मध्य प्रदेश में सरकार बनने के बाद टूटी 14 साल पुरानी परंपरा, सरकार ने वन्दे मातरम् पर लगायी रोक!

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने सामूहिक तौर पर गाये जाने वाले वन्दे मातरम् पर रोक लगाने का फैसला लिया है.. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस फैसले की पुष्टि की है.
मध्य प्रदेश के सचिवालय के सभी कर्मचारी पुलिस बैंड के साथ हर महीने की पहली तारीख को वन्दे मातरम् गीत गाते थे. यह परम्परा पिछले १४ सालों से निरंतर चली आ रही थी लेकिन कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से इसपर रोक लगा दी गयी है. जिसके बाद से राजनीति में बवाल मचा हुआ है.

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आखिर क्यों लिया गया ये फैसला?
हालाँकि कमलनाथ के फैसले से लोगों को हैरानी हो रही है कि आखिर कमलनाथ ने किसको खुश करने के लिए यह फैसला लिया है? जिस गीत को गाकर आजादी के लिए शहीद हुए लोगों में जोश भर जाता था उस गीत पर रोक लगाने के पीछे आखिर क्या कारण हो सकते हैं ?आज भी देश के जवान दुश्मनों के मंसूबों को नाकाम कर देते है, उनका खात्मा कर देते है तो ख़ुशी में वन्दे मातरम गाते है, ऐसे में इस वन्दे मातरम् पर रोक क्यों? अधिक बवाल मचने पर जब कमलनाथ से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि…

‘हर माह की 1 तारीख को मंत्रालय में वंदेमातरम गायन की अनिवार्यता को फ़िलहाल अभी रोक कर नये रूप में लागू करने का निर्णय लिया गया है”.


वन्दे मातरम् गाने को लेकर इसे धर्म से जोड़कर पहले ही विवाद खड़ा किया जा चुका है तो क्या अब सरकार भी इस तरह से विवाद पैदा कर धर्म से जोड़ना चाहती है. इस पूरे मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि

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अगर कांग्रेस को राष्ट्र गीत के शब्द नहीं आते हैं या फिर राष्ट्र गीत के गायन में शर्म आती है, तो मुझे बता दें! हर महीने की पहली तारीख़ को वल्लभ भवन के प्रांगण में जनता के साथ वंदे मातरम् मैं गाऊँगा। जय हिंद!


महीने की पहली तारिख को मंत्रालय के कर्मचारियों समेत मंत्री, मुख्यमंत्री भी इस कार्यक्रम में शामिल होते थे तो क्या वन्दे मातरम् से अब कमलनाथ और कांग्रेस को भी परेशानी होने लगी है.