कई दिनों से चल रही रस्सा कस्सी के बाद आखिरकार आज 15 महीने पुरानी कमलनाथ की सरकार गिर गई. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार आज विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होना था. लेकिन फ्लोर टेस्ट से पहले ही प्रेस कांफ्रेंस में कमलनाथ में अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया और राज्यपाल के पास अपना इस्तीफ़ा सौंपने चले गए.

इस्तीफ़ा देने से पहले उन्होंने प्रेस कांफ्रेसं को संबोधित किया. अपने 15 महीने के कामकाज का लेखा जोखा दिया और भाजपा पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि ‘बीजेपी को 15 साल मिले थे. आज तक मुझे केवल 15 महीने मिले. ढाई महीने लोकसभा चुनाव और आचार संहिता में गुजरे. इन 15 महीनों मे राज्य का हर नागरिक गवाह है कि मैंने राज्य के लिए जन हितैषी कार्य किया. लेकिन बीजेपी को ये काम रास नहीं आए और उसने हमारे खिलाफ निरंतर काम किया,’

भाजपा पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जबसे उनकी सरकार बनी तब से ही भाजपा साजिशों में लग गई. उन्होंने आरोप लगाए कि धन-बल का प्रयोग कर के उनके विधायकों को तोड़ा गया. लेकिन इस दौरान उन्होंने एक बार भी कांग्रेस की आपसी गुटबाजी और झगड़े पर कुछ नहीं कहा. ना तो उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर कुछ कहा और न उन वाहों का कोई जिक्र किया जिसकी वजह से आज ये नौबत आई.

कमलनाथ सरकार के गिरने के बाद अब भाजपा सरकार बन्ने का रास्ता साफ़ हो गया. कांग्रेस के खाते से मध्य प्रदेश जैसा बड़ा राज्य छीन कर भाजपा ने न सिर्फ उससे महाराष्ट्र का बदला लिया है बल्कि अपने खाते में एक राज्य और जोड़ लिया है. वो राज्य जो 15 सालों से भाजपा का गढ़ था.