जानिए क्या है नेशनल मेडिकल कमिशन बिल,जिसपे मचा हुआ है इतना बवाल

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नेशनल मेडिकल कमिशन बिल के खिलाफ दिल्ली के साथ-साथ देश भर के डॉक्टर की हड़ताल अभी भी जारी हैं. मोदी सरकार ने राज्यसभा में एनएमसी बिल को पास करा दिया,जबकि लोकसभा में यह बिल 29 जुलाई को पास हो गया था. पूरे देश के डॉक्टर इस बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.सरकार ने एमसीआई की जगह एनएमसी बिल पास करा दिया जिसके कारण ही देश भर के डॉक्टरों ने हडताल करी. केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने डॉक्टरों से हड़ताल पर न जाने की बात कही और कहा कि यह बिल सभी डॉक्टरों के हित में है.

डॉक्टरों का कहना है कि एनएमसी बिल स्वास्थ्य विरोधी और गरीब विरोधी है। डॉक्टरों के हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बंद हो गई हैं. इसका नुकसान मरीजों को उठाना पड रहा हैं. मरीजों को उनकी परेशानियों का इलाज नही मिल पा रहा हैंऔर वो इसके कारण काफी परेशान है. मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान 2018 में नेशनल मेडिकल कमीशन बिल को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में पेश किया था। जिसे अब राज्यसभा में भी पास कर दिया गया है।

इससे पहले मेडिकल ,मेडिकल संस्थानों और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया देखता था. लेकिन अगर इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है तो एमसीआई की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन ले लेगा. इस आयोग के अध्यक्ष को सरकार द्वारा चुना जाएगा और इसके सदस्यों को सर्च कमेटी चुनेगी.

नेशनल मेडिकल कमीशन की धारा 58 के अनुसार इस कानून के चालू होते ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ इसके अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं भी खत्म हो जाएंगी. उन्हें तीन महीने का वेतन और भत्ता भी दिया जाएगा. नेशनल मेडिकल कमीशन देश के सभी मेडिकल संस्थानों में 40 फीसदी सीटों की फीस तय करेगा। बाकि बचे हुए 60 फीसदी सीटों की फीस संस्थान खुद तय करेंगे।