अब जम्मू कश्मीर में बदल गये नियम, यहाँ जानिए क्या क्या बदला

250

धारा 370 हटाए जाने के बाद 31 अक्टूबर से जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बन गये है. जम्मू कश्मीर के साथ-साथ लद्दाख को भी केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है. केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने के बाद इन राज्यों में कई नियम और कानून बदल गए हैं. आइये एक नजर डालते है कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख में क्या क्या बदलाव आने वाले हैं.

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले 150 से ज्यादा पुराने कानून खत्म हो जाएंगे, जबकि आधार समेत 100 से ज्यादा नए कानून लागू हो गए हैं लागू कानूनों में आधार, मुस्लिम विवाह विच्छेद, सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, मनरेगा, भ्रष्टाचार निवारक, मुस्लिम महिला संरक्षण और शत्रु संपत्ति शामिल हैं. केंद्र शासित प्रदेश बनते ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संसद की ओर से पारित 106 केंद्रीय कानून तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इसमें शिक्षा का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रशासित प्रदेश बनने पर जम्मू-कश्मीर के 164 प्रदेश स्तर पर बनाए गए कानून खत्म हो गए हैं. जम्मू कश्मीर में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पद कायम रहेगा, जबकि लद्दाख में इंस्पेक्टर जनरल  (आईजी) पुलिस के मुखिया होंगे. पुलिस केंद्र के निर्देश पर काम करेगी.

 फिलहाल जम्मू-कश्मीर की श्रीनगर और जम्मू पीठ मौजूदा व्यवस्था के तहत काम करेंगी और लद्दाख के मामलों की सुनवाई भी पहले जैसी ही होगी.आनेवाले दिनों में भी इन दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में केंद्र सरकार के निर्देश पर ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती होगी. जम्मू कश्मीर और लद्दाख में फिलहाल जो आयोग काम कर रहे थे अब उनकी जगह केंद्र सरकार के आयोग अपनी भूमिका निभाएंगे.

आईएएस, आईपीएस और दूसरे केंद्रीय अधिकारियों तथा भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो लेफ्टिनेंट गवर्नर के नियंत्रण में रहेंगे, न कि जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश की निर्वाचित सरकार के तहत काम करेंगे. भविष्य में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अफसरों की नियुक्तियां अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और संघशासित कैडर से की जाएगी. पहले कैबिनेट में 24 मंत्री बनाए जा सकते थे, अब दूसरे राज्यों की तरह कुल सदस्य संख्या के 10% से ज़्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते हैं. जम्मू कश्मीर विधानसभा में पहले विधान परिषद भी होती थी, वो अब नहीं होगी. हालांकि राज्य से आने वाली लोकसभा और राज्यसभा की सीटों की संख्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर से 5 और केंद्र शासित लद्दाख से एक लोकसभा सांसद ही चुन कर आएगा. इसी तरह से केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर से पहले की तरह ही राज्यसभा के 4 सांसद ही चुने जाएंगे.

जम्मू कश्मीर में अब तक 87 सीटों पर चुनाव होते थे. जिनमें 4 लद्दाख की, 46 कश्मीर की और 37 जम्मू की सीटें थीं. लद्दाख की 4 सीटें हटाकर अब केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में 83 सीटें बची हैं, जिनमें परिसीमन होना है.

जिस नए कश्मीर का नारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही दे चुके हैं, अब उसका शुभारंभ हो गया है. उम्मीद तो यही है कि अब जम्मू कश्मीर में खून खराबे का अंत होगा. जम्मू कश्मीर और लद्दाख विकास की राह पर चलेगा