योगी आदित्यनाथ के प्रचार से डर कर हिन्दू वोट बैंक को साधने के लिए केजरीवाल ने चली ये चाल

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देश की राजधानी दिल्ली जहाँ से पूरा देश चलता है या फिर कह सकते हैं कि जो हर वक़्त चर्चा में रहती है. चाहे वो अपनी राजनीति को लेकर हो, या फिर क्राइम को लेकर दिल्ली चर्चा में रहती है. बात करें दिल्ली के चुनाव की तो चुनावी फिजा में नेताओं के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली के चुनावी रण में उतरते ही चुनाव में जाती समीकरण को आम आदमी पार्टी ने साधना शुरु कर दिया है.

कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार करते हुए योगी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए “अली और बजरंगबली” का जिक्र किया था. जिसका खामियाजा योगी को भुगतना पड़ा था. इलेक्शन कमीशन ने चुनाव प्रचार पर योगी के ऊपर 48 घंटो का बैन लगया गया था.

दिल्ली चुनाव में योगी के आने के बाद आम आदमी पार्टी ने जो अभी तक 5 साल काम किया है उसको लेकर वोट मांग रही थी.उसने अचानक से योगी के प्रचार के बाद U-टर्न ले लिया है. अब केजरीवाल भी धर्म की राजनीति शुरू कर दी है. सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में खुद को ‘बजरंग बलीट का सबसे बड़ा भक्त बताते हुए हनुमान चालीसा सुना दी. दरअसल खुद को बड़ा हनुमान भक्त बताने पर एंकर ने उनसे हनुमान चालीस सुनाने को कहा था, जिसे केजरीवाल ने मान लिया और उसकी कुछ लाइनें गाकर सुनाईं

दिल्ली के मुख्यामंत्री केजरीवाल ने कहा कि उनको एंटी हिंदू के तौर पर पेश करने की कोशिश की जा रही है, जबकि यह सही नहीं है. बीजेपी के पास अब उनके खिलाफ कुछ बोलने को बचा नहीं है, तो वह ऐसा प्रचार कर रही है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले एक साल में बुजुर्गों को माता वैष्णो देवी से लेकर ऋषिकेश तक की तीर्थ यात्राएं कराई हैं.

आज चुनाव में फिर से धर्म और जाती समीकरण को साधने की तैयारी सभी पार्टियों ने शुरु कर दी है. जो अभी तक काम को लेकर वोट मांग रहे थे, वो अब अपने को हनुमान भक्त बताने लगे है. इससे यही साबित होता है कि राजनीति में बने रहने के लिए कोई किसी भी हद्द तक जा सकता है दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बचपन से हनुमान जी के कट्टर भक्त हैं और वह अक्सर अपने पड़ोस और कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर में पूजा के लिए जाते हैं.
केजरीवाल ने जब सवाल पूछा गया कि ऐसा कौन सा वादा है, जिसे पूरा न कर पाने का अफसोस है, तो उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने मोटे तौर पर अपने सारे वायदे पूरे किए हैं. हालांकि दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाना, स्वराज बिल, लोकपाल बिल जैसे केंद्र के अधीन आने वाले काम अधूरे रह गए है.