बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और जेडीयू के बीच इस फ़ॉर्मूले से बंट सकती है सीटें

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बिहार में विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं लेकिन सीटों को लेकर गुणा भाग अभी से शुरू हो गया है. इस बार समीकरण बदले हुए हैं और गठबंधन का स्वरुप भी. लिहाजा सीट बंटवारे में संभावित विवाद को देखते हुए फोर्मुलों पर चर्चा शुरू हो चुकी है. 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ लोजपा, रालोसपा, और हम जैसी पार्टियाँ थी जबकि जेडीयू के साथ कांग्रेस और राजद. लेकिन इस बार गठबंधन का स्वरुप पूरी तरह से बदल गया है. पार्टनरों ने पाला बदल लिया है. पिछली बार एक दुसरे के खिलाफ ;लड़ने वाली भाजपा और जेडीयू इस बार एक पाले में हैं. जबकि एक साथ लड़ने वाले जेडीयू और राजद+कांग्रेस एक दुसरे  के खिलाफ. छोटी पार्टियाँ जीतन राम मांझी की हम और उपेन्द्र कुशवाहा की रालोसपा भी पाला बदल कर राजद और कांग्रेस के साथ जा चुकी हैं.

मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक़ इस बार भाजपा और जेडीयू लोकसभा चुनाव की तरह 50-50 फ़ॉर्मूले पर चुनाव लड़ सकते हैं. जबकि बाकी सीटें लोजपा के खाते में जा सकती है. अगर 2015 के आंकड़ों को देखें तो जेडीयू ने 80 सीटें हासिल की थी जबकि भाजपा को 53 सीटें मिली थी. 24 ऐसी सीटें हैं जहां बीजेपी पहले और जेडीयू दूसरे नंबर पर रही थी, जबकि 28 सीटें ऐसी हैं, जहां जेडीयू पहले नंबर पर थी और वहां बीजेपी दूसरे नंबर पर रही थी.

लोकसभा चुनाव में भाजपा और जेडीयू बराबर बराबर सीटों पर लड़ी थीं जबकि बाकी सीटें लोजपा के खाते में गई थी. कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ भाजपा मजबूत है और कई सीटें ऐसी हैं जहाँ जेडीयू मजबूत है. लोकसभा में भी सेटों का बंटवारा इसी तरह से हुआ था. सीमांचल के इलाके जहाँ भाजपा कमजोर है वहां जेडीयू ने अपने उम्मीदवार उतारे थे औत्र जीत का परचम लहराया था. जबकि उत्तर और मध्य बिहार जहाँ जेडीयू कमजोर थी वहां भाजपा ने अपने उम्मीदवार उतारे थे और जीत का परचम लहराया था. हालाँकि अभी चुनावों में कुछ महीने बाकी है लेकिन सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है.