न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने मुकदमों का निस्तारण कर इतिहास रच दिया

315

एक बार कोर्ट के चक्कर लगने शुरू होते हैं तो खत्म होने के नाम ही नही लेते, ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि कोर्ट के पास इतने केस होते हैं कि वो किसी केस की सुनवाई रोज़ नही कर सकता,लेकिन एक जज ऐसा भी है जिसने अपने कार्यकाल में रिकॉर्ड सुनवाई की और केस को निपटारा किया है और अपने नाम एक रिकॉर्ड भी स्थापित कर लिया..

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने मुकदमों के निस्तारण में एक नया कीर्तिमान कायम किया है. उन्होंने अपने 15 साल के कार्यकाल में 31 अक्टूबर 2019 तक कुल 1,30,418 मुकदमों का निस्तारण कर इतिहास रच दिया..इतने केस की सुनवाई करने वाले और निपटारा करने वाले अकेले जज बन गये है. जस्टिस अग्रवाल ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर निर्णय सुना कर ख्याति अर्जित की. इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट का भी फैसला आने वाला है.. इसी के साथ इन्होने कई बड़े मामलों की सुनवाई की है और अपना फैसला दिया है. जैसे करगढ़ की रानी से 45 गांव मुक्त कराने का आदेश दिया. ज्योतिष पीठ में शंकराचार्य पद के विवाद पर निर्णय सुनाया. धरना-प्रदर्शन के दौरान संपत्ति के नुकसान की वसूली का आदेश दिया.

सरकारी कर्मियों को सरकारी अस्पताल में ही इलाज कराने का निर्देश दिया. श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर निर्णय सुनाकर ख्याति अर्जित की. अवैध कब्जे वाली नजूल भूमि को मुक्त कराकर सरकार के कब्जे में देने का निर्देश दिया. मंत्रियों और सरकारी अफसरों के बच्चों को सरकारी प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने का निर्देश दिया….अब जस्टिस अग्रवाल ने रिकॉर्ड मामलों के निपटाने की वजह से एक बाद फिर सुर्ख़ियों में हैं. मूलरूप से फिरोजाबाद के रहने वाले जस्टिस अग्रवाल स्नातक आगरा विश्वविद्यालय से किया. इसके बाद मेरठ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की. पांच अक्टूबर 1980 से उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत करके करियर की शुरुआत की.. देश की न्यायपालिका में अगर ऐसे न्यायाधीशों की संख्या बढ़ जाए तो अदालतों में मुकदमों का फैसला लंबे समय तक रुका नहीं रहेगा..

कुछ समय  सरकार द्वारा किए गए मूल्यांकन में पता लगा कि जिस हिसाब से फिलहाल केसों का निपटारा किया जा रहा है, वैसे विभिन्न न्यायालयों में चल रहे पेंडिंग केसों को खत्म करने में 324 साल तक लग जाएंगे. लंबित मामलों की संख्या 2.9 करोड़ तक पहुंच चुकी है जो कि अबतक की सबसे ज्यादा है. इसमें से 71 प्रतिशत क्रिमिनल केस हैं, जिनसे आरोपी फिलहाल अंडर ट्रायल हैं. ये आकडे वाकई भयावह है. टाइम्स ऑफ इंडिया के एक मूल्यांकन से पता लगा है कि 1951 से अबतक के डेटा के मुताबिक, करीब 1800 केस ऐसे हैं जिन्हें 48-58 सालों से खत्म ही नहीं किया जा सका है.

जबकि 24 लाख से ज्यादा केस ऐसे हैं, जो 10 से ज्यादा सालों से पेंडिंग हैं. सुप्रीम कोर्ट में 2006 तक पेंडिंग केसों की संख्या 40 हजार थी, जो 2019 तक बढ़कर 60 हजार केस हो गई. जबकि हाईकोर्ट में बीते 3 सालों में पेंडिंग केसों की संख्या 37 से बढ़कर 44 लाख हो गई. ऐसे में अगर जस्टिस अग्रवाल ने लाखों की संख्या में मामलों का निपटारा करते हैं और रिकॉर्ड बनाते हैं तो उनकी तारीफ होना लाजमी है. वैसे हमारे देश में न्याय में देरी तो होती ही है लेकिन बहुत देरी भी होती है.. इस दिशा में सरकार को काम जरूर करना चाहिए.