सिस्टर लूसी ने पादरी पर लगाया गंभीर आरोप, मोमबत्ती गैंग कहाँ है गायब ?

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अक्सर देखा गया है कि धर्म विशेष के गुरु और पंडित अगर कुछ गलत करते है तो मीडिया वाले उस के खिलाफ बहुत आवाज़ उठाते है. लेकिन जब बाकी किसी धर्म में ऐसा होता है तो उन्ही लोगों को सांप सूंघ जाता है. उसके खिलाफ जाने वाले लोगों की आवाज़ दबा दी जाती है. मेनस्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया वाले भी उस खबर को नज़रंदाज़ कर देते है. ऐसी ही घटना केरल से सामने आई जहा एक नन जिनका नाम सिस्टर लूसी है, उन्हें कॉन्वेंट में बंधक बनाने और प्रार्थना से रोके जाने का मामला सामने आया है. हालांकि, लूसी को बंधक बनाने के आरोप में कॉन्वेंट के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है. केरल में दु’ष्कर्म पीड़ित नन का साथ देने वाली सिस्टर लूसी कलाप्पुरा को Franciscan Clarist Congregation से निकाल दिया गया है. अब वह नन नहीं रहेंगी. FCC ने 5 अगस्त को आरोप लगाया था कि उन्होंने FCC की इजाजत के बिना कविता प्रकाशित करवाईं, कार खरीदी, पूर्व बिशप के खिलाफ प्रदर्शन किया और टीवी शो में भी शामिल हुईं.

साथ ही उन पर सोशल मीडिया पर एक्टिव, नन के लिए तय ड्रेस न पहनने और समय पर नहीं आने के भी आरोप लगाए गए हैं. आरोप है कि उन्होने गलती सुधारने की कोशिश नहीं की, इसलिए उन्हें चर्च से निकाला जा रहा है. उन्हें 10 दिन में अपना कॉन्वेंट छोड़ने का आदेश दिया गया है.सिस्टर लूसी कलपूरा ने रोम के कैथोलिक चर्च में अपील कर अपने खिलाफ हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई को गलत बताया है. FCC के आदेश के बाद लूसी ने कहा कि वो अपनी जगह छोड़कर नहीं जाएंगी और कानूनी लड़ाई लड़ेंगी.

बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर मई 2014 में कुराविलांगड़ के एक गेस्ट हाउस में 44 वर्षीय नन के साथ बला’त्कार करने और उसके बाद यौ’न शो’षण करने का आरोप है. नन ने जून 2018 में एक शिक़ायत दर्ज की थी और यह भी दावा किया था कि, उनकी शिक़ायतों के बावजूद, चर्च ने बिशप पर कोई कार्रवाई नहीं की. यही नहीं कैथोलिक संस्था भी बला’त्कार के आरोपी बिशप के साथ खड़ी हो गई थी, और बिशप को निर्दोष के रूप में दिखाया गया. फ्रैंको बिशप को जाँच दल द्वारा उसके ख़िलाफ़ सबूत मिलने के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया था, लेकिन बाद में उसे सशर्त ज़मानत पर रिहा भी कर दिया गया, जिससे उसे हर दो सप्ताह में एक बार जाँच टीम के सामने पेश होने और अपना पासपोर्ट सरेंडर करने के लिए कहा गया.

खैर, होना तो ये चाहिए था कि मेनस्ट्रीम मीडिया इस मामले को उठाए, महिलाओं के मुद्दे को लेकर अक्सर जो लोग कैंडल मार्च लेकर निकल आते है, प्रदर्शन करने लगते है, वो लोग इस मामले में कहा गायब हो गए है.क्या ये इस महिला के साथ अन्याय नही है. इस खबर पर हमारी लगातार नज़र बनी हुई है.हम चाहते है कि नारीवाद की बाते करने वाले लोग ऐसी खबरों को भी नज़र में रखे ताकि नन के साथ साथ हर ऐसी महिला को न्याय मिल सके.