देश की राजनीति बदलने आये केजरीवाल अब खेल रहे हैं गंदा खेल! पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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दिल्ली के मुख्यमंत्री आज कल बेहद डरे और सहमे नजर आते हैं. डर रहे हैं पीएम मोदी के सत्ता वापसी से…डर रहे हैं अमित शाह की चाल से…उनका ये डर कई बार दिख चुका हैं और इसे एक-दो बार नही बल्कि जब-जब बोलने का मौका मिल, तब-तब उन्होंने दिखाया है. अपने भाषण में अरविन्द केजरीवाल जी लोगों को भी डराते ही नजर आ रहे हैं. वहीँ अब अरविन्द केजरीवाल ने मस्जिदों के इमामों की सैलरी बढ़ा दी है। दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने बोर्ड के एक कार्यक्रम में मस्जिदों के इमामों की सैलरी बढ़ाने का एलान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौजूद रहे। मौलाना की सैलरी दस हजार से बढ़ाकर 18000 और मुअज्जिन की सैलरी 9000 से बढ़ाकर 16 हजार कर दी गई है। फरवरी से बढ़ी हुई सैलरी मिलेगी। राजधानी दिल्ली में वक्फ बोर्ड की तरफ से करीब 300 मस्जिदों के इमामों को सैलरी दी जाती है। अब केजरीवाल सरकार जनता के पैसों से इन इमामों को बढ़ी हुई सैलरी देने वाली है.
आपको बता दें कि दिल्ली वक्फ बोर्ड ने बुधवार को डीडीयू मार्ग स्थित माता सुंदरी कॉलेज में इमामों के साथ मुख्यमंत्री का संवाद कार्यक्रम रखा था। इस कार्यक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिरकत की।


मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के एक कार्यक्रम को सियासी पिच में बदल लोकसभा चुनाव की जमीन तैयार करने की कोशिश की। पूरी दिल्ली के इमामों की मौजूदगी ने केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में सिर्फ आप ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी को शिकस्त दे सकती है।
कांग्रेस को वोट देने का सीधा मतलब भाजपा को फायदा पहुंचाना है। अपने दावे के हक में केजरीवाल ने बीते लोकसभा चुनाव में तीनों पार्टियों को मिले वोट प्रतिशत का गणित समझाया।
केजरीवाल ने यहां फिर दोहराया कि बीते पांच साल में मोदी-शाह की जोड़ी ने वह काम कर दिखाया, जिसे पाकिस्तान बीते 70 साल में भी नहीं कर सका। 2019 में ये दोबारा चुनाव जीत जाते हैं तो देश नहीं बचेगा। केजरीवाल ने भाजपा को शिकस्त देने की अपील की।
केजरीवाल ने कहा कि पूरे देश में भाजपा को हराने की ताकत कांग्रेस में नहीं है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, उत्तर प्रदेश में सपा व बसपा का गठबंधन, दक्षिण में दूसरे दल ही अपने-अपने राज्य में भाजपा को हरा सकते हैं।
इसी तरह दिल्ली में आप ही भाजपा को हरा सकती है। बकौल केजरीवाल, 2014 के चुनाव में भाजपा को 46, आप को 33 फीसदी व कांग्रेस को 15 फीसदी वोट मिले थे। इस बीच भाजपा का वोट प्रतिशत दस फीसदी घटा है। यह कांग्रेस को चला जाता है तो उसका वोट प्रतिशत 25 पर होगा और भाजपा आसानी से चुनाव जीत जाएगी। अगर यह आप को मिलता है तो सातों सीटें आप के पास होंगी।


अब दिल्ली के मुख्यमंत्री जो राजनीति को बदलने आये वो खुद राजनीति के अनुसार बदलने लगे हैं. कांग्रेस से ना गठबंधन करने की अपने बेटे की कसम खायी लेकिन बाद में सत्ता सुख के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था. अब आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए केजरीवाल नई चाल चल रहे हैं.