रोटी का साइज़ 20 सेमी ना होने पर पत्नी को बेरहमी से मारता था ये पति

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जुलाई 1996 में एक फिल्म आई थी “दरार”.. जिसमें एक शक्की और PSCHYCO पति का किरदार ऐसे दिखाया गया था जिसे देखने के बाद लड़कियों की शादी के खूबसूरत सपने डरावने सपनों में बदल गए थे.. यह तो फिल्म थी लेकिन आज हम आपको ऐसे ही आदमी की कहानी बताएँगे जो दुनिया के लिए तो बड़े अच्छे होते हैं.. पर उसका हैवानियत भरा रूप सिर्फ उसकी बीवी ने देखा.. यह कहानी एक लड़की की है जिसकी शादी 2008 में एक आईटी प्रोफेशनल से होती है लड़का अच्छे घर से है.. पढ़ा लिखा है.. अच्छा कमाता है.. दिखने में भी सही है तो बस दोनों की शादी कर दी जाती है.. एक दुसरे को जानने समझने के लिए बिना ज्यादा वक़्त दिए.. बहुत धूमधाम से शादी कर दी जाती है और लड़का लडकी को अपने साथ लेकर पुणे चला जाता है..

A Striking Image of a Afro American Woman Crying

और यहीं से शुरू होता है लड़की पर यातनाओं का सिलसिला.. समाज के आगे बड़ा सभ्य और अच्छा दिखने वाला यह लड़का घर में बीवी पर बात बात पर गुस्सा हो जाता था और उससे गाली गलौज करने लगता था.. उसपर चिल्लाने लगता था.. “तुमने यह सामान यहाँ रख दिया.. तुम्हारे बाल यहाँ पड़े हैं.. मेरी शर्ट ठीक से साफ़ नहीं है..” लड़के को लडकी की हर छोटी बात पर अपनी बेईज्ज़ती महसूस होती थी.. तुमने पैकिंग सही से नहीं की.. तुमने सब्जी में मेरी पसंद के मसाले नहीं डाले.. यहाँ तक कि वो अपनी नौकरी में प्रमोशन ना होने का ज़िम्मेदार भी उसे ठहरता कि तुम मेरी जिंदगी में पनौती हो… और यह छोटी छोटी बातें उसके घर में बड़े क्लेश की वजह बन जाती हैं.. लड़की घरवालों को बताती है तो उसे बोला जाता कि शुरुआत में हर पति पत्नी के बीच यह सब होता है.. थोड़े समय में सब ठीक हो जाएगा.. पर यह शुरुआत उनके प्यार के रिश्ते की  नहीं.. शुरुआत लडकी की जहन्नुम जैसी ज़िन्दगी की होती है.. लड़का बात बात पर हैवानों की तरह उससे मारपीट करने लगता है.. एक बार ऐसे ही किसी बात पर गुस्सा होकर वो अपने डम्बल्स उसके कंप्यूटर पर फेंक देता है.. और फिर उसी दिन रात में वो लड़की को बेहोश हो जाने तक पीटता रहता है.. पर उसकी हैवानियत यहाँ नहीं रूकती वो उसे घसीटते हुए नल के नीचे ले जाता है.. उसे होश में लाता है और फिर उसके साथ बेदर्दी से मारपीट करता है..

2010 में बीवी को प्रताड़ित करने का फिर नया तरीका खोज निकलता है.. और इस बार उसे बोलता है कि अपने हर छोटे बड़े काम को एक्सेल शीट में मेन्टेन करो.. और इतना ही नहीं अपने हर काम को नोटबुक में भी लिखो कि दिन भर में क्या क्या काम किया है.. कौन सा काम पूरा है उसे अलग कलर से मार्क करके लिखो और जो काम अधूरे हैं उन्हें अलग कलर में मार्क करो.. और अगर कोई काम दी हुई डेडलाइन यानि समय सीमा के अन्दर पूरा नहीं हुआ तो उसके आगे कॉलम बनाकर उसके पूरे ना होने की वजह लिखो…

और यह सारी रिपोर्ट उसे अपने पति को निश्चित समय पर रोज सुनानी होती थी.. और फिर हफ्ते के आखिरी दिन कॉपी में लिखी सारी रिपोर्ट पति को दिखानी होती थी.. और जब वो ऐसा नहीं कर पाती थी.. तो सोचिये क्या होता था.. फिर से बेरहमी से उसे मारा जाता था

इन्फक्ट घर के रोजमर्रा के काम जैसे खाना बनाने में भी उसे पति के दिए कठोर नियमों का पालन करना होता है… नाश्ता एक फिक्स मेनू के हिसाब से ही बनता था और रोटी कितनी बड़ी होगी यह भी उसका पति निर्धारित करता था.. उसका पति हर रोज़ स्केल लेकर यह चेक करता था कि रोटी 20 से.मी. की है कि नहीं.. और रोटी ही नहीं आटा कहाँ से आया है.. किधर से किस डेट में पिसवाया है.. कितने दिन तक सही रहेगा और कितने रूपये में आया है उसे यह सारी जानकारी चाहिए होती थी… और अगर इन नियमों का पालन नहीं होता था तो इनकी जगह और भी कठोर नियमों का पालन करना होता था..

