जाने कैसे सुरंगों के रास्ते देश के नये संसद भवन में प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति का होगा प्रवेश

देश को नया संसद भवन मिलने जा रहा है.देश की आजादी के 75वें साल यानी वर्ष 2022 में संसद के दोनों सदनों की बैठकें आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस नए भवन में होंगी. पुराना भवन प्राचीन धरोहर का हिस्सा बन जाएगा. श्रम शक्ति भवन को तोड़कर उसकी जगह नई इमारत बनाई जाएगी, जिसमें हर सांसद का अपना कार्यालय होगा.नए भवन की ऊंचाई संसद के मौजूदा भवन के बराबर ही होगी. इसमें एक बेसमेंट सहित तीन फ्लोर होंगे. नई इमारत पुरानी से करीब 17,000 वर्गमीटर से ज्यादा बड़ी होगी. इसमें देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के सफर के साथ-साथ विविध संस्कृति और धरोहरों की झलक दिखेगी.

प्रस्तावित भवन में लोकसभा के सदन में कुल 888 सदस्यों के बैठने की क्षमता होगी, वहीं संयुक्त सत्र में इसे 1224 सदस्यों तक बढ़ाने का विकल्प भी रखा जाएगा. राज्यसभा के सदन में कुल 384 सदस्य बैठ सकेंगे और भविष्य को ध्यान में रखते हुए इसमें भी जगह बढ़ाने का विकल्प रखा जाएगा. वर्तमान में लोकसभा सदन में कुल 543 सदस्य बैठ सकते हैं, वहीं राज्यसभा में कुल 245 सदस्य.

वर्तमान में सेंट्रल विस्टा और लुटियंस बंगला जोन में कई हिस्सों में सुरक्षा कारणों और वीआईपी आवाजाही के लिए कई बार कड़ी व्यवस्था की जाती है, जिससे लोगो की मूवमेंट पर असर पड़ता है. आने वाले समय में वीआईपी रास्तो का इस्तेमाल सिर्फ 26 जनवरी की परेड जैसे कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है.रिपोर्ट के मुताबिक ये सुरंगे सिंगल लेने की रहेगी. क्योकि इनका इस्तेमाल विशेष रूप से कुछ लोगो द्वारा ही किया जाएगा. चुकी ये छोटे खंड है ऐसे में संसद तक पहुचने के लिए गोल्फ कोर्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है. सुरंगों के पीछे की अवधारणा काफी सरल है. यदि वीआईपी मूवमेंट संसद से अलग होगी तो कम रुकावटों के साथ वे नई संसद के परिसर में अंदर और बाहर आ जा सकेगे.

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