जाने,कैसे होती है आतंकियों की ट्रेंनिंग

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आपने सुना ही होगा कि आतंकियों ने फलां जगह हमला कर दिया,इतने घायल हो गए इतने लोग मारे गए।
आप कभी गौर कीजिएगा की हमला करने वाला पुलिस के हाथ बहुत कम केस में ही लगता है।अधिकतर देखा गया है एक आतंकी मिशन पूरा करने के बाद अपने आपको भी धमाके में उड़ा लेता है।
अब अपनी जान तो सबको प्यारी होती है फिर ये आतंकी अपनी जान को सिर्फ एक बटन दबाके क्यों खत्म कर लेते हैं। 
असल मे ये सब उनकी ट्रेनिंग का ही हिस्सा होता है।

आज the chaupal आपको बताएगा कि कैसे इन आतंकियों को दुनिया को तबाह करने का पाठ ट्रेनिंग के दौरान पढ़ाया जाता है।

सबसे पहले आप ये जान लीजिए कि फिलहाल दुनिया मे आईएसआईएस, अल कायदा,,लश्कर ए तैयबा,बोको हरम,पाकिस्तानी तालिबान,अल नुसरा फ्रंट,जेमाह इस्लामिया,अबू सय्याफ जैसे आतंकी गुट सक्रिय हैं .


इन सबके काम करने का तरीका भले ही अलग रहता हो पर सबका मकसद अपने हिसाब से इस्लाम धर्म की परिभाषा तय करके उसी के मुताबिक पूरी दुनिया को चलाना चाहते हैं,इनका मकसद है कि पूरी दुनिया मे इस्लामीकरण को बढ़ावा दिया जाए। जो इनके हिसाब से नही चलता वो इनका दुश्मन हो जाता है। पश्चिमी शिक्षा के ये काफी खिलाफ होते है क्योकि इन्हें लगता है कि अगर बंदा किताब पढ़ लिया तो शायद वो इनके खिलाफ खड़ा हो जाएगा शायद यही वजह है कि ये सिर्फ मदरसे वाली शिक्षा को प्रोत्सहित करते है। ज्यादातर आतंकी सगठन अपने आपको समाज मे मानवीय हितों की रक्षा करने वाला बताकर काम करते हैं।


जायदातर आतंकी संगठनों की ट्रेनिंग अमूमन एक ही जैसी होती है,बस फर्क टाइमिंग का होता है यानी कुछ कैम्प आतंकियों को 5-6 महीनों में ही तैयार कर लेते हैं और कुछ जमात उद दावा जैसे आतंकी संगठन दो साल तक भी लड़ाकों को ट्रेनिंग देते हैं ।


कैसे होती है इनकी ट्रेनिंग


साल 2017 में गिरफ्तार आतंकी नावेद ने लश्कर ए तैयबा की ट्रेनिंग का पूरा खुलासा किया था। उसने जो कुछ बताया था उसी के आधार पर हम आपको ये सब आसान भाषा में करके बता रहे हैं।

लश्कर ए तैयबा लडाको को सबसे पहले बेसिक ट्रेनिंग देता है जिसको दौरा ए आम भी कहा जाता है। तीन सप्ताह के इस कैम्प में कमांडरों की तरफ से लड़ाकों के दिलो दिमाग मे धार्मिक कट्टरता भरी जाती है जिससे वो इस्लाम के नाम पर कुछ भी करने को तैयार हो जाए। इस कैम्प में बेसिक फिटनेस प्रशिक्षण भी दिया जाता है।


अगर कोई इस ट्रेनिंग को अच्छे से पूरा कर लेता है तो उसकी अगली ट्रेनिंग को दौरा ए ख़ास कहा जाता है। ये ट्रेनिंग तीन से पांच सप्ताह तक चलती है और इसमें हथियार चलाना सिखाया जाता है। लडाकों को रस्सी पर चढ़ना,पहाड़ो से उतरना और मुश्किल वक्त में सामने वाले दुश्मन का मुकाबला करने का पूरा ट्रेनिंग दिया जाता है। 


जब सिखाने वाले को लगता है कि बंदा सब कुछ बढ़िया कर रहा है तो उसको तीसरे कैम्प के लिए भेज दिया जाता है। इस कैम्प को दौरा ए लश्कर कहते है।इस कैम्प के लिए चुने लोगो को फील्ड क्राफ्ट एंड टैक्टिस सिखाया जाता है। जिसमे उन्हें मैप रीडिंग, जीपीएस सिस्टम,और वायरलैस रेडियो का इस्तेमाल करना सिखाया जाता है।
आतंकियों के जेहन में धार्मिक कट्टरता इतनी भरी जाती है कि उनको लगता है कि वो जो भी कर रहें है उनका वो कदम उनके धर्म को दुनिया भर में फैला देगा। 


उनकी ट्रेंनिंग के शुरुआती फेस में ही इंटरनेट पर कई ऐसी वीडियो मौजूद है जिन्हें देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि एक लड़ाके को आतंकी बनाने के लिए काफी कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है।

इन तीनो कैम्प को करने वाले को फुल ट्रेंड फुल यानी पूरी तरह से प्रशिक्षित मान लिया जाता है।जब भी ज़रूरत पड़ती है तो संगठन की तरफ से इन लोगो को बुलाया जाता है।इन्हें हथियार और सारे साज़ो सामान सब संग़ठन की तरफ से दिए जाते हैं। आतंकियों को राशन और मोटा पैसा भी मिलता है जिसके लालच में आकर पाकिस्तान और कश्मीरी बड़ी संख्या में इन आतंकी संगठनो को जॉइन करते हैं।


 खैबर पख्तूनख्वा, मुज़फ़्फ़राबाद,स्वाईं नाला,कोटली, जैसी जगहों पर आतंकियों के काफी कैम्प बने हुए है जहां पाकिस्तानी सेना की मदद से आतंकियों की खेप तैयार की जाती है।

उम्मीद है आपको हमारी ये जानकारी अच्छी लगी होगी।