केरल सरकार ने कन्वर्टेड लोगों के लिए निकाली स्पेशल वैकेंसी

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आपने अपने जीवन में कभी न कभी सरकारी नौकरी के लिए अप्लाई जरूर किया होगा. जब किसी सरकारी नौकरी के लिए नोटिफिकेशन निकलती है तो उसमे तीन या चार कैटेगरी होती है. जनरल यानी अनारक्षित, ओबीसी यानी अदर बैकवर्ड क्लास, एससी/एसटी. ये अति पिछड़ी कैटेगरी होती है जिन्हें हम शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब्स कहते हैं. कभी कभी एक और कैटेगरी होती है हैंडीकैप यानी दिव्यांग. लेकिन केरल में एक ऐसी कैटेगरी में वैकेंसी निकली जिसे सुनकर आप चौंक जायेंगे.

केरल सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में वैकेंसी निकाली. इस वैकेंसी के लिए जो गैजेटेड नोटिफिकेशन निकाला गया उसमे साफ साफ लिखा गया है ये वैकेंसी सिर्फ Scheduled Caste Converts to Christianity के लिए है. यानी उन लोगों के लिए कन्वर्ट हो चुके हैं. मतलब जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है.

ये इस तरह का पहला नोटिफिकेशन नहीं है. इस नोटिफिकेशन में साफ़ साफ़ लिखा गया है कि ये तीसरी नोटिफिकेशन है. इससे पहले जब दो बाद इस तरह की वैकेंसी निकाली गई थी तो कनवर्टेड कैंडिडेट्स की कमी के कारण इसे भरा नहीं जा सका था. इस रिक्ति को भरने के लिए सबसे पहले 2014 में नोटिफिकेशन निकाला गया था फिर उसके बाद 2016 में दुबारा नोटिफिकेशन निकाला गया.

खुबसूरत समुद्र तट, मंदिर और नारियल के पेड़ों से भरे केरल को कहा जाता है God’s Own Country. यानी कि भगवान का अपना देश. आंकडों के लिहाज से देखें तो केरल देश का सबसे शिक्षित राज्य है. लेकिन ये जो वैकेंसी केरल सरकार ने निकाली है वो खुबसूरत नकाब के पीछे केरल का असली चेहरा दिखाता है. सरकारी शह पा कर क्रिस्चन मिशनरियों ने केरल में अपना एक साम्राज्य खड़ा कर रखा है और खुलेआम गरीब आदिवासियों और पिछड़ों को ईसाई धर्म में कन्वर्ट कर रही है.

महज एक पैकेट चावल और चंद पैसों के लिए लोग इन मिशनरियों के जाल में फंस कर हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाई बन रहे हैं और केरल की वामपंथी सरकार इन कनवर्टेड लोगों के लिए वेलफेयर स्कीम चलाती है. केरल सरकार ने तो बाकायदा इसके लिए डिपार्टमेंट बना रखा है – Kerala State Development Corporation for Christian Converts from Scheduled Castes and the Recommended Communities Ltd. नाम से. ये डिपार्टमेंट 1980 में अस्तित्व में आया. कंपनी एक्ट 1956 के अनुसार बना ये डिपार्टमेंट कनवर्टेड लोगों के लिए शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक जरूरतों का ख्याल रखने के लिए बनाया गया था. इसका मतलब ये है कि केरल में कन्वर्जन का धंधा 80 के दशक से ही चल रहा है और वो भी बाकायदा सरकारी सहयोग से.

जब आप गूगल पर “केरल स्टेट डेवलपमेंट कारपोरेशन फॉर क्रिस्चियन कंवर्ट्स फ्रॉम शेड्यूल कास्ट एंड द रेकोमेंडेड कम्युनिटीज लिमिटेड” सर्च करेंगे तो सबसे पहला रिजल्ट निकल कर आएगा द हिन्दू का एक आर्टिकल. ये आर्टिकल 2010 का है जिसमे केरल सरकार की एक स्कीम का जिक्र है जिसके अंतर्गत कनवर्टेड लोगों का 151 करोड़ रुपये का ऋण माफ़ किये जाने की बात थी. इस स्कीम के जरिये एक लाख लोगों को फायदा मिलने की बात थी. इन आंकड़ों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मिशनरियों का ये एजेंडा कितना सालों से चल रहा है.

ईसाई मिशनरियों के इस एजेंडे के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए फेसबुक पर एक पेज है “नो कन्वर्शन.” ट्विटर पर भी नो कन्वर्शन नाम का एक ट्विटर हैंडल है. अगर आप इसके पोस्ट पर नज़र डालेंगे तो आपको पता चलेगा कि किस तरह से गरीब और पिछड़े हिन्दुओं को ईसाई धर्म में कन्वर्ट किया जाता है. शायद केरल दुनिया का पहला ऐसा राज्य होगा जहाँ सरकारी मदद से भारतीय सभ्यता, संस्कृति और प्राचीनतम हिन्दू धर्म को ख़त्म करने की साजिश की जा रही है.

बात बात पर गंगा जमुनी तहजीब और सेक्युलरिज्म की दुहाई देने वाला लिबरल गैंग इस पुरे मामले पर चुप्पी साध लेगा. सोचिये अगर किसी भाजपा शासित राज्य में वैकेंसी निकाली जाती कि केवल इस्लाम या ईसाई धर्म छोड़ कर हिन्दू धर्म अपनाने वालें ही इस नौकरी के लिए अप्लाई करने की अनुमति है तो अब तक देश और लोकतंत्र खतरे में आ गया होता.