अपने पति से बात करने के लिए भी उसे पहले पति को मेल करना होता था और उससे टाइम माँगना होता था.. लडकी ने बोला..

“मेरी जिंदगी जहन्नुम हो गई थी… मुझे हर काम के लिए एक प्रोटोकॉल फॉलो करना होता था.. उसने हर संभव तरीके से मेरा शोषण किया और मुझे अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी मजबूर किया”

हद तो तब हो गई जब उसका पति अपनी बेटी को प्रताड़ित करने लगा..

एक बार वो इतना गुस्सा हुआ कि किचेन में से चाक़ू ले आया और बेटी को पकड़ के उसे मारने की धमकी देने लगा.. वो अक्सर ख़ुदकुशी की धमकी देकर भी मुझे डराता था.. एक बार उसने मेरे ऊपर बाल्टी भर के पानी डाला और फिर मुझे और मुझे एयर कंडिशन्ड रूम में वेसे ही गीले कपड़ों में सुलाया.. एक बार मेरी बेटी को बालकनी से नीचे लटका दिया और उसे गिराने की धमकी देने लगा.

हर तरह के टार्चर सह कर उसने अंतत: पुलिस की मदद ली.. पति और उसके परिवार के खिलाफ घरेलु हिंसा कि कंप्लेंट दर्ज कराई.. और फिर तलाक की अर्जी डाल दी… पति की इतनी यातनाएं सहकर शुक्र है अब वो उसके चंगुल से बाहर है

लेकिन बात अब यह है कि घरेलु हिंसा की कहानियां बहुत आम हैं.. बेशक समय कितना ही बदल गया हो लेकिन आज भी समाज में ऐसे लोग हैं जो औरतों को सिर्फ घर के काम करने, बच्चे पैदा करने और ठरक मिटाने की वस्तु से ज्यादा कुछ समझते ही नहीं.. उनको बोलने की इजाज़त नहीं.. बस एक मशीन की तरह काम करें, दो वक़्त की रोटी खाते रहे और चुप रहे. और ऐसा नहीं है कि ऐसा सोचने वाले पढ़े लिखे नहीं होते.. जिस लड़के का यहाँ ज़िक्र किया गया है वो आईटी प्रोफेशनल था बस उसकी सोच घटिया थी.. और घटिया सोच किसी की भी हो सकती है..

बड़े बड़े वकील जो बलात्कार में लड़की को दोषी ठहरा देते हैं.. प्रोफेसर जो लड़की कि वर्जनिटी को कोल्ड ड्रिंक की bottle की तरह बता देते हैं.. नेता जो बलात्कार को छोटी गलती बता देते हैं और कह देते हैं कि लड़कों से गलती हो जाती है.. और अभिनेता जो लड़कों की असफलता के पीछे लडकी को ज़िम्मेदार ठहरा देते हैं..

लड़कियों को लेकर सबके संकीर्ण विचारों से आप भली भांति अवगत हैं.. सोच आप नहीं बदल सकती मगर अपनी नियति जरूर बदल सकती हैं.. बहुत सारी लड़कियां घरेलु हिंसा का शिकार बनती हैं मगर समाज और परिवार में बेईज्ज़ती के बारे में सोच कर चुप रह जाती हैं तो कभी बच्चों के बारे में सोचकर तो कभी यह सोचकर कि कभी ना कभी मेरे पति का ह्रदय परिवर्तन हो जायेगा.. मगर ऐसा करके आप उनके गुनाह को और बढ़ावा देती हैं.. आप यह याद रखें कि अत्याचार करने वाले से भी ज्यादा गुनहगार अत्याचार सहने वाला होता है.. जिस समाज और परिवार के डर से आप चुप हैं वो आपकी मदद करने कभी नहीं आएगा.. जिन बच्चों की खातिर आप अपने परिवार को बचाने की कोशिश कर रही हैं.. वो बच्चे उस बाप के साए में कभी अच्छे इंसान नहीं बन पायेंगे और घटिया आदमी का ह्रदय परिवर्तन कभी नहीं होता वो और घटिया बनता जाता है.. तो उसके सुधरने की उम्मीद ना करें

अब वो जानें जो आपको करना है

सबसे पहले घरेलु हिंसा की शिकायत वीमेन हेल्पलाइन न. 1091 पर करें

स्टेट कमीशन फॉर वीमेन पर शिकायत दर्ज कराएं

बहुत सारी महिला संस्थाएं हैं जो घरेलु हिंसा कि शिकार औरतों की मदद करती हैं उनसे संपर्क करें.

घरेलु हिंसा के खिलाफ section 498-A के तहत नजदीकी पुलिस स्टेशन में ही अपनी कंप्लेंट लिखवायें

सोशल मीडिया के ज़रिये अपने साथ हुई ज्यादतियों को बताएं

कानूनी सलाह लें

किसी भी ऐसे रिश्ते में ना रहे जहाँ आपके अधिकारों का हनन हो रहा है.. जहाँ आपका शोषण हो रहा है.. जहाँ आप पर अत्याचार हो रहा है. ये ज़िन्दगी आपकी है.. शरीर आपका है.. सांसें आपकी हैं और हर पल आपका है.. अपनी खुशियों की ज़िम्मेदारी खुद लें.. हिम्मत से डट कर विरोध करें.. आपको रास्ते भी मिलेंगे और जीत भी