भारत से दोस्ती निभाते हुए जापान ने RCEP पर चीन को दिया बड़ा झटका

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RCEP समझौते को लेकर भारत में खूब बवाल हुआ, विपक्ष ने इसे किसानों और गरीबों के हक के खिलाफ बताया और केंद्र सरकार पर मध्यवर्गीय परिवारों की आर्थिक परिस्थित के साथ समझौता करने और उसको बिगाड़ने के आरोप लगाये, जिसके जवाब में केंद्र सरकार के पक्ष में पियूष गोयल ने भी पूर्व की UPA सरकार को भी सवालों के दायरे में लाकर खड़ा किया और जमकर पलटवार किया. लेकिन फिर प्रधानमन्त्री मोदी ने RCEP समझौते में शामिल होने के खुद के फैसले को पलट दिया और भारत को इससे पीछे खींचने का फैसला किया, इसके बाद प्रधानमन्त्री मोदी ने ये कहा कि हमने RCEP में अपनी जिन नीतियों पर चर्चा की और जिन विषयों को वहां रखा उसका कोई स्पष्ट और संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने की वजह से हम RCEP में शामिल नहीं होंगे.

लेकिन RCEP से पीछे हटने वाले देशों में भारत ही एकमात्र देश नहीं था बल्कि एशिया में मित्र देश जापान भी अब RCEP में शामिल नहीं होने के संकेत दे रहा है जापान ने एक बार फिर इस बात को सांकेतिक तरीकों से लगभग स्पष्ट कर दिया है कि भारत से उसकी दोस्ती गहरी है इसलिए वह भी जबतक भारत की चिंताओं को RCEP में समझा नहीं जाता और उनपर स्पष्ट उत्तर नहीं मिलता तबतक शामिल नहीं होगा. भारत ने RCEP से पीछे हटने के लिए जिन चिंताओं को व्यक्त किया था उनमें गरीबों की जीविका पर इससे पड़ने वाले प्रभाव की समस्या भी थी जिसपर सभी सदस्य देशों ने भारत की इन्ही चिंताओं को दूर करने के लिए कोई एकमत विचार जाहिर नहीं किये. जापान के मुताबिक सभी सदस्य देशों को भारत की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता दिखानी होगी तभी RCEP कारगर तरीके से काम करेगा.

गौरतबल है कि चीन का रुख इस मामले में भारत के समर्थन में नहीं था लिहाजा जापान जैसे तकनीकी रूप से अतिविकसित देश के इस समझौते से पीछे हटने के बाद चीन की महत्वाकांक्षाओं को झटका लगेगा. जापान के विदेश मंत्रालय के उप प्रेस सचिव अत्सुशी कैफू ने भारत में संवाददाताओं से कहा कि बैठक में जापानी मंत्रियों ने इस मामले में भारत सरकार के सामने जापान का रुख रखा है और इसपर खुलकर बातचीत भी की है.इस वक्त जापान सरकार के दोनों मंत्री भारत- जापान रक्षा एवं विदेश मंत्री की एक साथ होने वाली पहली बैठक के लिए भारत आए हुए हैं.  जापान के इस फैसले के बाद चीन को शायद भारत की समस्याओं को नजरअंदाज करने के लिए अपनी नीतियों पर मंथन करने की जरूरत पड़ने वाली है. भारत और जापान की दोस्ती इस फैसले के बाद और भी प्रगाढ़ होने की सम्भावना है.