क्या आप जानते हैं कि क्या है रासुका कानून और कितने दिनों की हो सकती है जे’ल ?

1583

नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिं’सा करने वालों पर यूपी पुलिस ने रासुका (NSA) लगाने की तैयारी कर रही है. प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश के अलग अलग शहरों में बड़े पैमाने पर हिं’सा हुई थी. पुलिस पर हम’ले किये हैं, पत्थ’रबा’जी की गई और कई पुलिस थानों को आ’ग लगा दिया गया. सरकार ने न सिर्फ इन हिं’सक उपद्र’वियों की संपत्तियों को सीज करना शुरू कर दिया है बल्कि उनपर रासुका लगाने की भी तैयारी शिरू कर दी है. चौक चौराहों पर उप’द्रवि’यों के पोस्टर लगा दिए गए हैं और उनकी जानकारी देने वालों को इनाम देने की घोषणा भी की गई है.

क्या आप जानते हैं रासुका क्या है और किन परिस्थितियों में लगाया जाता है?

रासुका का मतलब होता है राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून. जिस व्यक्ति पर पुलिस ने रासुका लगा दिया, उसे अधिकतम 1 साल तक पुलिस बिना किसी आरोप के जेल में रख सकती है. राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम -1980 के तहत देश कि सुरक्षा के लिए सरकार को अधिकतम शक्ति दी गई थी. ये क़ानून केंद्र और राज्य सरकार को ये अधिकार देता है कि शंका के आधार पर देश या राज्य की सुरक्षा कायम रखने के लिए किसी भी व्यक्ति को हिरासत में रखा जा सके.

 23 सितंबर, 1980 को इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान इसे बनाया गया था. इस क़ानून के तहत अगर सरकार को ये महसूस होता है कि कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहा है तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है. इस क़ानून का इस्तेमाल जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, राज्य सरकार अपने सीमित दायरे में भी कर सकती है.

रासुका के अंतर्गत आरोपी या संदिग्ध को अधिकतम 12 महीनों तक बिना किसी आरोप के जेल में डाला जा सकता है. हालाँकि हिरासत में लिया गया व्यक्ति उच्च न्यायालय के सलाहकार बोर्ड के समक्ष अपील कर सकता है लेकिन उसे मुकदमे के दौरान वकील की अनुमति नहीं होती है