मतदान होता रहा है. लेकिन इस बार भी रविवार को जब मतदान शुरू हुआ तो पोलिंग बूथ पर काफी भीड़ थी, लेकिन 3 बजे के बाद ज्यादातर पोलिंग बूथ खाली नज़र आए.

हालांकि कोलकता नॉर्थ सीट पर दोपहर एक बजे तक ही 43.6% वोटिंग हो चुकी थी और तीन बजे तक ये बढ़कर 54.9% हो गई थी, जबकि शाम 6 बजे तक ये सिर्फ 61.1% तक ही पहुंच पाई. वाहीं कोलकाता साउथ की बात करें तो 1 बजे तक यहां भी 43% वोटिंग हो चुकी थी और सिर्फ दो ही घंटे में यहां वोटिंग प्रतिशत बढ़कर 58.6% हो गया था. हालांकि शाम 6 बजे तक यहां भी सिर्फ 67% ही वोटिंग हुई.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक इलेक्शन कमीशन के अधिकारी ने बताया है कि दोनों ही सीटों पर सुबह 7 बजे से मतदान के लिए लंबी लाइनें लगी थीं, लेकिन शाम 3 बजे के बाद पोलिंग बूथ खाली ही रहे. साल 2014 में पश्चिम बंगाल में 83.8% वोटिंग हुई थी, लेकिन इस बार ये घटकर 81.1% ही रही है.

वैसे भी अभी तक पश्चिम बंगाल में सभी चरण के चुनाव हिंसात्मक ही हुए है… और आखिरी चरण में तो TMC और बीजेपी के बीच माहौल इतना बिगड़ गया था कि बीच बचाव के लिए चुनाव आयोग को चुनाव प्रचार का समय कम करना पड़ा था… हालांकि टीएमसी को यह पूरी उम्मीद थी कि बीजेपी के साथ जारी हिंसक घटनाओं के बाद बंगाली जनता पहले से ज्यादा बढ़कर वोट करेगी लेकिन ऐसा कुछ नज़र नहीं आया.लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ… यहाँ तक की पिछले चुनाव की वोटिंग प्रतिशत से भी इस बार कम वोटिंग हुई है… जिससे कहीं न कहीं TMC का मनोबल टूटता नज़र आता है.. खैर यह तो अब चुनावी नतीज़ा ही बताएगा कि TMC पर कोई प्रभाव पड़ता है या नहीं…