तो इसलिए मोदी का फिर से प्रधानमंत्री का बनना पक्का है!

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लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.. तारीखों का एलान हो चूका है.. चुनाव आयोग अपने काम में लग गया है… चुनाव बड़ा दिलचस्प होने वाला है.. मोदी बनाम पूरा विपक्ष!
प्रधानमंत्री मोदी का सामना करने के लिए कांग्रेस की तरफ से अध्यक्ष राहुल गांधी ने हुंकार भरी है… वहीँ क्षेत्रियों पार्टियों ने भी मोदी के खिलाफ हुंकार भरने में कोई कसर नही छोड़ी है लेकिन आज हम आपको ये बताने जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी पूरे विपक्ष की एकजुटता के बाद भी मज़बूत स्थिति में क्यों हैं? आखिर कैसे मोदी राहुल गाँधी और विपक्ष के लिए मुसीबत बनकर उन्हें धराशाही कर सकते है.
नंबर वन नेता है पीएम मोदी!
प्रधानमंत्री मोदी लगातार पूरे देश और विश्व के चर्चित नेताओं में बने हुए हैं. भारत में उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नही आई है. आज भी लोग प्रधानमंत्री को सुनना चाहते हैं… पीएम मोदी का विशाल कद बीजेपी को लगातार ऊर्जा दे रहा है. सर्वे में लगातार पीएम मोदी बढ़त बनाये हुए हैं, अपनी लोकप्रियता पर कायम हैं. पीएम मोदी चुनाव घोषणा से पहले ही चुनाव तैयारियों में जुट गये हैं वहीं विपक्ष अभी गठबंधन और महागठबंधन के खेल से नही उबर पा रहा है.. चुनाव अभियान के दौरान मोदी ने अथक ऊर्जा, लोगों से सीधा जुड़ना और पार्टी के कद से भी ज्यादा विपक्ष पर वार करने की क्षमता दिखाई है. ‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारे के साथ बीजेपी और सरकार को एक करिश्माई नेतृत्व मिला है.
राहुल गाँधी का नेतृत्व
पीएम मोदी का सामना करने के लिए राहुल गाँधी सामने हैं. राहुल गाँधी की अध्यक्षता में पहली बार पार्टी लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही हैं वो भी ऐसे में जब कांग्रेस पार्टी बेहद बुरे दौर से गुजर रही हैं. कांग्रेस की हालत पिछले कुछ समय से सुधरी हैं लेकिन इतनी भी नही सुधरी हैं कि वे पीएम मोदी का मुकाबला कर सकें. जनसमूह में कमी और कार्यकर्ताओं में कम उत्साह कांग्रेस के लिए नुकसानदायक है. प्रियंका गाँधी के पार्टी में सक्रीय रूप से शामिल होने पर पार्टी को कुछ फायदा जरुर पहुंचेगा लेकिन मोदी की लोकप्रियता के सामने ये सब फीका पड़ सकता है.
अमित शाह की इलेक्शन इंजीनियरिंग
बीजेपी अमित शाह की अध्यक्षता और पीएम मोदी की नेतृत्व में चुनाव लड़ने जा रही हैं, जिनके पास सालों का अनुभव है. जोड़ तोड़, चुनाव लड़ने और वोटरों को आकर्षित करने का तरीका है. इनके सामने खड़े हैं राहुल गाँधी जो परिवारवाद, कार्यकर्ताओं की निराशा से झूझ रहे हैं वहीँ बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में लगातार जोश हैं, उमंग हैं. अमिता शाह को चुनाव लड़ने का काफी अनुभव है और प्रधानमंत्री जैसा प्रभावी चेहरा है. इसका फायदा बीजेपी की मिलन तय माना जा रहा है.


मोदी सरकार की योजनायें
मोदी सरकार की योजनायें जो ज्यादातार जरुरतमंदों के लिए थी. जैसी बिजली, गैस, टैक्स और महिलाओं के लिए तमाम ऐसी योजनायें जो उनकी जरुरत थी.


