कन्हैया कुमार को राजद की ओर से मिला बड़ा झटका

303

दोस्त दोस्त ना रहा… कुछ ऐसी ही फीलिंग आ रही होगी जेएनयू पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को.
क्योंकि लोकसभा चुनाव लड़ने का उनका सपना शायद टूट सा रहा है. दरअसल बात कुछ ऐसी है कि बिहार में महागठबंधन में लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का बटवारा हो चुका है. सीटों का बटवारे का आलम का कुछ ऐसा है: राष्ट्रीय जनता दल 20 सीटों पर, कांग्रेस 09, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी 05, मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) 03 और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा 03 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

राजद के कोटे से सीपीआई को एक सीट देने की बात हुई है. हालांकि तेजस्वी यादव और कन्हैया कुमार की नजदीकियों को देख कर ऐसा लग रहा था कि उनको और उनकी पार्टी सीपीआई को महागठबंधन में जगह दी जाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ . ऐन मौके पर सब बदल गया.
खैर हम आपको समझाते है कि आखिरकार बात क्या है .तो बात दरअसल यह है कि 2016 में JNU देशद्रोह विवाद के बाद जब कन्हैया कुमार बिहार गए थे, तब लालू यादव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था. लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान में भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा काट रहे हैं और तेजस्वी यादव प्रभारी हैं. सूत्रों का कहना है कि पार्टी के भीतर एक आशंका है कि कुशल संचालक कन्हैया लालू यादव के बेटे तेजस्वी की जमीन हथियाकर राजनीति में आगे न बढ़ जाएं.

पिछले 3 सालों से तेजस्वी यादव और राजद के लिए कन्हैया कुमार मंच पर दीखते रहते थे. कई बार तो तेज़स्वी यादव ने मंच से उनके एकता की बात भी कही थी. लेकिन अब अचानक से क्या हो गया जो कभी तेज़स्वी के अपने हुआ करते the उनको टिकेट देना भी गवारा नहीं
वहीं राजद के एक नेता ने बताया कि कन्हैया कुमार का नाम कभी भी हमारी पार्टी की तरफ से चर्चा में नहीं था. हालांकि राजद प्रवक्ता मनोज झा ने यह बताया कि महागठबंधन में राजद की टिकट पर सीपीआई माले का एक उम्मीदार चुनाव लड़ेगा. हालांकि राजद नेता का यह भी कहना है कि तेजस्वी यादव कन्हैया कुमार को ‘पसंद नहीं करते’, क्योंकि जब कभी भी उन्होंने छात्र नेता को फोन किया, तो उसने उसका जवाब नहीं दिया.

बहरहाल इतने दिनों तक तेज़स्वी यादव ने कन्हैया कुमार का साथ दिया लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने ऐसा फैसला लिया .

तेज़स्वी यादव के इस फैसले ने हर जगह खलबली मचाई है. कुछ लोग ऐसा बोल रहे की राजद ने एक बुलंद उम्मीदवार को ठुकराया है . वहीं कुछ लोग ये बोल रहे है कि तेज़स्वीयादव कन्हैया कुमार के पुपुलारिटी से अशुरक्षित महसूस कर रहे थे इसलिए उन्होंने ऐसा कदम उठाया. खैर जितने मुंह उतनी बातें
हालांकि कन्हैया कुमार ने मन बना लिया है चुनाव लड़ने का. मसलन अगर वह चुनावी मैदान में उतरतें है तो मुकाबला कठिन होगा . अब देखते है कि बेगुसय लोकसभ सीट के लिए लड़ाई भाजपा बनाम कन्हैया होगी या फिर भाजपा बनाम राजद .