हम गठबंधन के लिए कांग्रेस को मना-मनाकर थक गए हैं, लेकिन वह नहीं समझ रही,अरविन्द केजरीवाल

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ये तो केजरीवाल को बोलते हुए आपने कई बार सुना होगा कि मोदी और अमित शाह को हराने के लिए वो किसी हद तक जा सकते है ..या बच्चो के स्कूल में जाकर उनके पेरेंट्स से ये कहना कि अगर जो अपने बच्चो से प्यार करते है तो मोदी को वोट ना दे …या फिर मनचाह ट्वीट करके लोगो कि देशभक्ति के उपर सवाल उठाते हुए ये कहना कि मोदी भक्त कभी देश भक्त नहीं हो सकता और देश भक्त कभी मोदी भक्त नहीं हो सकता..ये सब तो पुराना हो गया..  लेकिन एक समय कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ जनता को रोजाना अपने साथ धरने पर बिठाकर अपने राजनीतिक करियर की बुनियाद रखने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल आजकल कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे हैं… मीडिया में रोजाना आ रहे उनके बयानों से स्पष्ट है कि भाजपा को लोकसभा चुनावों में हराने के लिए अरविन्द केजरीवाल किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं..कुछ भी कर सकते है.

वैसे लोकसभा चुनाव में दिल्ली में बीजेपी को टक्कर देने के लिए आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के गठबंधन की चर्चा पर ..अब खुद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने विराम लगा दिया है.. बुधवार (फरवरी 20, 2019) को केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की सातों सीटों पर बीजेपी को हराने के लिए आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कॉन्ग्रेस को गठबंधन के लिए मनाने की खूब कोशिशें कीं लेकिन कॉन्ग्रेस नहीं मानी… अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी के हर कैंडिडेट के ख़िलाफ़ एक प्रत्याशी होना चाहिए और वोटों का बँटवारा नहीं होना चाहिए.

आगे रैली को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा, “हम गठबंधन के लिए कॉन्ग्रेस को मना-मनाकर थक गए हैं… लेकिन वह नहीं समझ रही.. अगर गठबंधन होता है तो बीजेपी सातों लोकसभा सीटों पर हार सकती है.. अपने भाषण में केजरीवाल ने यह भी कहा कि जिनके अंदर भी देश के लिए अच्छी भावना है, उन्हें चाहिए कि वह 2019 चुनाव में भाजपा को हराए.. मैं नहीं जानता कि कॉन्ग्रेस के दिमाग में क्या चल रहा है … कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा को कमजोर करने गई है और दिल्ली में बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ रही AAP को कमजोर करने का काम कर रही है…

इससे ये तो साफ़ हो गया है कि लोकसभा चुनाव का दबाव केजरीवाल जी के उपर किस तरह बना हुआ है …कि वो कही भी, कभी भी लोगो कि देश के लिए क्या भावनाए उन पर सवाल खड़ा कर देते थे …अब इसका रिजल्ट तो चुनाव के बाद ही सामने आएगा कि जनता उनकी बातों को कितने सीरियसली लेती है कितना नहीं.