उपचुनाव से पहले कांग्रेस को जोरदार झटका देने एक बार फिर भोपाल पहुँच रहे हैं सिंधिया, कांग्रेस में मची खलबली

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हलांकि अभी मध्य प्रदेश में विधानसभा के उपचुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन दोनों ही मुख्य पार्टियों भाजपा और कांग्रेस में सियासी दांव-पेंच के जरिये एक दूसरे को मात देने की भरपूर कोशिश की जा रही है. मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होना है. उनमे से 23 सीटों पर कांग्रेस का कब्ज़ा था. लेकिन विधायकों के पाला बदलने के कारण कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी. अब कांग्रेस की नज़र दोबारा उन सीटों पर जीत हासिल कर भाजपा का सियासी गणित बिगाड़ने पर टिकी है. और भाजपा कांगेस के कब्जे वाली सभी सीटें जीत कर उसका राजनीतिक वनवास बढाने की कोशिश में जुटी है. ऐसे में ज्योतिरादित्य सिधिया एक बार फिर भोपाल आ रहे हैं और उनके भोपाल आने की खबर सुनकर कांग्रेस के माथे पर पसीना है.

ऐसा नहीं है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया पहली बार भोपाल आ रहे हैं. पिछली बार वो भोपाल तब आये थे जब उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी और राज्यसभा का नामांकन भर कर वापस दिल्ली लौट गए थे. लेकिन दिल्ली में रहकर भी फोन और सोशल मीडिया के जरिये मध्य प्रदेश की जनता से जुड़े रहें. अब वो 1 जून को भोपाल आने वाले हैं. कांग्रेस की परेशानी इसलिए बढ़ गई है क्योंकि सिंधिया के भोपाल आने से पहले कांग्रेस को झटके पर झटके लगने शुरू हो गए हैं. अभी अभी कांग्रेस के 200 कार्यकर्ताओं ने एक साथ भाजपा का दामन थाम लिया. अब ये अटकलें लगाई जा रही है कि सिंधिया के भोपाल आने के बाद कांग्रेस के कई बड़े नेता कांग्रेस का साथ छोड़ भाजपा में शामिल हो सकते हैं. सिंधिया समर्थक पूर्व महेंद्र सिंह सिसोदिया ने भी इसी बात का इशारा किया. जब 200 कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भाजपा की सदस्यता ली तो महेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा था अभी तो ये शुरुआत है.

सिंधिया के भोपाल पहुँचने से पहले कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है. रिपोर्ट्स की माने तो कांग्रेस के कई पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष भाजपा का दामन थमने को तैयार बैठे हैं. पार्टी को आशंका है कि ये टूट उन इलाकों में भयंकर होगी जिन इलाकों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा है. इसलिए एहतियातन कदम उठाते हुए कांग्रेस ने सिंधिया के प्रभाव वाले इलाकों में पार्टी की कार्यकारिणी भंग कर दी है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जल्द ही अपनी कैबिनेट का विस्तार करने वाले हैं. माना जा रहा है कि इस विस्तार में सिंधिया खेमे के 7 से 8 मंत्री बनाये जा सकते हैं. मांग तो ये भी उठने लगी है कि चूँकि उपचुनाव वाली सारी सीटें सिंधिया खेमे की है इसलिए इस उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही मुख्य चेहरा घोषित किया जाए. हालाँकि भाजपा आलाकमान ने अभी तक इस बारे में चुप्पी साध रखी है. लेकिन ये भी तय है कि कांग्रेस को जोरदार झटका देने के लिए भाजपा कोई तुरूप का इक्का ही चलेगी और कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर वो इक्का सिंधिया ही हो.