कश्मीर नहीं ,कर्ज़ पर ध्यान दो इमरान खान जी

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पूरी दुनिया में जब भी बच्चे पैदा होने की किलकारी गूंजती है तो चेहरे खुशियों से झूम उठते हैं. मगर पाकिस्तान अकेला दुनिया का ऐसा मुल्क है जहां ये किलकारी भी खतरे की घंटी की तरह बजती है. जानते हैं क्यों.पाकिस्तान का हर बच्चा है कर्ज का मुहताज , बिलकुल सही सूना आपने पाकिस्तान में तेजी से बढ़ रही आबादी है कर्ज का मुहताज .ये हम नहीं कह रहे बल्कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा है दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आबादी वाले मुल्क पाकिस्तान की सबसे ऊंची अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर बढ़ती आबादी पर काबू नहीं पाया गया तो कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान पूरी तरह कर्ज में डूब जाएगा.

पहले सुनिए आखिर क्या बोला पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा ‘टिकटिक करता टाइम बम’ है. बढ़ती आबादी पर क़ाबू पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नसीहत दी है. साथ ही मुल्क में बढ़ती बेरोज़गारी को देखते हुए आबादी पर अंकुश लगाने की हिदायत भी दी. इसके बाद अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग जोर पकड़ रही है.पाकिस्तान में फिलहाल आलम ये है कि यहां पैदा होने वाला हर बच्चा अपने सिर पर डेढ़ लाख लाख रुपए का कर्ज लेकर पैदा होता है. इसीलिए अब पाकिस्तान में भी हम दो हमारे दो की मांग तेजी से उठने लगी है.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को धार्मिक विद्वानों, नागरिक संगठनों और सरकार से जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को बढा़वा देने की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए उपायों में हर परिवार में परिवार दो बच्चों का नियम भी शामिल है। आपको बता दें कि साल 2017 की जनगणना के मुताबिक पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ 77 लाख से ज़्यादा है.. इस लिहाज़ से वो चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया के बाद दुनिया का पांचवां सबसे आबादी वाला देश है.. जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का नंबर दुनिया में 33वें नंबर पर आता है . आंकड़े कहते हैं कि पाकिस्तानी आबादी के 21 में से सात करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं. यानी हर दस में से चार पाकिस्तानी गरीब है. उस पर सितम ये कि मुल्क पर करीब 30 हज़ार अरब का क़र्जा है.तो अब जब भी कोई बच्चा यहां जन्म लेता है तो समझिए कि वो ‘टिकटिक करता टाइमबम’है.

पाकिस्तान की बढ़ती आबादी वहां के संसाधनों पर काफी असर डाल रही है. क्योंकि एक तरफ तो मुल्क खाद्य संकट से जूझ रहा है.हीं दूसरी तरफ मुल्क के पास पीने की पानी की भारी किल्लत है और इन्हीं संकटों को देखते हुए इन दिनों पाकिस्तान में जनसंख्या कंट्रोल की बहस छिड़ी हुई है .तो कहने का मतलब ये है कि पकिस्तान के पीएम को हमारे देश के मामलों में दखल देने के बजाय अपने देश के हालात पर ध्यान देना चाहिए. तो इमरान खान जी कश्मीर का ख्वाब छोडिये अपने देश को दिवालिया होने से बचाइए…