10 रूपये में खाना तक नसीब नही होता लेकिन जेएनयू वालों को कमरा चाहिए !

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जब कुछ दिनों तक जेएनयू से कोई खबर निकलकर सामने नही आती है तो बेचैनी होने लगती है कि आखिर बात क्या है? कुछ हो तो नही गया? लेकिन जैसे ही हम ये सोचते है उसके कुछ ही समय बाद कुछ न कुछ निकलकर सामने आ ही जाता है.. अब फिर आ गया है.

जेएनयू में बवाल हो रहा है.. प्रदर्शन हो रहा है.. पुलिस के साथ छात्रों की भिडंत हो रही है.. भिडंत ऐसे वैसे नही हो रही है बल्कि इसके लिए मुद्दा भी बहुत बड़ा है..

आप हॉस्टल में रहकर अगर पढाई किये होंगे तो आपको इस बारे में जानकारी होगी कि वहां की फीस क्या होती है.. अब देखिये जेएनयू में क्या हाल है.
    दरअसल जेएनयू प्रशासन ने हॉस्टल में इस्टैबलिशमेंट चार्जेज, क्रॉकरी और न्यूजपेपर आदि की कोई फीस नहीं बढ़ाई है. लेकिन रूम रेंट बढ़ा दिया है. इसी के साथ कुछ नए नियम भी बना दिए गये है. छात्रों को ये नियम रास नही आ रहा है तो फिर क्या था उतर आये प्रदर्शन करने..
दरअसल कहा जा रहा है कि पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कैम्पस में चल रहा था लेकिन आज दीक्षांत दिवस समारोह के अवसर पर छात्रों का प्रदर्शन उग्र हो गया. इस प्रदर्शन के दौरान एक शर्मनाक वीडियो भी निकल कर सामने आया है कि एक महिला के साथ कुछ प्रदर्शनकारी छात्राएं अभद्रता कर रही है. महिला के कपड़े खींचे जा रहे है. हालाँकि समय रहते महिला जमीन पर बैठ गयी और किसी तरह से खुद को बचाया. बताया जा रहा है कि ये महिला जेएनयू की ही प्रोफ़ेसर है. अब आप सोचिये कि प्रदर्शन का ये कौन सा तरीका है? ये वही लोग है जो महिलाओं के सम्मान में आकर सड़कों पर तांडव करते हैं और खुद महिला के कपडे फाड़ने की कोशिश करते हैं. इसके लिए हमारे पास एक शब्द है वो है शर्मनाक!

अब आइये  समझाते है कि आखिर इन छात्रों से पहले कितनी फीस वसूली जाती थी और अब नए फीस स्ट्रक्चर में क्या बदलाव किये गये है? दरअसल पहले छात्रों से सिंगल बेड के लिए 10 रूपये चार्ज था जो अब बढाकर 300 कर दिया गया है और डबल के लिए पहले चार्ज 20 रूपये हुआ करता था जिसे अब बढ़ाकर 600 रूपये कर दिया गया है. इसके साथ 1700 रूपये सर्विस चार्ज लगा दिया गया है. वहीँ वन टाइम मेस सेक्युरिटी भी 5500 से बढाकर 12000 कर दी गयी है. इसी के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए छात्र एकजुट हुए.
अब सोचने वाली बात है कि 10 की 300 रूपये और 20 की जगह 600 रूपये ऐसे कैसे चलेगा? इस बच्चो पर कितना अत्याचार कर रही है सरकार? बाबा आदिल के ज़माने से चले आ रहे फीस में क्यों कोई बदलाव किया जाए? नही, उतने पैसों में तो छात्र एक दो ढोलक एक दो सेट काले और लाल कपडे और भी बहुत सामन खरीद सकते हैं.

  देश का विकास होना चाहिए, अर्थव्यवस्था मज़बूत होनी चाहिए. पिछड़े शहरों का कायाकल्प होना चाहिए लेकिन जेएनयू वालों की फीस जस की तस रहनी चाहिए..नही तो वही होगा जो जेएनयू वाले हमेशा से करते आये है प्रदर्शन.. विरोध प्रदर्शन… एक ढपली कुछ लोग और फिर आजादी के नारे .
1000 रूपये में भी दिल्ली और एनसीआर में ढंग का कमरा नही मिल सकता, हालाँकि छात्रों को 300 और 600 में बेड मिल रहा है. लेकिन छात्रों का कहना है कि इससे छात्रों पर बहुत फर्क पड़ने वाला है. इसलिए इसे वापस लिया जाए.

छात्रों के अनुसार, वे हॉस्टल मैनुअल, पार्थसारथी चट्टानों पर प्रवेश और छात्रसंघ कार्यालय पर ताला लगाने के के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैनुअल में शुल्क वृद्धि और ड्रेस कोड जैसे प्रतिबंध लगाए गए हैं. हम 15 दिन से विरोध कर रहे हैं, लेकिन कुलपति हमसे बात करने को तैयार नहीं हैं.

  विरोध करना, प्रदर्शन करना सब जयाज है लेकिन एक लिमिट में रहकर… जिस तरह से पुलिस के साथ संघर्ष छात्र कर रहे थे अगर बड़ी मात्रा में लाठीचार्ज हो जाती, किसी छात्र को चोट लग जाती, या फिर कोई घटना हो जाती तो यही लोग कल पुलिस को कोसते नजर आते. हालाँकि लाठीचार्ज की खबर सामने आई है. ये लाठीचार्ज कितने बड़े पैमाने पर किया गया है इसकी जानकारी नही है.