दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर शानदार बहुमत के साथ वापसी की है. आप की सीटें पिछली बार के मुकाबले घटी हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें जैसा बहुमत मिला उसे प्रचंड ही कहा जाएगा. 22 सालों से सत्ता का वनवास झेल रही भाजपा को और 5 साल का वनवास अभी झेलना होगा. इस चुनाव में दिल्ली की जनता ने ये साबित कर दिया कि उसके लिए न तो CAA का मुद्दा महत्वपूर्ण है और न आर्टिकल 370 और न शाहीन बाग़.

जानकारी के लिए बता दें दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी प्रंचड बहुमत हासिल करते दिखाई दे रही है लेकिन “आप” पार्टी की फजीहत की बात ये है कि उनकी पार्टी के कई बड़े चेहरे इस समय पिछड़े हुए हैं. जिसमें सबसे पहला नाम पटपडगंज से प्रत्याशी और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया हैं. अभी तक हुई काउंटिंग के हिसाब से सिसोदिया छठे राउंड के बाद भी पीछे चल रहे हैं. पटपड़गंज में बेहद ही कांटे की चल रही है.

वहीं दिल्ली विधानसभा स्पीकर रामनिवास गोयल की बात करें तो वो भी इस समय पीछे चल रहे हैं. शाहदरा विधानसभा सीट से फ़िलहाल में पीछे चल रहे हैं. इतना ही नही केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे कैलाश गहलोत नजफ़गढ़ विधानसभा सीट पर बीजेपी के अजीत खरखरी से पीछे चल रहे हैं.

गौरतलब है कि पिछले चुनाव में कैलाश गहलोत कम वोटों से जीतने वाले प्रत्याशी बने थे, जिन्हें बाद में केजरीवाल सरकार में मंत्री बनाया गया था. अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि “आप” के डिप्टी सीएम हार जाते हैं तो यह केजरीवाल के लिए बड़ा झटका हो सकता है. हालाँकि अभी रुझान आ रहे हैं नतीजे शाम तक ही घोषित होंगे.