पार्टी कार्यकर्ता की हत्या के बाद आगबबूला हो गये कुमारस्वामी और देखिये ये क्या कह दिया?

कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने के बाद कुमारस्वामी लगातार किसी ना किसी वजह से सुखियों में बने ही रहते हैं. कुमारस्वामी कर्नाटक में शान्ति, खुशहाली और गरीबों के हित में काम करने का दावा करते हैं लेकिन कर्नाटक शांत तो बिलकुल दिखाई नही दे रहा है. कर्नाटक में सरेआम हत्या कर दी जा रही है. पार्टी कार्यकर्ता की हत्या से बौखलाए कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी कुछ ऐसा बोल गये जिसे सुनकर आप भी एक बार अवाक् रह जायेंगे!

पार्टी कार्यकर्ता की हत्या पर आगबबूला हो गये कर्नाटक के मुख्यमंत्री!

पिछले कुछ समय से पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या से पूरे देश में बवाल मचा हुआ था लेकिन कभी भी कोई मुख्यमंत्री इस कदर गुस्सा नही हुआ जितना गुस्सा कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को आ गया. यहाँ कुमारस्वामी सिर्फ गुस्सा ही नहीं हुए बल्कि कुछ ऐसा बोल गये जो किसी भी समवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्ति को कतई शोभा नही देता. जानिये आखिर ऐसा क्या हो गया जिसके बाद कुमारस्वामी आगबबूला हो गये और फिर सफाई देनी पड़ गयी.

कुमारस्वामी

दरअसल जेडीएस के जिला स्तरीय सदस्य होन्नालगेरे प्रकाश की कुछ बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. जिसके बाद कुमारस्वामी भड़क गये और बोले कि

“किसी इंसान की राह चलते इस तरह हत्या कर दी जाती है… मुझे नहीं पता आप लोग क्या एक्शन ले रहे हैं…यह आपकी जिम्मेदारी है… उन्हें बेरहमी से मार डालो… जो होता है देखा जाएगा… मुझे उसकी जरा भी फिक्र नहीं…’

जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. जिसके बाद कुमारस्वामी को सफाई देनी पड़ी. उन्होंने कहा कि ‘मैंने गुस्से में ऐसा कह दिया, क्योंकि वहां पहुंचते ही मुझे इस हत्या की खबर मिली. मैंने गुस्से में कह दिया”.

कुमारस्वामी के इस बयान के सामने आने के बाद कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री यदुरप्पा ने कहा है कि मुख्यमंत्री से इस तरह के बयान की उम्मीद नही थी और ये एक गैरज़िम्मेदाराना बयान है”.

पूर्व मुख्यमंत्री – बीएस यदुरप्पा

हालाँकि कुमारस्वामी का गुस्सा जायज है लेकिन संवैधानिक पद पर बैठकर इस तरह का आदेश देना कितना जायज है? ह्त्या किसी की भी हुई हो, मुख्यमंत्री को सभी के साथ न्याय करने का आदेश देना चाहिए. पश्चिम बंगाल में लगातार हो रहे बीजेपी कार्यकर्ताओं की ह्त्या के बाद कोई ठोस कदम नही उठाया और एक के बाद एक कार्यकर्ताओं की हत्याएं होती रही.

कहा जाता है कि दूसरों का दर्द कोई तीसरा नही समझता, वही हाल हमें इस मामले में भी दिखाई देता है कि जब अन्य लोगों की हत्याएं हो रही थी उस समय कुमारस्वामी पर कोई असर नही पड़ रहा था लेकिन जब अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ता की हत्या हुई तो कुमारस्वामी आगबबूला हो गये!

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