प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छोटे और मध्यम कारोबारियों को बिना किसी सिक्योरिटी के कर्ज देने का प्रावधान है
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे 5 करोड़ परिवारों को बिना किसी सिक्योरिटी राशि के एलपीजी कनेक्शन दिए जाने का प्रावधान किया गया
ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत देश में सभी परिवारों के लिए 2022 तक घर का प्रावधान किया गया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन को 2 अक्टूबर 2014 को लॉन्च किया और 2 अक्टूबर 2019 तक इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्ण स्वच्छता का लक्ष्य तय किया गया.


इससे मोदी सरकार गरीबों को भी अपने साथ लाने में कामयाब हुई हैं. काला धन, घूसखोरी और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मोदी सरकार और बीजेपी को इसका फायदा मिलना तय है.


पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन
जवानों पर हमला कर आतंकियों ने मोदी सरकार को एक्शन लेने पर मजबूर कर दिया है. जिस पर पीएम मोदी ने विश्व के कई बड़े और ताकतवर देशों को साथ लेकर पाकिस्तान पर दबाव बनाया. एयर स्ट्राइक की.. आतंकियों के कैम्पों को तबाह किया.. इससे पहले भी मोदी सरकार में ही सेना ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक किया. पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की मांग देश में बड़े समय से हो रही थी. देश कई बड़े आतकी हमलों को झेल चुका था.. ऐसे में सभाविक है कि लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन की मांग उठे…वहीँ हुआ पुलवामा के बाद, पूरे देश से पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन की मांग उठी..मोदी ने देश को भरोसा दिलाया और पाकिस्तान के खिलाफ एयर स्ट्राइक की. पाकिस्तान को झुकना पड़ा… पाकिस्तान से टकराव के बाद पूरे देश का राजनीतिक समीकरण ही बदल गया वही विपक्ष सरकार और सेना से इसका सबूत मांगकर लोगों को नाराज कर दिया.. जहां सपा बसपा गठबंधन कांग्रेस को २- सीट तक देने को तैयार नही वहीँ कांग्रेस के सामने 12 सीटों का ऑफर मिल गया. केजरीवाल कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए आहें भर रहे हैं. लेकिन सफलता किसी को नही मिल पा रही हैं… इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है

महागठबंधन की पहेली
महागठबंधन का खेल आम आदमी की समझ में नही आ रहा है. एक तरफ जहां विपक्ष एकजुट होने का सन्देश देना चाहता है वहीँ क्षेत्रीय पार्टियाँ के आपस में गठबंधन करने से लोगों को भारी कंफ्यूजन में हैं. उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के गठबंधन से दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं में नाराजगी हैं जिसका फायदा बीजेपी को मिलेगा. इसी तरहके हालात लगभग पूरे देश में हैं. क्षेत्रीय पार्टियों का वर्चस्व सिर्फ एक दो राज्य तक ही सीमित हैं. राहुल गाँधी के नेतृत्व में महागठबंधन चुनाव लड़ने के लिए तैयार नही हो पा रहा हैं और महागठबंधन किसी को चेहरा नही बना पा रहा है. ऐसे में लोगों की समझ में नही आ रहा है मोदी बनाम कौन?
‘हिदुत्व’ वाला नया युवा वोटर
चुनाव आयोग के मुताबिक देश में 8.4 करोड़ लोग पहली बार वोट डालने जा रहे हैं, जो कि कुल मतदाताओं का करीब 10 फीसदी हैं यह वह युवा जनसंख्या है, जो मोदी के ‘न्यू इंडिया’, ‘मजबूत सरकार’, ‘हाऊ इज द जोश’ जैसे नारों से प्रभावित है. इस युवा जनसंख्या को यह बात प्रभावित करती है कि ‘आतंकवाद पर सख्त नीति होनी चाहिए’, ‘चलो पहले कश्मीर मसला निपटा लें’. युवाओं के बीच राहुल गाँधी की अपेक्षा पीएम मोदी कई गुना ज्यादा लोकप्रिय हैं. इसका फायदा बीजेपी मिला तय है.
तो ये रहे वो पॉइंट जहाँ से बीजेपी को फायदा मिल सकता है कांग्रेस इसका नुकसान झेल सकती है..